दिल्ली में अब ऊंची इमारतों में आग लगने की स्थिति में लापरवाही की गुंजाइश और कम होने वाली है. सरकार ने हाईराइज और दूसरी श्रेणी की इमारतों के लिए फायर सेफ्टी नियमों का नया ढांचा तैयार किया है. इसमें कुल 18 जरूरी सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं. यानी फायर इंजन के पहुंचने के लिए रास्ते से लेकर आग और धुएं को फैलने से रोकने वाली व्यवस्था तक, हर चीज पर फोकस किया गया है. छह मीटर का फायर एक्सेस, सुरक्षित एग्जिट, फायर लिफ्ट, स्प्रिंकलर, इमरजेंसी पावर और फायर कंट्रोल रूम जैसी व्यवस्थाएं अब नए फ्रेमवर्क का हिस्सा हैं. दिल्ली सरकार ने ये नियम 28 अगस्त को अधिसूचित किए हैं. अगर इन मानकों को कोई इमारत नहीं पूरा करता है तो उसपर एक्शन होगा. सरकार का कहना है कि मकसद साफ है, आग लगने पर जान बचाने के लिए इमारत पहले से तैयार हो. हाल के दिनों दिल्ली और आसपास के इलाकों में लगातार आगजनी की घटना बढ़ गई थी. इस घटना से दिल्ली-NCR के लोग चिंता में थे. अब नए नियम आने से लोगों की चिताएं काफी कम होगी.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार नए नियम दिल्ली फायर सर्विस (अमेंडमेंट) रूल्स, 2026 के तहत लाए गए हैं. इनमें इमारत की ऊंचाई और उसके इस्तेमाल यानी ऑक्यूपेंसी कैटेगरी के हिसाब से न्यूनतम फायर सेफ्टी स्टैंडर्ड तय किए गए हैं. यह बदलाव ऐसे समय आया है जब दिल्ली में हाल के वर्षों में कई बड़े अग्निकांड हुए हैं. मालवीय नगर के एक होटल में आग से 23 लोगों की मौत हुई थी. इसके अलावा पालम और विवेक विहार में भी बड़े हादसों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे. अब सरकार चाहती है कि हादसे के बाद बचाव करने के बजाय इमारतों में पहले से ऐसी व्यवस्था हो, जिससे आग और धुआं तेजी से न फैल सके और लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने का समय मिले.
ऊंची इमारतों में लोगों को अस्थायी रूप से सुरक्षित रखने के लिए फायर चेक फ्लोर और रिफ्यूज एरिया की व्यवस्था होगी.
(फाइल फोटो)
दिल्ली की ऊंची इमारतों के लिए 18 बड़े फायर सेफ्टी नियम
नए फ्रेमवर्क में आग से बचाव और इमरजेंसी रिस्पॉन्स से जुड़ी 18 प्रमुख व्यवस्थाएं शामिल की गई हैं. आसान भाषा में समझें तो इनमें ये नियम हैं:
- फायर इंजन के लिए 6 मीटर रास्ता: इमारत तक फायर इंजन पहुंचने के लिए कम से कम छह मीटर का रास्ता उपलब्ध और अतिक्रमण से मुक्त रखना होगा.
- एग्जिट की सुरक्षा: बाहर निकलने वाले रास्तों को फायर चेक डोर या प्रेसराइजेशन जैसी व्यवस्था से सुरक्षित करना होगा.
- फायर और स्मोक बैरियर: आग और धुएं को एक हिस्से से दूसरे हिस्से में तेजी से फैलने से रोकने के लिए बैरियर, फायर स्टॉप और स्मोक मैनेजमेंट सिस्टम जरूरी होंगे.
- फायर एक्सटिंग्विशर और होज रील: इमारत में आग बुझाने वाले उपकरण और प्राथमिक फायरफाइटिंग के लिए फर्स्ट-एड होज रील उपलब्ध रखनी होगी.
- ऑटोमैटिक फायर डिटेक्शन और अलार्म: आग का पता लगाने और तुरंत चेतावनी देने के लिए ऑटोमैटिक डिटेक्शन और अलार्म सिस्टम लगाना होगा.
- पब्लिक एड्रेस और वॉयस इवैक्यूएशन: आपात स्थिति में लोगों को स्पष्ट निर्देश देने और सुरक्षित निकासी के लिए पब्लिक एड्रेस या वॉयस इवैक्यूएशन सिस्टम की व्यवस्था होगी.
- स्प्रिंकलर और फायर-सप्रेशन सिस्टम: जहां लागू हो, वहां ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर और फायर-सप्रेशन सिस्टम लगाना जरूरी होगा.
- इंटरनल हाइड्रेंट: इमारत के भीतर वेट राइजर और डाउन-कमर्स समेत इंटरनल हाइड्रेंट सिस्टम की व्यवस्था करनी होगी.
- यार्ड हाइड्रेंट और रिंग मेन: बड़े परिसरों में बाहरी आग बुझाने की व्यवस्था के लिए यार्ड हाइड्रेंट और रिंग मेन की सुविधा रखनी होगी.
