गाजियाबाद: पुरानी चीजें अब कूड़े में नहीं जाएंगी, जरूरतमंदों के काम आएंगी. घर की अलमारी में सालों से रखी पुरानी किताबें, बच्चों के खिलौने, कपड़े, बर्तन या कोने में पड़ा बेकार फर्नीचर अब किसी के लिए उपयोगी साबित हो सकता है. ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे देशों की तर्ज पर उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद नगर निगम ने भी ऐसी चीजों को दोबारा इस्तेमाल में लाने की पहल शुरू की है. नगर निगम जल्द ही RRR ऑन व्हील्स कार्यक्रम के तहत छह वाहन चलाएगा, जो घर-घर पहुंचकर उपयोगी पुराने सामान को इकट्ठा करेंगे.
इसके बाद सामान को वैशाली स्थित आरआरआर सेंटर ले जाकर छांटा जाएगा और जरूरत के अनुसार उसकी मरम्मत कर उसे जरूरतमंदों तक पहुंचाया जाएगा. गाजियाबाद नगर निगम जल्द ही अपने 311 ऐप पर यह सुविधा शुरू करने जा रहा है, जिसके जरिए लोग घर में पड़े उपयोगी पुराने सामान को देने के लिए अनुरोध कर सकेंगे. इसके अलावा लोग नगर निगम के नंबरों पर कॉल कर भी सामान उठाने की सुविधा ले सकेंगे.
क्या है RRR का मतलब?
नगर निगम की योजना के तहत शहर में पांच स्थायी और 45 अस्थायी RRR सेंटर बनाए गए हैं. RRR का मतलब रिड्यूस, रीयूज और रीसाइकिल है. नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बताया कि कोशिश है कि ऐसी कोई भी चीज जिसकी उपयोगिता या कीमत बची हुई है, वह कूड़े के ढेर या लैंडफिल तक न पहुंचे. इसी सोच के साथ छह गाड़ियों को RRR ऑन व्हील्स के रूप में घर-घर भेजा जाएगा. लोग अपने घर में रखे ऐसे सामान जो उनके इस्तेमाल में नहीं हैं, लेकिन किसी दूसरे के काम आ सकते हैं, इन वाहनों को दे सकेंगे.
इसके अलावा लोग सीधे RRR सेंटर पर भी सामान जमा करा सकेंगे. सामान मिलने के बाद RRR सेंटर पर उसकी छंटाई की जाएगी. जो चीजें दोबारा इस्तेमाल के लायक होंगी, उन्हें जरूरत के मुताबिक ठीक किया जाएगा. इनमें कपड़े, किताबें, बर्तन, सॉफ्ट टॉयज और फर्नीचर समेत कई तरह का सामान शामिल होगा.
बच्चों को पढ़ाने की पहल भी शुरू
नगर निगम का उद्देश्य केवल सामान बांटना ही नहीं, बल्कि बच्चों को इससे जोड़कर उन्हें उपयोगी चीजों की मरम्मत और सुधार का कौशल सिखाना भी है. वैशाली स्थित RRR सेंटर के आसपास करीब 60 आउट ऑफ स्कूल बच्चों को पढ़ाने की पहल भी नगर निगम ने शुरू की है. ऐसे में इस मुहिम को पर्यावरण संरक्षण के साथ सामाजिक जिम्मेदारी से भी जोड़ा जा रहा है. गाजियाबाद नगर निगम शहर से हटाए जाने वाले अवैध फ्लेक्स और होर्डिंग सामग्री को भी बेकार नहीं जाने दे रहा है.
RRR सेंटर में इन फ्लेक्स से बैग तैयार किए जा रहे हैं. यानी जिस सामान को लोग कचरा समझकर फेंक देते हैं, उसे नए रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. नगर निगम का मानना है कि इस पहल से शहर में कचरे का दबाव कम होगा सामान का दोबारा उपयोग बढ़ेगा और जरूरतमंद परिवारों को उपयोगी वस्तुएं मिल सकेंगी. RRR ऑन व्हील्स के जरिए अब घर का बेकार सामान किसी दूसरे के चेहरे पर मुस्कान लाने का जरिया बन सकेगा.
