रेलवे रिफंड नियमों पर बड़ा अपडेट: क्या यात्रियों की जेब पर पड़ेगा बोझ? जानें सच

गाजियाबाद: ट्रेन से सफर करने वालों के लिए एक अहम खबर सामने आई है. भारतीय रेलवे ने कन्फर्म टिकट के कैंसिलेशन नियमों में बदलाव कर दिया है, जिससे अब यात्रियों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा. नए नियम के मुताबिक, अगर यात्री 72 घंटे पहले टिकट कैंसिल करता है, तो उसे अधिकतम रिफंड मिलेगा और केवल न्यूनतम चार्ज ही कटेगा. लेकिन 72 से 24 घंटे के बीच टिकट रद्द करने पर किराए का करीब 25 प्रतिशत तक काट लिया जाएगा. वहीं अगर कोई यात्री 24 से 8 घंटे के अंदर टिकट कैंसिल करता है, तो यह कटौती बढ़कर 50 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी. इतना ही नहीं, अगर ट्रेन छूटने से 8 घंटे से कम समय बचा हो या ट्रेन निकल जाए, तो किसी भी तरह का रिफंड नहीं मिलेगा. हालांकि टीडीआर की प्रक्रिया अलग होती है. इन नए नियमों को लेकर गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर लोकल 18 ने यात्रियों से बातचीत की है. आइए जानते हैं कि आम यात्रियों का इस फैसले पर क्या कहना है.

इमरजेंसी में ही लोग कैंसिल करते हैं टिकट
यात्री प्रीति ने कहा कि रेलवे का यह नया नियम बिल्कुल गलत है. उन्होंने बताया कि कई बार मजबूरी में टिकट कैंसिल करनी पड़ती है. ऐसे में 50 प्रतिशत तक पैसे काटना आम आदमी के लिए बहुत भारी पड़ता है. उन्होंने कहा कि वह गाजियाबाद से आजमगढ़ तक सफर करती हैं और कई बार फैमिली इमरजेंसी या परीक्षा की वजह से यात्रा रद्द करनी पड़ती है.

उन्होंने बताया कि मई में उन्हें घर जाना है, लेकिन अभी तक उनकी डेट शीट नहीं आई है. अगर अचानक परीक्षा की तारीख आ जाती है, तो उन्हें टिकट कैंसिल करनी पड़ेगी और ऐसे में आधे पैसे कट जाएंगे. पहले उन्होंने टिकट कैंसिल कराई थी, तो 450 रुपये में सिर्फ 70 रुपये कटे थे. लेकिन अब नियम काफी सख्त हो गए हैं. उन्होंने मांग की है कि मेडिकल इमरजेंसी जैसे मामलों में रेलवे को राहत देनी चाहिए.

यात्रियों की जेब पर असर
यात्री सुरजीत सिंह ने इस नियम को आम जनता के लिए नुकसानदायक बताया. उनका कहना है कि इससे सीधे तौर पर यात्रियों की जेब पर असर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि पहले टिकट कैंसिलेशन पर कम कटौती होती थी, लेकिन अब यह बोझ बढ़ गया है. उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे की सुविधाएं अभी भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं हैं. लेकिन इसके बावजूद यात्रियों से इतनी ज्यादा कटौती करना सही नहीं है. उनके मुताबिक, अगर ऐसे नियम जारी रहे, तो लोग ट्रेन से सफर करने से पहले सोचने पर मजबूर हो जाएंगे.

आम जनता के लिए परेशानी
यात्री विजय शर्मा ने कहा कि कोई भी यात्री बिना वजह टिकट कैंसिल नहीं करता है. यह हमेशा मजबूरी में लिया गया फैसला होता है. ऐसे में 25 से 50 प्रतिशत तक की कटौती करना आम लोगों के लिए परेशानी बढ़ाने वाला है. उन्होंने कहा कि आज के समय में महंगाई पहले ही लोगों को परेशान कर रही है और इस नए नियम ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है. उन्होंने यह भी कहा कि पहले कैंसिलेशन पर पूरा या ज्यादा रिफंड मिल जाता था, लेकिन अब भारी कटौती से लोगों का भरोसा भी कम होगा.

मेडिकल और इमरजेंसी में मिले सुविधा
आमिर ने भी रेलवे के इस फैसले पर नाराजगी जताई. उनका कहना है कि इसका सबसे ज्यादा असर मिडिल क्लास पर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि कोई भी यात्री शौक से टिकट कैंसिल नहीं करता, बल्कि मजबूरी में ऐसा करना पड़ता है. उन्होंने सुझाव दिया कि रेलवे को मेडिकल और इमरजेंसी मामलों में यात्रियों को राहत देनी चाहिए. साथ ही उन्होंने अपील की है कि ऐसे नियम लागू करने से पहले आम जनता की स्थिति को ध्यान में रखा जाए.

रेलवे ने क्या कहा?

रेलवे रिफंड नियमों में बदलाव को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही खबरें पूरी तरह गलत हैं. यात्रियों पर किसी भी तरह का अतिरिक्त बोझ नहीं डाला गया है. रेलवे ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए चार्ट तैयार करने का समय 4 घंटे से बढ़ाकर 9-18 घंटे कर दिया है. इससे दूर-दराज से आने वाले यात्रियों को टिकट कंफर्म होने की जानकारी समय रहते मिल जाएगी. बेहतर अनुभव के लिए रिफंड नियमों में भी सुधार हुआ है, जिसके लिए कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं देना होगा. नए नियमों से अवैध टिकट एजेंटों पर लगाम लगेगी. यात्री अब ट्रेन छूटने के आधे घंटे पहले तक अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे. साथ ही, सीट उपलब्ध होने पर यात्रा की श्रेणी को अपग्रेड करने की सुविधा भी मिलेगी.

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