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शबाना आजमी 75 साल की उम्र में भी फिल्मों में पूरी तरह सक्रिय हैं. एक्ट्रेस इन दिनों एक साथ दो फिल्मों में दिख रही हैं. शबाना आजमी की ‘बंटवारा 1947’ और ‘आवारापन 2’ एक साथ रिलीज हुई हैं. इन फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर क्लैश हुआ है, लेकिन शबाना आजमी की इन दो फिल्मों को देखने से पहले वो 7 यथार्थवादी फिल्में देख लीजिए जिन्होंने हिंदी सिनेमा को नई दिशा दी.
नई दिल्ली. शबाना आजमी की वो 7 दमदार फिल्में जिनमें एक्ट्रेस ने शानदार प्रदर्शन कर दर्शकों के साथ ही क्रिटिक्स के बीच अपनी खास पहचान बना ली थी. साल 1974 में रिलीज हुई ‘अंकुर’ शबाना आजमी के करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक है. श्याम बेनेगल के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उन्होंने लक्ष्मी का किरदार निभाया था.
श्याम बेनेगल के निर्देशन में बनी फिल्म ‘अंकुर’ को 7.8 रेटिंग मिली है. एक्ट्रेस के साथ साधु मेहर, अनंत नाग, प्रिया तेंदुलकर ने अहम रोल अदा किया था. इस फिल्म के लिए शबाना आजमी को नेशनल अवॉर्ड मिला था. शबाना आजमी ने 5 बार नेशनल अवॉर्ड जीतकर इतिहास रचा दिया था.
शबाना आजमी की फिल्म ‘अर्थ’ का निर्देशन महेश भट्ट ने किया था. ‘अर्थ’ एक ऐसी महिला की कहानी है, जो अपने वैवाहिक जीवन के टूटने के बाद खुद को दोबारा पहचानने की कोशिश करती है. महेश भट्ट के निर्देशन में बनी फिल्म ‘अर्थ’ में शबाना आजमी के साथ कुलभूषण खरबंदा, स्मिता पाटिल, राज किरण ने लीड रोल अदा किया था. ‘अर्थ’ के लिए एक्ट्रेस को दूसरी बार नेशनल अवॉर्ड मिला था.
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श्याम बेनेगल की 1983 में आई ‘मंडी’ सामाजिक व्यंग्य और ड्रामा का शानदार उदाहरण है. फिल्म में शबाना आजमी ने रुक्मिणी बाई का किरदार निभाया, जो एक वेश्यालय चलाती है. जब स्थानीय राजनेताओं और प्रभावशाली लोगों की नजर उस जगह पर पड़ती है, तो रुक्मिणी बाई और वहां रहने वाली महिलाओं के सामने अपने अस्तित्व को बचाने का संकट खड़ा हो जाता है. ‘मंडी’ में शबाना आजमी, स्मिता पाटिल, नसीरुद्दीन शाह, अमरीश पुरी, कुलभूषण खरबंदा, ओम पुरी अहम किरदारों में दिखे थे. फिल्म का निर्देशन शानदार निर्देशक श्याम बेनेगल ने किया था.
1996 में आई ‘फायर’ शबाना आजमी के करियर की सबसे चर्चित और साहसिक फिल्मों में शामिल है. दीपा मेहता के निर्देशन में बनी इस फिल्म में शबाना ने राधा का किरदार निभाया, जबकि नंदिता दास ने सीता की भूमिका निभाई. शबाना आजमी, नंदिता दास, जावेद जाफरी, कुलभूषण खरबंदा स्टारर फिल्म में शबाना के शानदार अभिनय और दीपा मेहता के निर्देशन की झलक दिखाई थी. ‘फायर’ की रेटिंग 7.1 है.
मृणाल सेन की ‘खंडहर’ शबाना आजमी के करियर की सबसे संवेदनशील फिल्मों में गिनी जाती है. कहानी एक ऐसे गांव की है, जहां शहर से आया फोटोग्राफर सुभाष पुराने मंदिरों और खंडहरों की तस्वीरें लेने पहुंचता है. यहां उसकी मुलाकात जामिनी से होती है, जो अपनी बीमार मां के साथ बेहद अकेली जिंदगी जी रही है. मृणाल सेन के निर्देशन में बनी फिल्म की रेटिंग 7.2 है. इसके लिए भी शबाना आजमी को नेशनल अवॉर्ड मिला था.
‘गॉडमदर’ शबाना आजमी की उन फिल्मों में शामिल है, जिसमें उन्होंने एक बेहद दमदार और चुनौतीपूर्ण किरदार निभाया. 1999 में रिलीज हुई इस फिल्म का निर्देशन विनय शुक्ला ने किया था. शबाना ने इसमें रंभि नाम की महिला की भूमिका निभाई, जिसकी जिंदगी परिस्थितियों के चलते अपराध और राजनीति की दुनिया से जुड़ती चली जाती है. ‘गॉडमदर’ के लिए शबाना को नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था.
‘पार’ ग्रामीण गरीबी, शोषण और इंसान के संघर्ष की बेहद प्रभावशाली कहानी है. गौतम घोष के निर्देशन में बनी यह फिल्म बिहार के ग्रामीण इलाके की पृष्ठभूमि में एक गरीब दंपति नौरंगिया और रमा की जिंदगी को सामने लाती है. नसीरुद्दीन शाह ने नौरंगिया और शबाना आजमी ने रमा की भूमिका निभाई है. इस फिल्म की रेटिंग 7.7 है. शबाना आजमी ने इस फिल्म में भी अतुल्नीय अभिनय किया था और उन्होंने नेशनल अवॉर्ड अपने नाम किया था.
