फर्जी 12वीं की मार्कशीट से यूनिवर्सिटी में दाखिला? लारेंस बिश्नोई के वकील दीपक नंदा पर FIR

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पुलिस ने लारेंस बिश्नोई के वकील दीपक नंदा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. आरोप है कि 2019 में यूनिवर्सिटी में दाखिले के दौरान उसने 12वीं की फर्जी मार्कशीट और प्रमाण-पत्र जमा किए थे. दिल्ली क्राइम ब्रांच की जांच के दौरान यूनिवर्सिटी से रिकॉर्ड मांगे गए थे. बाद में इन दस्तावेजों को जम्मू-कश्मीर बोर्ड से सत्यापन कराया गया था.

अमरोहा की श्री वेंकटेश्वरा यूनिवर्सिटी से जुड़े फर्जी डिग्री के मामले में पुलिस ने दीपक नंदा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. (एआई इमेज)

पुलिस ने लारेंस बिश्नोई के वकील दीपक नंदा के खिलाफ फर्जी 12वीं की मार्कशीट और प्रमाण-पत्र के जरिए दाखिला लेने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है. यह दाखिला अमरोहा की श्री वेंकटेश्वरा यूनिवर्सिटी यूनिवर्सिटी में लिया गया था. दीपक नंदा के खिलाफ यह एफआईआर 28 सितंबर 2026 को अमरोहा के राजपुर थाने में दर्ज की गई है. पुलिस ने इस मामले में यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक अधिकारी अरुण कुमार की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 336(3) और 340(2) के तहत केस दर्ज किया है.

2019 में लिया था यूनिवर्सिटी में एडमिशन
एफआईआर के अनुसार, दीपक नंदा ने साल 2019 में श्री वेंकटेश्वरा यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया था. उसने साल 2024 में अपना कोर्स पूरा किया. एडमिशन के दौरान उसने अपनी पिछली शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेज यूनिवर्सिटी में जमा किए थे. इन दस्तावेजों में इंटरमीडिएट यानी 12वीं कक्षा की मार्कशीट और प्रमाण-पत्र भी शामिल थे. अब पुलिस की एफआईआर में इन्हीं दस्तावेजों की सत्यता पर सवाल उठाया गया है.

दिल्ली क्राइम ब्रांच की जांच से सामने आया मामला
एफआईआर में बताया गया है कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच पहले से एक अलग मामले की जांच कर रही है. इसी जांच के दौरान क्राइम ब्रांच ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 94 के तहत श्री वेंकटेश्वरा यूनिवर्सिटी को नोटिस भेजा था. नोटिस के जरिए क्राइम ब्रांच ने दीपक नंदा से जुड़े एडमिशन और शैक्षणिक रिकॉर्ड मांगे थे. इसके बाद यूनिवर्सिटी ने 9 सितंबर 2026 को उपलब्ध रिकॉर्ड दिल्ली क्राइम ब्रांच को सौंप दिए थे. इन रिकॉर्ड में दीपक नंदा की 12वीं कक्षा की मार्कशीट और प्रमाण-पत्र की कॉपी भी शामिल थी.

जम्मू-कश्मीर बोर्ड से कराया गया सत्यापन
इसके बाद दिल्ली क्राइम ब्रांच ने दीपक नंदा की 12वीं की मार्कशीट और प्रमाण-पत्र की सत्यता जांचने के लिए इन्हें जम्‍मू और कश्‍मीर बोर्ड ऑफ एजुकेशन भेजा. पुलिस के अनुसार, जम्मू-कश्मीर बोर्ड ने 19 सितंबर 2026 को सत्यापन के संबंध में जवाब भेजा. एफआईआर में दर्ज जानकारी के अनुसार, बोर्ड के जवाब में बताया गया कि यूनिवर्सिटी में जमा कराए गए दीपक नंदा के 12वीं कक्षा के अंकपत्र और प्रमाण-पत्र वास्तविक शैक्षणिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते. पुलिस ने इसी सत्यापन रिपोर्ट को आधार बनाकर फर्जी दस्तावेज के इस्तेमाल का आरोप लगाया है.

इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर लिया लॉ में दाखिला
शिकायत के अनुसार, दीपक नंदा ने इन्हीं शैक्षणिक दस्तावेजों को अपनी पिछली योग्यता के तौर पर यूनिवर्सिटी में जमा कराया था और इनके आधार पर लॉ कोर्स में दाखिला लिया था. अब अमरोहा पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि दस्तावेज कहां से तैयार हुए, उनका इस्तेमाल किस तरह किया गया और एडमिशन की प्रक्रिया में उनकी भूमिका क्या रही.

दिल्ली में अलग मामले में भी जांच
दीपक नंदा का नाम दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एक अलग जांच में भी सामने आया है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने उसे हाल ही में यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया था. इसी जांच के दौरान यूनिवर्सिटी से उनके शैक्षणिक और एडमिशन रिकॉर्ड मांगे गए थे. फिलहाल अमरोहा में दर्ज एफआईआर में लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच कर रही है.

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