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Noida News: नोएडा में हिंसक श्रमिक आंदोलन के बाद कानून-व्यवस्था सुधारने के लिए गौतमबुद्धनगर पुलिस ने ‘डीसीपी इंडस्ट्री’ का नया पद सृजित करने का प्रस्ताव तैयार किया है. इसके तहत एक विशेष सेल बनेगा, जो 2 लाख औद्योगिक इकाइयों और 4 लाख श्रमिकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करेगा. यह टीम श्रम कानूनों की निगरानी करेगी और वेतन विवाद जैसे मुद्दों का त्वरित समाधान कर भविष्य में तोड़फोड़ व हिंसा जैसी घटनाओं को रोकने का काम करेगी. जल्द ही इसे शासन की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा.
नोएडा: हाल ही में हुए हिंसक श्रमिक आंदोलन और तोड़फोड़ की घटनाओं से सबक लेते हुए गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने एक बड़ा फैसला लिया है. जिले की हजारों फैक्ट्रियों और लाखों मजदूरों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अब एक समर्पित ‘डीसीपी इंडस्ट्री’ का पद बनाया जाएगा. यह विशेष विंग न केवल कंपनियों और श्रमिकों के बीच संवाद का जरिया बनेगी, बल्कि विवाद की स्थिति में ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ के तौर पर काम करेगी ताकि भविष्य में हिंसक प्रदर्शनों को रोका जा सके.
क्यों पड़ी नए पद की जरूरत?
दरअसल, गौतमबुद्धनगर जिला (नोएडा और ग्रेटर नोएडा) उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक केंद्र है. यहां के तीन पुलिस जोनों में लगभग 15,000 रजिस्टर्ड औद्योगिक इकाइयां हैं. अगर छोटी-बड़ी सभी इकाइयों को मिला लिया जाए, तो इनकी संख्या करीब 2 लाख तक पहुंचती है. इन फैक्ट्रियों में लगभग 4 लाख श्रमिक दिन-रात काम करते हैं. इतने विशाल औद्योगिक ढांचे को संभालने के लिए अब तक कोई विशेष पुलिस विंग नहीं थी.
हालिया आंदोलन के दौरान जब वेतन बढ़ोतरी को लेकर गुस्सा फूट पड़ा, तो पुलिस और प्रशासन को भारी मशक्कत करनी पड़ी थी. इसी संवेदनशीलता को देखते हुए अब एक अलग ढांचा तैयार किया गया है.
कैसा होगा ‘डीसीपी इंडस्ट्री’ का नया सेल?
पुलिस के इस प्रस्ताव के मुताबिक, यह सिर्फ एक पद नहीं बल्कि एक पूरी टीम होगी. डीसीपी स्तर के अधिकारी इस सेल के हेड होंगे. उनके अधीन एक एसीपी (इंडस्ट्री), 3 इंस्पेक्टर और अलग-अलग रैंक के 25 पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे. यह टीम सीधे श्रमिक संगठनों, फैक्ट्री मालिकों और मजदूरों के संपर्क में रहेगी.
विवादों पर होगी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, बेहतर होगा समन्वय
अक्सर देखा गया है कि मजदूरों और प्रबंधन के बीच संवाद की कमी हिंसा का कारण बनती है. नया ‘इंडस्ट्री सेल’ उत्तर प्रदेश और भारत सरकार के श्रम कानूनों के पालन पर भी नजर रखेगा. इस सेल का मुख्य काम किसी भी सुलगते विवाद की जानकारी तुरंत संबंधित ज़ोन की पुलिस को देना और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच पुल का काम करना होगा.
3 दिन के भीतर शासन को भेजा जाएगा प्रस्ताव
आईएएनएस की खबर के मुताबिक, कमिश्नरेट पुलिस इस योजना को लेकर बेहद गंभीर है. अगले तीन दिनों के भीतर इस प्रस्ताव को पुलिस महानिदेशक और गृह विभाग को मंजूरी के लिए भेज दिया जाएगा. इसके साथ ही, अपर पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) एक विस्तृत SOP भी तैयार कर रहे हैं, जिसमें स्पष्ट होगा कि विवाद की स्थिति में पुलिस की क्या भूमिका होगी.
पिछली हिंसा से दहला था औद्योगिक क्षेत्र
बता दें कि हाल ही में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया था. प्रदर्शनकारियों ने न केवल दफ्तरों में तोड़फोड़ की, बल्कि कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया था. स्थिति इतनी बेकाबू हो गई थी कि पुलिस के वाहनों को भी निशाना बनाया गया. उस वक्त भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा था. ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसलिए यह नया ‘इंडस्ट्री सेल’ तत्काल प्रभाव से काम करना शुरू कर देगा.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें
