Public Opinion: नकली पनीर-मावे ने बढ़ाई गाजियाबाद के दुकानदारों की चिंता, बोले- 100 ग्राम लेने वाला भी पहले पूछता है असली है न?

गाजियाबाद: राखी का त्योहार आने वाला है. जिसे लेकर बाजार में पनीर और मावे की मांग भी बढ़ जाती है. मिठाइयों से लेकर घरों में बनने वाले कई पकवानों में इनका इस्तेमाल होता है. लेकिन इस बीच नकली पनीर और मावे की कई खबरें सामने आने के बाद त्योहार से पहले ग्राहकों की चिंता बढ़ गई है. इसका असर उन पुराने कारोबारियों पर भी पड़ रहा है, जो लंबे समय से गुणवत्ता और भरोसे के दम पर कारोबार कर रहे हैं. गाजियाबाद के पुराने चौपला बाजार में भी व्यापारी इसी परेशानी से जूझ रहे हैं. यहां ग्राहक अब पनीर या मावा खरीदने से पहले उसके असली होने को लेकर सवाल पूछ रहे हैं.

चौपला बाजार पनीर और मावे के कारोबार के लिए काफी पुराना बाजार है. यहां 50 साल से ज्यादा समय से यह कारोबार चल रहा है और 20 से अधिक दुकानें हैं. इन दुकानों से शहर के कई इलाकों में पनीर और मावे की सप्लाई होती है. व्यापारियों का कहना है कि त्योहारों के समय बिक्री बढ़ने की उम्मीद रहती है, लेकिन नकली माल की खबरों के कारण इस बार ग्राहक खरीदारी को लेकर ज्यादा सतर्क हैं.

पनीर-मावा लेने से पहले पूछ रहे सवाल
चौपला बाजार में करीब 40 साल से पनीर और मावे का कारोबार कर रहे व्यापारी प्रमोद गर्ग ने बताया कि उनके यहां ग्राहक वर्षों से भरोसे के साथ सामान खरीदते रहे हैं. लेकिन नकली पनीर और मावे की खबरों के बाद अब स्थिति बदल गई है. उन्होंने बताया कि ग्राहक अगर सिर्फ 100 ग्राम पनीर या मावा लेने भी आता है तो पहले पूछता है कि सामान असली है या नहीं. ऐसे में व्यापारियों को ग्राहकों को समझाना पड़ रहा है कि उनके यहां गुणवत्ता का ध्यान रखा जाता है. उनका कहना है कि कुछ लोगों की गलत कमाई का असर पूरे बाजार के कारोबारियों पर पड़ रहा है.

दूसरी पीढ़ी संभाल रही कारोबार, भरोसा सबसे बड़ा आधार
व्यापारी दिनेश सिसोदिया ने बताया कि चौपला मंदिर बाजार में पनीर और मावे का कारोबार अब दूसरी पीढ़ी संभाल रही है. उनके मुताबिक इस कारोबार में सबसे जरूरी चीज ग्राहक का भरोसा है. उन्होंने कहा कि गांव और देहात के इलाकों में बड़ी मात्रा में पनीर और मावा तैयार होने और वहां से दिल्ली तक सप्लाई किए जाने की शिकायतें सामने आती रहती हैं. ऐसे में असली और नकली माल को लेकर ग्राहकों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है. कुछ व्यापारी ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने के लिए टेस्टिंग के जरिए भी उन्हें सामान की गुणवत्ता को लेकर भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं.

350-400 रुपये का माल कहीं बहुत सस्ते में बिक रहा
करीब 35 साल से कारोबार कर रहे व्यापारी दिनेश कुमार ने बताया कि जिस पनीर और मावे की कीमत बाजार में करीब 350 से 400 रुपये तक होती है, वही कुछ जगहों पर बहुत कम कीमत में बेचा जा रहा है. ऐसे में ग्राहकों को भी सावधान रहने की जरूरत है. व्यापारियों के मुताबिक नकली उत्पादों की खबरों का असर उनकी बिक्री पर पड़ा है और फिलहाल कारोबार में करीब 50 प्रतिशत तक की गिरावट आई है. बाजार में इस समय पनीर करीब 340 रुपये और मावा करीब 320 रुपये किलो बिक रहा है.

त्योहारों में बढ़ती मांग के बीच कार्रवाई की मांग
त्योहारों के दौरान पनीर और मावे की मांग बढ़ने की उम्मीद रहती है. ऐसे में व्यापारी चाहते हैं कि नकली माल तैयार करने और बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो. व्यापारियों ने खाद्य विभाग के साथ हुई बैठक में भी यह मुद्दा उठाया है. हालांकि, उनका कहना है कि किसी व्यापारी के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उसके सामान की पूरी जांच होनी चाहिए. इससे सही कारोबार करने वाले व्यापारियों को बेवजह परेशानी नहीं होगी और मिलावट करने वालों पर कार्रवाई भी हो सकेगी.

खाद्य विभाग ने लिए नमूने, कुछ फेल भी हुए
खाद्य विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर सुरेश मिश्रा ने बताया कि मिलावट का मामला गंभीर है. विभाग की टीम अलग-अलग स्थानों से पनीर और मावे के नमूने लेकर उनकी जांच कर रही है. उन्होंने बताया कि कुछ नमूने जांच में फेल भी हुए हैं. विभाग की ओर से ग्राहकों और व्यापारियों को भी जागरूक किया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि मिलावटी पनीर और मावे की सही पहचान घर पर करना आसान नहीं है. किसी उत्पाद के असली या नकली होने की पक्की पुष्टि जांच और लैब टेस्ट से ही हो सकती है.

पनीर-मावा खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
ग्राहक पनीर खरीदते समय उसके रंग, गंध और बनावट पर ध्यान दे सकते हैं. अगर पनीर जरूरत से ज्यादा चमकीला, बहुत सख्त या रबर जैसा लगे तो सावधानी बरतनी चाहिए. इसी तरह मावे में असामान्य गंध, बहुत ज्यादा चिकनाहट या बनावट में कोई अलग बदलाव दिखाई दे तो उसे लेकर सतर्क रहें.
हालांकि, घर पर किए जाने वाले किसी भी तरीके को अंतिम जांच नहीं माना जा सकता. त्योहारों के दौरान पनीर या मावा खरीदते समय ग्राहक बिल जरूर लें. अगर सामान की गुणवत्ता को लेकर शक हो तो खाद्य विभाग को इसकी जानकारी देना बेहतर है.

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