नोएडा: भारत से कॉटन यार्न के एक्सपोर्ट को लेकर गारमेंट्स इंडस्ट्री की चिंता बढ़ती जा रही है. उद्योग से जुड़े लोगों का दावा है, कि कॉटन यार्न के निर्यात की वजह से घरेलू गारमेंट्स कंपनियों को महंगा कच्चा माल मिल रहा है और इंडस्ट्री को करीब 3 लाख करोड़ रुपये के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. ये मुद्दा नोएडा के सेक्टर 06 NEA भवन में हुए यूपी टैक्स को लेकर रोड शो कार्यक्रम में उद्यमी ललित ठकराल की ओर से उठाया गया. इस रिपोर्ट में जानिए कंपनियों की क्या मांग है और इस मामले में संबंधित यूपी कैबिनेट मंत्री ने क्या आश्वासन दिया है.
इन परिस्थितियों की वजह तीन सीजन हुए खराब
इस बारे में लोकल 18 ने टेक्सटाइल्स एक्सपर्ट और गारमेंट्स इंडस्ट्री की अच्छी समझ रखने वाले ललित ठकराल से बात की. उन्होंने बताया कि बीते लगातार तीन सीजन से हमारे देश का गारमेंट्स सेक्टर नीचे जा रहा है. इसकी वजह अमेरिका का टैरिफ, उससे पहले रूस-यूक्रेन का युद्ध, होर्मुज स्ट्रेट में तनाव और अमेरिका, इजरायल व ईरान के बीच युद्ध हैं. इन परिस्थितियों के चलते हमारे ऑर्डर काफी हद तक कम हुए हैं.
ललित ठकराल ने बताया कि एक तरफ गारमेंट्स सेक्टर पहले से ही इन समस्याओं से जूझ रहा है और दूसरी तरफ भारत से चीन, बांग्लादेश, वियतनाम जैसे देशों को करीब एक लाख दो हजार करोड़ रुपये का कॉटन यार्न एक्सपोर्ट किया जा रहा है. इसी कॉटन यार्न से वहां कपड़ा तैयार होता है और फिर वही कपड़ा हमारे देश में भी आता है, जिसे हम खरीदते हैं.
इस कदम से होगा फायदा
उन्होंने कहा कि अगर कॉटन यार्न के एक्सपोर्ट को रोककर या नियंत्रित कर हम खुद इसी धागे से कपड़ा बनाएं, उसका उत्पादन बढ़ाएं और तैयार कपड़े का एक्सपोर्ट करें तो करीब 3 लाख करोड़ रुपये तक का फायदा हो सकता है. इससे देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था को भी सहयोग मिलेगा और टेक्सटाइल्स सेक्टर में रोजगार व उत्पादन बढ़ेगा.
ललित ठकराल ने कहा कि हम यह नहीं चाहते कि कॉटन यार्न के एक्सपोर्ट को पूरी तरह बंद कर दिया जाए. जब तक हमारे टेक्सटाइल्स सेक्टर की हालत नहीं सुधरती, तब तक 3 महीने, 6 महीने या कुछ समय के लिए इस पर रोक लगनी चाहिए और उसके बाद इसे दोबारा सुचारू किया जा सकता है. उनका कहना है कि इससे नोएडा की हजारों गारमेंट्स कंपनियों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और देशभर के टेक्सटाइल्स उद्योग को बहुत फायदा मिलेगा.
गैस के महंगे बिल से भी परेशान
दुगने रेट से ज्यादा गैस का बिल चुकाना पड़ रहा है, इस मुद्दे को लेकर कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने बताया कि इस मामले को सरकार के सामने रखा जाएगा और बहुत जल्द ऐसा कोई समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा, जिससे हमारे देश की कंपनियों को परेशानी न हो और उनकी बढ़ोतरी को अच्छी रफ्तार मिल सके. इसके साथ ही गारमेंट्स कंपनियों के संचालकों ने कहा कि वे गैस के महंगे बिल से भी काफी परेशान हैं. उनका कहना है कि बीते छह महीने में उन्हें पहले की तुलना में दोगुने से ज्यादा बिल का भुगतान करना पड़ रहा है. ऐसे में बढ़ती लागत का सीधा असर गारमेंट्स इंडस्ट्री पर पड़ रहा है.
3-6 महीने एक्सपोर्ट रोकने की अपील
ललित ठकराल ने बताया कि हमारा ही कॉटन यार्न दूसरे देशों में जाता है. उन्होंने कहा कि चीन में इस यार्न में मिक्सिंग करके कपड़ा बनाया जाता है और फिर उस कपड़े को अमेरिका समेत तमाम देशों में सप्लाई किया जाता है. जबकि हम अपने ही यार्न, या कहें धागे से कपड़ा बनाकर उसे आगे सप्लाई करने में उस स्तर पर सफल नहीं हो पा रहे हैं. उनका कहना है कि अगर 3 महीने, 6 महीने या कुछ समय के लिए कॉटन यार्न के एक्सपोर्ट को रोक दिया जाए तो गारमेंट्स कंपनियां फिर से अच्छे स्तर पर खड़ी होकर काम करने लगेंगी और टेक्सटाइल्स क्षेत्र में अच्छा रेवेन्यू जेनरेट होगा.
मंत्रियों से चर्चा करके निकालेगें समाधान
कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने बताया कि हम वाणिज्य मंत्री से इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे. प्रयास करेंगे कि हमारे यहां ज्यादा से ज्यादा रोजगार बढ़े. हमारा जो रॉ-मटेरियल बाहर जा रहा है, वह सीधे बाहर न जाए और यहां उसी मटेरियल से पूरा कपड़ा बनकर तैयार हो, जिसके बाद उसका एक्सपोर्ट किया जाए. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के सामने यह मुद्दा आया है और हम केंद्र सरकार के वस्त्र मंत्री से भी इस संबंध में चर्चा करेंगे. वाणिज्य मंत्री से भी बातचीत की जाएगी. हमारा प्रयास रहेगा कि उत्तर प्रदेश के टेक्सटाइल्स उद्यमियों को जो कठिनाइयां आ रही हैं, उनका समाधान निकाला जाए, ताकि उसका लाभ उत्तर प्रदेश के सभी गारमेंट्स उद्यमियों को मिल सके.
