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Delhi Success Story: हरियाणा के रहने वाले नीरज गर्ग एक समय अमेरिका की एक बड़ी कंपनी में जॉब करते थे. जहां उन्होंने खुद का स्टार्टअप करने के लिए पुराने जूते-चप्पलों को रीसायकल कर Rymbal नामक एक कंपनी बनाई, जो 500 करोड़ की हो गई है. आइये जानते हैं उनकी सफलता के बारे में.
नई दिल्ली: जरा सोचिए आज से 100 साल पहले जो जूते चप्पल बने थे. क्या वो डीकंपोज हो गए हैं. तो जवाब होगा नहीं, क्योंकि पुराने जूते चप्पल आज भी कहीं ना कहीं पड़े होंगे. क्योंकि ये डीकंपोज नहीं होते हैं. इससे पर्यावरण को भारी नुकसान होता है. यही एक बात दिल्ली के रहने वाले नीरज गर्ग को इतना ज्यादा सोचने पर मजबूर कर गई कि उन्होंने अच्छी खासी अमेरिकन कंपनी में नौकरी छोड़कर 2019 में खुद का स्टार्टअप करने के बारे में सोचा.
इसके तहत उन्होंने फैसला लिया कि जो भी पुराने जूते चप्पल हैं, उसको रीसायकल करेंगे. इसी से नया मैटीरियल और जूते चप्पल बनाकर बेचेंगे. ताकि पर्यावरण को नुकसान ना हो. 2019 से लेकर आज 2026 तक नीरज गर्ग ने लगभग 500 करोड़ की कंपनी खड़ी कर दी है, जिसका नाम रिम्बल (Rymbal) है. जो कि भारत की अग्रणी पॉलीयूरेथेन (PU) सिस्टम विनिर्माता कंपनी है, जिसकी स्थापना 2019 में हुई थी.
परिवार के पहले शख्स, जिसने किया खुद का बिजनेस
नीरज गर्ग ने बताया कि वह हरियाणा के पलवल के रहने वाले हैं. पिता किसानों को ट्रक समेत तमाम तरह की सर्विस देते हैं. परिवार में सभी खुद का कुछ ना कुछ कर रहे हैं लेकिन बिजनेस करके इतने बड़े मुकाम को हासिल करने वाले परिवार के वह पहले शख्स हैं. उन्होंने यह भी बताया कि 2019 में जब उन्होंने अपनी कंपनी शुरू की थी. उसके 6 महीने बाद ही लॉकडाउन लग गया था. इसमें उन्होंने महसूस किया कि पर्यावरण इतना साफ हो गया है तो क्यों ना इसे बरकरार रखा जाए. जो कार्बन उत्सर्जित हो रही है पुराने जूते चप्पलों से उसे नियंत्रित किया जाए.
उन्होंने आईआईटी और कई सरकारी संस्थाओं के साथ मिलकर एक टेक्नोलॉजी डेवलप की. अपनी पूरी एक टेस्टिंग लैब और स्टैंडर्ड लैब बनाई. जहां पर पुराने जूते चप्पलों को आसानी से रीसायकल किया जाता है. आज 5 बड़े ब्रांड को वह अपने यहां रीसायकल के तहत बनाए गए जूते चप्पल बेच रहे हैं और लगभग 35000 किलोग्राम मटेरियल की भी सप्लाई कर चुके हैं.
जानें कंपनी की खासियत
कंपनी के संस्थापक नीरज गर्ग ने बताया कि पूरी दुनिया में 23 बिलियन जूते चप्पल हर साल बनाए जाते हैं, जिसमें 90% रीसायकल नहीं होते हैं. यह कभी डीकंपोज नहीं होते हैं. इन्हें 400 साल तक डीकंपोज होने में वक्त लगता है, इसलिए 100 साल और 200 साल पुराने चप्पल भी आज भी कहीं ना कहीं पर्यावरण में मौजूद होंगे. जो कार्बन उत्सर्जित करते हैं. जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान होता है. इसीलिए उन्होंने यह फैसला लिया था कि वह ऐसी कंपनी खड़ी करेंगे जो इस दिक्कत को दूर करने पर फोकस करेगी.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत, दैनिक भास्कर के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से Hindi.News18.com<…
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