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Champa Mein Jyada Phool Kaise Laye : बारिश के सीजन में गार्डनिंग के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. छ्त-बालकनी पर मनचाहे पौधे लगाए जा सकते हैं. घर में कुछ पौधे सुख-समृद्धि, शांति, वास्तु-पॉजिटिविटी के लिए लगाए जाते हैं तो कुछ सिर्फ खुशबू के लिए. खुशबू वाले पौधे से निकली सुगंध का एक झोका मन को रोमांचित कर देता है. ऐसा ही एक पौधा है जिससे पूरा घर महक जाता है. नाम है चंपा. अगर आपके घर में चंपा का पौधा लगा हुआ है और उसमें फूल नहीं आ रहे हैं तो हम 4 आसान ट्रिक बताने जा रहे हैं. इन उपायों को आजमाइये. 15 दिन में चंपा के पौधे में भर-भरकर फूल आएंगे.
Champa Flower Growing Tips : चंपा के पौधे में मुख्य रूप से अप्रैल से अक्टूबर के बीच फूल आते हैं. तेज धूप और गर्म मौसम में चंपा का पौधा सबसे अच्छी फ्लावरिंग करता है. यह प्लूमेरिया फैमिली का पौधा है. दिसंबर से जनवरी तक यह पौधा डोरमेंसी में चला जाता है. इस समय इसकी पत्तियां गिर जाती हैं और पौधे में फूल आना बंद हो जाते हैं. ठंड खत्म होने के बाद पौधे में नई कोपलें और पत्तियां आना शुरू हो जाती हैं. बरसात के मौसम में इसकी फ्लावरिंग सबसे बेहतरीन होती है. कई बार पौधा हेल्दी दिखता है लेकिन फूल नहीं आते. कई बार पौधे को ग्रोथ ही रुक जाती है. चंपा के पौधे से भर-भरकर फूल लेने के लिए ये चार ट्रिक्स जरूर अपनाएं. 15 दिन में फर्क नजर आएगा.
कई बार चंपा के पौधे में ग्रोथ तो नजर आती है लेकिन फूल नहीं आते. चंपा का पौधा बारिश में खूल फूल देता है. अगर आपके पौधे के साथ भी ऐसा हो रहा है तो परेशान मत होइये. सबसे पहले पौधे के अच्छे से गुड़ाई-निराई कर दें. फिर उसमें दो चम्मच सरसों की खली-पोटाश का पाउडर डाल दें. इसे प्लांट की मिट्टी में अच्छे से मिक्स कर दें. अब पौधे को थोड़ा सा पानी दें. फर्टिलाइजर देने के बाद हमेशा पौधे को पानी दें. 10-15 दिन का इंतजार करें. अगर पौधे में फ्लावरिंग शुरू ना हो तो एप्सम सॉल्ट पानी में घोलकर डाल दें. कुछ ही दिनों में चंपा के पौधे में फूल आ जाएंगे. याद रखें कोई भी फर्टिलाइजर देने के बाद कम से कम 10 दिन का इंतजार जरूर करें.
चंपा के अगर फूल नहीं आ रहे हैं तो यह देखें कि पौधा कहीं छाया में तो नहीं रखा है. ऐसे में पौधे की जगह बदल दें. कम से कम 4-5 घंटे पौधे को धूप में रखें. चंपा के पौधे को फास्फोरस रिच फर्टिलाइजर बहुत पसंद होता है. वर्मि कंपोस्ट या गोबर की खाद में नाइट्रोजन खूब होता है ऐसे में पौधे में पत्तियां तो खूब आएंगी लेकिन फूल नहीं आएंगे. पौधे में थोड़ा सा डीएपी खाद दे सकते हैं. डीएपी ना हो तो प्रोम भी डाल सकते हैं. यह भी चेक कर लें कि गमले का ड्रेनेज होल बंद तो नहीं हुआ है.
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चंपा का पौधे को पानी ज्यादा ना दें. जब मिट्टी एक-दो इंच सूख जाए तभी पानी दें. चंपा का पौधा जितनी अच्छी खुशबू देता है, इस पौधे को बीमारियां भी उतनी ही जल्दी पकड़ लेती हैं. पत्तियों को अलट-पलट कर देखते रहें, अगर कोई मिलीबग्स नजर आए, कोई कीट नजर आए तो तुरंत इसका इलाज करना होगा. मिलीबग्स का सबसे ज्यादा अटैक इस पौधे में होता है. अगर आपको लगता है कि एक-दो पत्तियों में कीटों का अटैक है तो उन पत्तियों को हटा दें. अगर पूरे पौधे में कीडों का अटैक है तो कीटनाशक का छिड़काव करें. आप नीम ऑयल का छिड़काव कर सकते हैं. शैंपू-डिटर्जेंट का सॉल्यूशन बनाकर उसका छिड़काव कर सकते हैं.
चंपा के पौधे में अगर ज्यादा फूल चाहिए तो आप एक और टिक आजमा सकते हैं. कैल्शियम नाइट्रेट की गोलियां गमले में डालते हैं. एनपीके का भी आप इस्तेमाल कर सकते हैं. जैविक खाद चक्रीय क्रम में दें. कभी केले के छिलकों का पानी तो कभी आलू-प्याज के छिलकों का पानी दें. इसके अलावा, पौधे की जड़ों में फ्रेश चाय भी एक-दो चम्मच डाल सकते हैं. पौधे में महीने में एक बार एक-दो चम्मच नीम की खली जरूर डालें. इससे पौधे की जड़ों में कीड़े नहीं लगेंगे. सभी खाद एकसाथ ना दें. अगर आप पौधे के अच्छे से केयर करेंगे और ये सभी उपाय करेंगे तो पौधे में भर-भरकर फूल आएंगे.
