दिल्ली के छात्रों की बल्ले-बल्ले, नई प्राइवेट यूनिवर्सिटी में मिलेगा आरक्षण, जानिए क्या है नया नियम

नई दिल्ली (Delhi Private Universities Bill). दिल्ली में उच्च शिक्षा का सपना देख रहे स्टूडेंट्स के लिए बेहद राहत भरी खबर है. दिल्ली कैबिनेट ने बहुप्रतीक्षित ‘प्राइवेट यूनिवर्सिटीज बिल’ के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है. अब तक दिल्ली में प्राइवेट यूनिवर्सिटी की स्थापना के लिए कोई अलग और स्पष्ट कानूनी ढांचा नहीं था. इस वजह से नए संस्थान खोलने में काफी अड़चनें आती थीं. सरकार के इस कदम से दिल्ली में ग्लोबल लेवल की प्राइवेट यूनिवर्सिटी की स्थापना का रास्ता साफ होगा. साथ ही उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों का रुख करने वाले हजारों स्टूडेंट्स को अपने ही शहर में बेहतर मौके भी मिल सकेंगे.

इस नए बिल में केवल यूनिवर्सिटी खोलने की ढील ही नहीं दी गई है, बल्कि स्टूडेंट्स के हितों की सुरक्षा और फर्जी यानी ‘फ्लाई-बाय-नाइट’ संस्थानों पर लगाम कसने के लिए सख्त प्रावधान भी किए गए हैं. ड्राफ्ट बिल के मुताबिक, दिल्ली के स्थानीय छात्रों को हर कोर्स में 25% आरक्षण मिलेगा. इसके साथ ही, यूनिवर्सिटीज की मनमानी रोकने के लिए 2 विशेष समितियां बनाई जाएंगी और उच्च शिक्षा मंत्री के पास सीधी निगरानी का अधिकार होगा. समझिए दिल्ली सरकार के इस नए बिल में स्टूडेंट्स और शिक्षा व्यवस्था के लिए क्या-क्या खास प्रावधान किए गए हैं.

दिल्ली के स्थानीय स्टूडेंट्स को 25% आरक्षण

नए बिल का सबसे बड़ा फायदा दिल्ली के बच्चों को मिलने वाला है. कानून बनने के बाद दिल्ली की हर प्राइवेट यूनिवर्सिटी को अपने हर कोर्स में 25 प्रतिशत सीटें दिल्ली के छात्रों के लिए रिजर्व रखनी होंगी. यह दाखिला दिल्ली सरकार (GNCTD) की मौजूदा आरक्षण नीति के तहत ही होगा, जिससे स्थानीय मेधावी छात्रों को आसानी से दाखिला मिल सकेगा.

लैंड क्लॉज खत्म, लेकिन सुविधाओं पर पूरा जोर

इस बिल में एक बड़ा बदलाव जमीन की शर्त को लेकर किया गया है. अब यूनिवर्सिटी खोलने के लिए जमीन के तय आकार यानी न्यूनतम क्षेत्रफल की बाध्यता (लैंड क्लॉज) को खत्म कर दिया गया है.. यानी जगह कितनी भी छोटी या बड़ी हो, यूनिवर्सिटी खोली जा सकेगी. हालांकि, स्पॉन्सरिंग संस्था के पास कम से कम 30 साल की वैध लीज या जमीन होनी चाहिए. इसके अलावा, मॉडर्न लैब, लाइब्रेरी, डिजिटल रिसोर्सेस और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर देना अनिवार्य होगा.

सरकारी निगरानी: विजिटर होंगे उच्च शिक्षा मंत्री

निजी विश्वविद्यालयों को पूरी छूट मिलने के बावजूद सरकार का नियंत्रण उन पर बना रहेगा. दिल्ली के उच्च शिक्षा मंत्री इन यूनिवर्सिटीज के ‘विजिटर’ होंगे. विजिटर के पास यूनिवर्सिटी से कोई भी रिपोर्ट मांगने, कैंपस का निरीक्षण कराने और अनियमितता पाए जाने पर सख्त निर्देश देने या जांच बैठाने का पूरा अधिकार होगा.

दो विशेष समितियों का गठन और बोर्ड में सरकारी दखल

फर्जी या कागजी संस्थानों पर लगाम कसने के लिए सरकार 2 विशेष समितियों का गठन करेगी जो इन यूनिवर्सिटीज की गतिविधियों पर लगातार नजर रखेंगी. इसके अलावा, यूनिवर्सिटी के ‘बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट’ में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव या उनके प्रतिनिधि की मौजूदगी अनिवार्य होगी. सरकार से जुड़े किसी भी फैसले पर उनकी सहमति के बिना निर्णय नहीं लिया जा सकेगा.

यूनिटरी मॉडल और UGC नियमों का पालन

दिल्ली में खुलने वाली ये सभी प्राइवेट यूनिवर्सिटी केवल ‘यूनिटरी मॉडल’ पर काम करेंगी. इसका मतलब है कि वे किसी अन्य कॉलेज को अपने से संबद्ध (Affiliation) नहीं कर सकेंगी. हालांकि वे दिल्ली में अतिरिक्त कैंपस या स्टडी सेंटर खोल सकती हैं. इन सभी संस्थानों को UGC, AICTE, NMC और BCI जैसी सभी केंद्रीय नियामक संस्थाओं के नियमों का सख्ती से पालन करना होगा.

दिल्ली को ‘ज्ञान राजधानी’ बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम

दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद के अनुसार, लंबे समय से दिल्ली केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का केंद्र बनी हुई थी. लेकिन गुणवत्तापूर्ण विश्वविद्यालयों के अभाव में स्थानीय युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए पड़ोसी राज्यों का रुख करना पड़ता था. नया निजी विश्वविद्यालय विधेयक इस ऐतिहासिक विसंगति को दूर करते हुए शहर में ही विश्वस्तरीय शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना का रास्ता खोलेगा. इसका मुख्य उद्देश्य दिल्ली के युवाओं को उनके अपने शहर में ही शिक्षा के शानदार अवसर प्रदान करना और दिल्ली को पूरे भारत की ‘ज्ञान राजधानी’ के रूप में स्थापित करना है.

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