- फायर पंप हाउस: फायर पंप हाउस में पर्याप्त पंपिंग व्यवस्था और फायरफाइटर्स के लिए सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करनी होगी.
- फायरफाइटिंग के लिए पानी का भंडारण: आग बुझाने के लिए अलग यानी कैप्टिव वाटर स्टोरेज की व्यवस्था रखनी होगी.
- एग्जिट साइन और फ्लोर मार्किंग: बाहर निकलने के रास्तों पर स्पष्ट संकेत, फ्लोर नंबर और कॉरिडोर में रिफ्लेक्टिव मार्किंग लगानी होगी.
- फायर टावर और फायर लिफ्ट: जरूरत के हिसाब से फायर टावर और फायरफाइटर्स के लिए अलग फायर लिफ्ट की व्यवस्था करनी होगी.
- इमरजेंसी पावर बैकअप: फायर पंप, प्रेसराइजेशन, स्मोक वेंटिलेशन, फायर लिफ्ट, इमरजेंसी लाइटिंग, अलार्म और पब्लिक एड्रेस सिस्टम जैसे जरूरी उपकरणों के लिए बैकअप बिजली जरूरी होगी.
- फायर चेक फ्लोर और रिफ्यूज एरिया: ऊंची इमारतों में लोगों को अस्थायी रूप से सुरक्षित रखने के लिए फायर चेक फ्लोर और रिफ्यूज एरिया की व्यवस्था होगी.
- फायर कंट्रोल रूम: इमारत में ऑटोमैटिक और लगातार निगरानी करने वाली व्यवस्था से लैस फायर कंट्रोल रूम होना चाहिए.
- मैनुअली ऑपरेटेड इलेक्ट्रॉनिक फायर अलार्म: जरूरत पड़ने पर मैनुअली अलार्म सक्रिय करने की व्यवस्था भी रखनी होगी.
- स्पेशलाइज्ड फायर प्रोटेक्शन सिस्टम: इमारत की प्रकृति और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त विशेष फायर प्रोटेक्शन सिस्टम लगाए जा सकेंगे.
नियमों के साथ जवाबदेही भी होगी तय
नए नियम सिर्फ उपकरण लगाने तक सीमित नहीं हैं. इनके तहत फायर सेफ्टी सर्टिफिकेशन, फायर सर्विस से एनओसी और थर्ड-पार्टी ऑडिट से जुड़ी व्यवस्था को भी नए फ्रेमवर्क के साथ जोड़ा गया है. दिल्ली फायर सर्विस के निदेशक को उन इमारतों या ऑक्यूपेंसी के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय तय करने का अधिकार दिया गया है, जिनके लिए बिल्डिंग बायलॉज में स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं. जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय फायर सेफ्टी मानकों के आधार पर भी अतिरिक्त उपाय सुझाए जा सकते हैं.
आग बुझाने के लिए अलग यानी कैप्टिव वाटर स्टोरेज की व्यवस्था रखनी होगी. (फाइल फोटो)
स्ट्रक्चरल और फायर ऑडिट की जिम्मेदारी अलग
नए सिस्टम में एक और अहम बदलाव किया गया है. अधिकारियों के मुताबिक अब स्ट्रक्चरल ऑडिट का काम MCD, NDMC और DDA जैसी एजेंसियों के दायरे में रहेगा, क्योंकि यही एजेंसियां भवन निर्माण के नक्शे को मंजूरी देती हैं. दूसरी तरफ नॉन-स्ट्रक्चरल फायर सेफ्टी ऑडिट की जिम्मेदारी दिल्ली फायर सर्विस की होगी. इससे यह स्पष्ट करने की कोशिश की गई है कि इमारत की संरचना और आग से जुड़ी सुरक्षा की जांच किस एजेंसी की जिम्मेदारी है.
नियम कब से लागू होंगे?
यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है. 28 अगस्त को अधिसूचित किए गए ये नियम उसी दिन से हर मामले में लागू नहीं होंगे. इनका प्रभाव उस तारीख से शुरू होगा, जब दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी DDA संशोधित Unified Building Bye-Laws-2016 को अधिसूचित करेगा. जिन आवेदन की प्रक्रिया उस समय पहले से चल रही होगी, उन्हें आवेदन जमा करने की तारीख पर लागू नियमों के तहत आगे बढ़ाया जाएगा.
हादसों के बाद बदला फोकस
दिल्ली में हुए बड़े अग्निकांडों ने बार-बार यह सवाल उठाया है कि इमारतों में फायर सेफ्टी सिर्फ कागज पर नहीं, जमीन पर भी कितनी मजबूत है. नए 18-पॉइंट फ्रेमवर्क में इसी कमी को दूर करने की कोशिश दिखाई देती है. अब फोकस सिर्फ आग बुझाने पर नहीं है. धुएं को रोकना, लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना, फायर ब्रिगेड की पहुंच आसान बनाना और बिजली-पानी जैसी जरूरी सुविधाओं का बैकअप बनाए रखना भी उतना ही अहम होगा. गृह मंत्री आशीष सूद ने कहा है कि हर नागरिक की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. सरकार के मुताबिक स्टैंडर्डाइज्ड ऑडिटर चेकलिस्ट से नियमों के पालन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी.
