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गीतकार शैलेंद्र अपने समय में हिंदी सिनेमा के एक ऐसे लोकप्रिय गीतकार और जनकवि में गिने जाते हैं, जिन्होंने आम बोलचाल की भाषा में मानवीय संवेदनाओं को ऐसे पिरोया कि वे सदाबहार बन गए. शैलेंद्र ने अपने करियर में लगभग सैकड़ों फिल्मों के लिए सैकड़ों अमर गीतों की रचना की. आइए, गीतकार की जयंती में उनकी जिंदगी को थोड़ा और करीब से जानें.
गीतकार शैलेंद्र ने सैंकड़ों शानदार गाने लिखे थे. (फोटो साभार: IANS)
नई दिल्ली: जीवन में आई मुश्किलें लोगों के लिए नए अवसर लेकर आती हैं. कुछ ऐसी ही कहानी है देश के लोकप्रिय हिंदी-उर्दू कवि, गीतकार शैलेंद्र की. गीतकार शैलेंद्र का जन्म 30 अगस्त 1923 को रावलपिंडी में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है. उनका परिवार मूल रूप से बिहार के आरा का रहने वाला था. हालांकि, आर्थिक तंगी के कारण उनका परिवार बाद में रावलपिंडी से मथुरा शिफ्ट हो गया, जहां से उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की.
शैलेंद्र के जीवन में दुखों का पहाड़ तब टूटा, जब उन्होंने छोटी उम्र में ही अपनी बहन और मां को खो दिया. शैलेंद्र को बचपन से ही कविताएं लिखने में रुचि थी. वह घंटों बैठकर कविताएं रचते थे. पढ़ाई के बाद शैलेंद्र साल 1947 में बंबई (अब मुंबई) आ गए और माटुंगा वर्कशॉप में भारतीय रेलवे में प्रशिक्षु के रूप में काम करने लगे. हालांकि, इस दौरान भी उन्होंने कविताएं लिखना नहीं छोड़ा.
राज कपूर ने दिया ऑफर
शैलेंद्र नौकरी के साथ-साथ जब भी समय मिलता, कविताएं लिखते और सम्मेलन, कार्यक्रम व मुशायरे में उसकी प्रस्तुति करते. एक दिन कार्यक्रम के दौरान उनकी मुलाकात राज कपूर से हुई. उस समय वह अपनी कविता ‘जलता है पंजाब’ को प्रस्तुत कर रहे थे, जिससे राज कपूर काफी प्रभावित हुए और उन्होंने शैलेंद्र के सामने ‘जलता है पंजाब’ को अपनी फिल्म ‘आग’ (1948) के लिए खरीदने का ऑफर दिया, लेकिन शैलेंद्र ने साफतौर पर मना कर दिया.
आर्थिक संकट के चलते फिल्म के लिए लिखे गाने
पत्नी के गर्भवती होने के बाद शैलेंद्र के सामने आर्थिक संकट एक बहुत बड़ी चुनौती बन गई, जिससे उबरने के लिए उन्होंने राज कपूर से संपर्क किया. उस समय राज कपूर अपनी फिल्म ‘बरसात’ (1949) की शूटिंग कर रहे थे और फिल्म के दो गाने तब तक लिखे नहीं गए थे. शैलेंद्र से बात करने के बाद उन्होंने अपनी फिल्म के दो गाने उन्हें 500 रुपए में लिखने के लिए दिए, जिनमें ‘पतली कमर है’ और ‘बरसात में’ शामिल हैं. ‘बरसात’ का संगीत शंकर-जयकिशन ने तैयार किया था. यहीं से ‘कवि शैलेंद्र’ से ‘गीतकार शैलेंद्र’ का ऐतिहासिक सफर शुरू हुआ.
पूरे देश में छा गया ‘आवारा हूं’ गाना
राज कपूर, शैलेंद्र और शंकर-जयकिशन की जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को कई अन्य हिट गाने दिए. शैलेंद्र द्वारा लिखित 1951 की फिल्म ‘आवारा’ का गीत ‘आवारा हूं’ उस समय देश के बाहर सबसे अधिक सराहा जाने वाला गीत बन गया था. उन्होंने राज कपूर की ज्यादातर फिल्मों के गीतों के बोल लिखे, जिनमें 1955 में रिलीज हुई ‘श्री 420’ भी शामिल है. फिल्म के सभी गाने इतने हिट हुए कि आज भी काफी पसंद किए जाते हैं.
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अभिषेक नागर \’न्यूज18 डिजिटल\’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर \’न्यूज18 डिजिटल\’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और…
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