नई दिल्ली. यमुना के सीने पर जब बुल्डोजर के खौफ की गड़गड़ाहट गूंजी तो आशियाने टूटने के डर से 5 लाख सांसें एक साथ थम गईं. दिल्ली हाई कोर्ट की सख्त हिदायत के बाद ऐसा लगा कि यमुना के प्रतिबंधित इको-सेंसिटिव जोन (O-Zone) की 91 अवैध कॉलोनियों में जिंदगी रातों-रात बेघर होकर दर-बदर हो जाएगी. लेकिन, इस खौफनाक सैलाब के बीच दिल्ली सरकार ने एक ऐसा महाप्लान सामने रख दिया है, जिसने उजड़ने की कगार पर खड़े इन मासूम चेहरों को दर-बदर होने से पहले ही राहत की ठंडी छांव मिल जाएगी. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने दिल्ली के छह अलग-अलग इलाकों में ताबड़तोड़ तरीके से 18,084 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के फ्लैट्स की पहचान कर ली है और केंद्र के साथ मिलकर इसे चमकाने का काम शुरू हो गया है.
कूटनीति और प्रशासनिक स्तर पर यह जंग अभी आधी ही जीती गई है क्योंकि बेघर होने की जद में आ रहे इन 5 लाख इंसानों को मुकम्मल छत देने के लिए कम से कम 1 लाख नए EWS घरों की दरकार है. माना जा रहा है कि पुरानी बसावटों पर कोई बुल्डोजर नहीं चलेगा.
दिल्ली सरकार की तैयारियों से जुड़ी 5 मुख्य बातें
• 5 लाख लोगों के पुनर्वास की तैयारी: यमुना के प्रतिबंधित इको-सेंसिटिव जोन (O-Zone) की 91 अवैध कॉलोनियों में रह रहे करीब 5 लाख लोगों को दिल्ली सरकार दूसरी जगहों पर बसाने की योजना बना रही है, जिसके लिए कम से कम 1 लाख घरों की आवश्यकता है.
• 18 हजार से ज्यादा फ्लैट्स चिह्नित: दिल्ली सरकार ने शुरुआती चरण के लिए सुलतानपुरी, सावदा घेवरा, भलस्वा और द्वारका के तीन अलग-अलग स्थानों सहित 6 जगहों पर कुल 18,084 ईडब्ल्यूएस (EWS) फ्लैट्स की पहचान की है, जहाँ सबसे बड़ी साइट भलस्वा में 7,400 यूनिट्स हैं.
• 31 दिसंबर तक ही कानूनी सुरक्षा: दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशानुसार इन कॉलोनियों को ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली कानून (विशेष प्रावधान) द्वितीय अधिनियम, 2011’ के तहत केवल 31 दिसंबर तक ही तोड़फोड़ की दंडात्मक कार्रवाई से अस्थायी संरक्षण प्राप्त है.
• DDA का बड़ा ड्रोन सर्वे: यमुना खादर के कुल 9,700 हेक्टेयर क्षेत्र में से करीब 807 हेक्टेयर पर अवैध कॉलोनियां बसी हैं. नए अतिक्रमण को रोकने और सीमाओं को तय करने के लिए डीडीए (DDA) यमुना के पूरे 22 किलोमीटर के दायरे में 165 वर्ग किलोमीटर का व्यापक ड्रोन सर्वे कर रहा है.
• खाली पड़े फ्लैट्स का होगा कायाकल्प: प्रधानमंत्री-अवैध कॉलोनी दिल्ली आवास योजना के तहत सालों से बुनियादी ढांचे की कमी या जटिल नियमों के कारण खाली पड़े इन फ्लैट्स की मरम्मत की जा रही है, और लोगों को मुख्य रूप से बुरारी, सुलतानपुरी तथा सावदा घेवरा में शिफ्ट किया जाएगा.
सवाल-जवाब
यमुना के ओ-जोन (O-Zone) में चल रहे इस पूरे घटनाक्रम की मुख्य वजह क्या है और हाई कोर्ट का क्या आदेश है?
मुख्य वजह यमुना के पर्यावरण के लिहाज से बेहद संवेदनशील इको-सेंसिटिव क्षेत्र (O-Zone) में हुआ भारी अवैध निर्माण है, जहां निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है. दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 मई को अपने आदेश में यहां के आवासीय निर्माणों को पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया है, हालांकि इन 91 कॉलोनियों को कानूनन 31 दिसंबर तक तोड़फोड़ से अस्थायी सुरक्षा मिली हुई है.
दिल्ली सरकार इन 5 लाख प्रभावित लोगों को बसाने के लिए कौन से कदम उठा रही है?
दिल्ली सरकार केंद्र सरकार के आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ मिलकर दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) के तहत पुनर्वास योजना पर काम कर रही है. सरकार ने भलस्वा, सुलतानपुरी, सावदा घेवरा और द्वारका में 18,084 फ्लैट्स की पहचान की है, जिन्हें प्रधानमंत्री-अवैध कॉलोनी दिल्ली आवास योजना के फंड से अपग्रेड और रिपेयर किया जा रहा है.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यमुना खादर की कॉलोनियों में होने वाली तोड़फोड़ को लेकर क्या स्पष्टीकरण दिया है?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रभावित लोगों को राहत देते हुए घोषणा की है कि पुरानी और मौजूदा बसावटों या निर्माणों पर फिलहाल कोई तोड़फोड़ नहीं की जाएगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट की चिंताएं और कार्रवाई के निर्देश केवल नए सिरे से हो रहे या वर्तमान में चल रहे अवैध निर्माणों को रोकने के लिए हैं.
पर्यावरणविदों का इस पुनर्वास और ओ-जोन के अतिक्रमण पर क्या कहना है?
पर्यावरण कार्यकर्ता भीम सिंह रावत का कहना है कि यमुना के ओ-जोन का वजूद हर हाल में बचा रहना चाहिए, क्योंकि पुलों, सड़कों और अवैध निर्माणों के कारण नदी का पाट संकुचित हो गया है. उनका मानना है कि पर्यावरण सुरक्षा के लिए स्थायी निर्माण हटने चाहिए, लेकिन सरकार को पहले खुद के बनाए अतिक्रमण हटाने चाहिए और विस्थापन की प्रक्रिया पूरी तरह मानवीय दृष्टिकोण तथा विस्तृत योजना के साथ होनी चाहिए.
