नोएडा: यूपी स्थित नोएडा के छिजारसी इलाके में बिजली चोरी का ऐसा खेल सामने आया है, जिसने विद्युत निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां डूब क्षेत्र में करीब 13 हजार घरों में बिजली का इस्तेमाल हो रहा था, इनमें बड़ी संख्या में कनेक्शन अवैध बताए जा रहे हैं. हैरानी की बात यह है कि इन घरों तक बिजली पहुंचाने के लिए बाकायदा लाइनें और केबल बिछाई गई थीं. लोगों से बिजली के नाम पर हर महीने पैसे भी लिए जाने का दावा किया गया, लेकिन इस रकम का बड़ा हिस्सा सरकारी राजस्व तक नहीं पहुंच रहा था.
मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाराजगी जताई और विद्युत निगम से जवाब मांगा. इसके बाद अधिकारियों ने छिजारसी, चोटपुर और बहलोलपुर समेत आसपास के इलाकों में कार्रवाई शुरू कर दी. बीते शनिवार को करीब 13 हजार घरों की बिजली काटने के साथ अवैध रूप से बिछाई गई केबलों और लाइनों को हटाया गया.
13 हजार घरों में कैसे पहुंच रही थी बिजली?
हरनंदी नदी के किनारे स्थित छिजारसी का यह इलाका डूब क्षेत्र में आता है. जानकारी के अनुसार यहां करीब 13 हजार घरों में बिजली इस्तेमाल की जा रही थी. वहीं, छिजारसी के फीडर नंबर-4 में वैध कनेक्शनों की संख्या करीब 3800 बताई गई है. यानी इलाके में वैध कनेक्शनों की तुलना में कई गुना ज्यादा घरों तक बिजली पहुंच रही थी. आरोप है कि नए कनेक्शन नहीं मिलने के बाद इलाके में एक अलग तरह की व्यवस्था खड़ी हो गई. इसमें बिजली की लाइनें, केबल और छोटे ट्रांसफॉर्मर लगाकर घरों तक बिजली पहुंचाई जा रही थी.
बिजली के नाम पर हर महीने लाखों की वसूली का दावा
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस व्यवस्था के जरिए लोगों से हर महीने बिजली के नाम पर करीब 500 से 1500 रुपये तक लिए जाते थे. पूरे इलाके से हर महीने करीब 1.5 से 1.8 करोड़ रुपये तक की वसूली होने का दावा भी सामने आया है. हालांकि, इस रकम की पूरी सच्चाई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे, यह जांच के बाद ही साफ होगा. फिलहाल विद्युत निगम ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच और कार्रवाई शुरू कर दी है.
सीएम तक पहुंचा बिजली के इस खेल का मामला
छिजारसी में बिजली की इस व्यवस्था की जानकारी लखनऊ में हुई समीक्षा बैठक के दौरान स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दी. बैठक में बताया गया कि इलाके में बड़ी संख्या में घरों में बिजली इस्तेमाल हो रही है, लेकिन उसके बदले मिलने वाला राजस्व विद्युत निगम को नहीं मिल रहा.
मामले की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई और यूपी पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन आशीष गोयल से स्पष्टीकरण मांगा. साथ ही तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए.
2017 के बाद नए कनेक्शन पर लगी थी रोक
जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2017 तक इस क्षेत्र में करीब छह हजार बिजली कनेक्शन दिए गए थे. इसके बाद डूब क्षेत्र में नए बिजली कनेक्शन देने पर रोक लगा दी गई. इसी के बाद अवैध तरीके से बिजली पहुंचाने की व्यवस्था शुरू होने की बात सामने आई है. डूब क्षेत्र में बिजली कनेक्शन देने का प्रस्ताव शासन को तीन बार भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है, लेकिन इसे कैबिनेट की मंजूरी नहीं मिली.
अब अवैध लाइनें हटाने की कार्रवाई
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL) की टीम ने छिजारसी क्षेत्र में कार्रवाई शुरू की. चोटपुर कॉलोनी और आसपास के इलाकों में अवैध रूप से बिछाई गई बिजली की लाइनें और केबल हटाई गईं. इसके साथ ही अवैध कनेक्शनों की बिजली काटी गई. विद्युत निगम के अधीक्षण अभियंता वाणिज्यिक उमेश सिंह यादव ने बताया कि अवैध तरीके से बिजली इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. बिछाई गई लाइनें हटाई गई हैं, ताकि दोबारा बिजली चोरी न हो सके. मामले में जो भी लोग शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जा रही है.
फिलहाल कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है. वहीं, इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि करीब 13 हजार घरों तक बिजली पहुंचाने वाला यह नेटवर्क इतने लंबे समय तक कैसे चलता रहा और इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंची.
