दिल्ली: वैसे तो लोग दिल्ली को कंक्रीट के जंगल के तौर पर देखते हैं, लेकिन इसी शहर की एक छत ऐसी भी है, जहां हरियाली, पक्षियों और तितलियों की चहचहाहट सुनाई देती है. 23 साल के अमन शर्मा ने अपनी छत को ही एक ऐसे मिनी जंगल में बदल दिया है, जहां 500 से ज्यादा पौधे हैं. इसकी सबसे खास बात यह है कि इस छत पर रोजाना करीब 100 पक्षियों और 25 से ज्यादा तितलियों की आवाजाही होती है. अमन का कहना है कि उन्होंने यह काम सिर्फ बागवानी के लिए नहीं, बल्कि पक्षियों और दूसरे जीवों को शहर में एक सुरक्षित जगह देने के लिए शुरू किया था.
लॉकडाउन में आया मिनी जंगल बनाने का आइडिया
अमन को बचपन से ही पक्षियों को देखने और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी का शौक रहा है. करीब 14 साल से वह बर्ड वॉचिंग कर रहे हैं. लॉकडाउन के दौरान जब घूमना और जंगलों में जाकर पक्षियों को देखना बंद हो गया था तो उनके मन में एक अलग विचार आया. उन्होंने सोचा कि अगर वह पक्षियों के पास नहीं जा सकते तो क्यों न पक्षियों को अपने घर तक बुलाया जाए. शुरुआत सिर्फ 3 पौधों से हुई. इसके बाद पौधों की संख्या बढ़ती गई और कुछ ही महीनों में उनकी छत पर 500 से ज्यादा पौधे हो गए. धीरे-धीरे यह छत एक छोटे से इकोसिस्टम में बदल गई, जहां पक्षियों और तितलियों को भी अपना ठिकाना मिलने लगा.
500 पौधों में है कई तरह की प्रजातियां
अमन की छत पर बोगनवेलिया, पीले और नारंगी टेकोमा, पाथरचट्टा, आक, पर्पल ग्रास, पोर्टुलाका, बांस, पाम, सदाबहार, हमेलिया, रातरानी, हरसिंगार, मोगरा और गुलाब जैसे कई पौधे लगाए गए हैं. इसके अलावा यहां चीकू, अनार, अमरूद, नींबू, संतरा और मौसमी जैसे फलदार पौधे भी हैं. इन पौधों से पक्षियों को खाने के साथ-साथ छत पर रुकने और घोंसला बनाने की जगह भी मिलती है.
अब चार लोगों का परिवार 200 से ज्यादा मेहमानों का
अमन बताते हैं कि पहले उनके घर में परिवार के चार लोग थे, लेकिन अब उनकी छत की वजह से यह परिवार काफी बड़ा हो गया है. कभी बार्बेट तो कभी बुलबुल यहां दिखाई देती है. कई पक्षी इसी छत पर अपना घोंसला भी बनाते हैं. जब उनके बच्चे बड़े होकर उड़ जाते हैं तो अमन को लगता है कि उनके घर ने कुछ जीवों को इस दुनिया में आगे बढ़ने का मौका दिया है.
पौधों ने सिखाया बागवानी का तरीका
अमन के लिए यह सफर हमेशा आसान नहीं रहा है. कई पौधे ज्यादा पानी, कम धूप या कीड़ों की वजह से खराब भी हुए हैं, लेकिन हर बार उन्होंने कुछ नया सीखा. उनका कहना है कि शुरुआत करने के बाद पौधे खुद बताते हैं कि उन्हें क्या चाहिए. इसी सीख के दौरान उन्हें यह भी पता चला कि कुछ पत्तियों में बने छोटे-छोटे छेद नुकसान नहीं, बल्कि लीफ कटर बी का काम हो सकते हैं.
मिला कई सम्मान
अमन को पर्यावरण के क्षेत्र में उनके काम के लिए सम्मान भी मिल चुका है. 2023 में उन्हें पर्यावरण से जुड़े काम के लिए सम्मान मिला और पिछले साल उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया का नेचर क्रिएटर ऑफ द ईयर अवॉर्ड भी जीता है.
