Ground Report : 'चाहकर भी नहा नहीं पा रहे', नोएडा की चोटपुर कॉलोनी में 38 हजार परिवारों की जिंदगी नरक

नोएडा. यूपी के नोएडा में सेक्टर-63 स्थित चोटपुर कॉलोनी को आबादी और जनसंख्या के लिहाज से देखा जाए तो यह एक बड़ी बस्ती है. यहां स्थानीय प्रतिनिधियों की पहल पर विधायक निधि और सांसद निधि से सड़कों का विकास भी कराया गया. हजारों परिवारों ने अपनी जीवनभर की कमाई से यहां अपना आशियाना खरीदा और बड़ी संख्या में लोगों को बिजली विभाग की ओर से बिजली कनेक्शन भी दिए गए. लेकिन आरोप है कि करीब 45 हजार घरों वाली इस कॉलोनी में सिर्फ 7 हजार घरों में ही बिजली कनेक्शन हैं. करीब 38 हजार परिवार आज भी कनेक्शन के लिए जूझ रहे हैं. उनका आरोप है कि मांगने के बावजूद बड़ी संख्या में घरों को बिजली कनेक्शन नहीं दिए गए, जिसके पीछे बिजली विभाग की अवैध कमाई बंद होने का आरोप लगाया जा रहा है. हालांकि इस आरोप पर संबंधित विभाग चुप्पी साधे हुए है.

परेशानी एक जैसी

लोकल 18 टीम ने चोटपुर कॉलोनी में उन परिवारों से भी बात की, जिनके घरों में बिजली के मीटर लगे हुए हैं और उनसे भी जिनके घरों में आज तक मीटर नहीं लग पाए हैं. दोनों ही तरह के परिवारों की परेशानी एक जैसी नजर आई बिजली नहीं तो पानी नहीं और पानी नहीं तो पूरी जिंदगी जैसे ठहर सी गई है. लोगों का कहना है कि उन्हें अपने साथ ठगी जैसा महसूस हो रहा है. बच्चों की पढ़ाई और स्कूल जाना प्रभावित हो रहा है, रातें जाग-जागकर काटनी पड़ रही हैं. जब कभी 10 से 20 मिनट के लिए बिजली आती है तो लोग सबसे पहले पानी भरने के लिए मोटर चलाते हैं. कई परिवारों को पानी खरीदकर गुजारा करना पड़ रहा है. भीषण गर्मी में लोग बिना नहाए रहने को मजबूर हैं, कई दिनों से फ्रिज बंद पड़े हैं और रात में मोबाइल की टॉर्च के सहारे समय काटना पड़ रहा है.

पढ़ाई के लिए मोमबत्ती का सहारा

इस बिजली संकट का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी साफ दिखाई दे रहा है. पूरी कॉलोनी में तीन से चार निजी स्कूल और एकेडमी हैं, जहां सैकड़ों बच्चे पढ़ते हैं. स्कूल संचालकों ने कैमरे पर कुछ भी बोलने से इनकार किया, लेकिन उन्होंने बताया कि बिजली न आने के बावजूद बच्चों की पढ़ाई सुचारू रखने के लिए मजबूरी में छोटे जेनरेटर चलाने पड़ रहे हैं. उनका कहना है कि बिजली संकट के कारण छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. कुछ बच्चों ने बताया कि घरों में बिजली नहीं होने के कारण उन्हें गर्मी के बीच किसी तरह रहना पड़ रहा है और पढ़ाई के लिए मोमबत्ती तक का सहारा लेना पड़ रहा है.

मजबूरी इंसान से कुछ भी करवा देती है

ग्राउंड रियलिटी जानने के लिए हमने कॉलोनी के कई घरों के अंदर जाकर स्थिति देखी. कई घरों के बाथरूम में रखे पानी के बर्तन खाली मिले और पानी की टंकियां भी बिना पानी के दिखाई दीं. इस बीच वहां रहने वाले लोगों ने बताया कि वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. घरों में रहने वाली गृहिणियों और किराए पर रहकर परिवार की आर्थिक मदद करने वाली महिलाओं से भी बात की गई. कई महिलाओं की आंखें भर आईं. उनका कहना था कि मजबूरी इंसान से कुछ भी करवा देती है. वे यहां सस्ते किराए और अपनी सीमित कमाई के कारण रह रही हैं. रोजगार के लिए नोएडा आना और यहां परिवार का पेट पालना उनकी जरूरत है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के बिना हर दिन उनके लिए एक नई मुश्किल बनता जा रहा है.

जेनरेटर चलाकर चल रही दुकान

कॉलोनी के स्थानीय दुकानदार भी इस संकट से प्रभावित हैं. छोटे दुकानदार छोटे-छोटे जेनरेटर चलाकर किसी तरह अपना कामकाज चला रहे हैं. बिजली नहीं होने के कारण कारोबार के साथ-साथ रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो रहा है. लोगों का कहना है कि जब बिजली आती भी है तो इतनी कम देर के लिए कि वे केवल पानी भरने या किसी जरूरी काम को पूरा करने की कोशिश कर पाते हैं. कॉलोनी में रहने वाले परिवारों के सामने सवाल सिर्फ बिजली का नहीं, बल्कि उससे जुड़ी पानी, बच्चों की पढ़ाई, रोजगार, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की पूरी दिनचर्या का है.

मुफ्त सुविधा नहीं चाहते

चोटपुर कॉलोनी के लोगों का कहना है कि उन्हें किसी मुफ्त सुविधा की मांग नहीं है, बल्कि वे नियमित और वैध तरीके से बिजली कनेक्शन लेकर उसका भुगतान करना चाहते हैं, लेकिन करीब 45 हजार घरों में सिर्फ 7 हजार कनेक्शन होने के दावे और हजारों परिवारों की परेशानी ने इस कॉलोनी की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक तरफ नोएडा को आधुनिक शहर और विकास के मॉडल के रूप में देखा जाता है, दूसरी तरफ इसी शहर की एक बड़ी कॉलोनी में हजारों परिवार बिजली और पानी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं. अब इन परिवारों की मांग है कि उनकी समस्या का स्थायी समाधान किया जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई, परिवारों की दिनचर्या और रोजमर्रा की जिंदगी फिर से सामान्य हो सके.

सिंडिकेट की जाल में फंस गए हजारों 

हजारों परिवार बिजली, पानी और अपनी सामान्य दिनचर्या पूरी करने के संकट से जूझ रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि वे हमेशा से यही मांग करते रहे हैं कि उन्हें कोई सुविधा मुफ्त में या अवैध तरीके से नहीं चाहिए. वे बिजली समेत हर सुविधा का निर्धारित भुगतान करने के लिए तैयार हैं और उनका कहना है कि उन्होंने अपने आशियाने के लिए कीमत से ज्यादा कीमत चुकाई है. इसके बावजूद हालात ऐसे हैं कि कई-कई दिनों तक घरों में बिजली नहीं आ रही है. लोगों का आरोप है कि वे एक ऐसे सिंडिकेट के जद में फंस गए हैं, जहां आम परिवारों की जरूरतों और समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है.

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