नई दिल्ली. दिल्ली में मतदाता सूची को लेकर बड़ा आंकड़ा सामने आया है. जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच राजधानी की वोटर लिस्ट से करीब 11 लाख नाम हटाए गए. खास बात यह है कि ये बदलाव दिल्ली में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया शुरू होने से पहले किए गए थे. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में चुनाव आयोग के आंकड़ों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, नाम हटाने की यह प्रक्रिया फरवरी 2025 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को फ्रीज किए जाने के बाद शुरू हुई और 30 जून 2026 को SIR की प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले सूची को दोबारा फ्रीज किए जाने तक जारी रही. यानी इस अवधि में दिल्ली की चुनावी सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव हुआ और लाखों मतदाताओं के नाम हटा दिए गए.
रिपोर्ट के मुताबिक, यह संख्या 2025 में दिल्ली के कुल वोटरों का लगभग 7.07 प्रतिशत और जून 2026 में 11.32 प्रतिशत है. यह घटनाक्रम SIR के पहले चरण के दौरान हुआ है, जिसमें दिल्ली की वोटर लिस्ट से लगभग 48 लाख नाम हटा दिए गए थे; 20 जून तक इस लिस्ट में करीब 1.45 करोड़ वोटर थे. रिपोर्ट में दिल्ली के कम से कम 15 लोगों के हवाले से कहा गया है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि SIR से पहले के 16 महीनों के दौरान उनके नाम हटा दिए गए थे.
रिपोर्ट में कहा गया है कि SIR प्रक्रिया के दौरान इसका सीधा असर पड़ा, क्योंकि उनके नाम पहले से ही वोटर लिस्ट में नहीं थे, इसलिए उनके लिए अधूरे भरे हुए एन्यूमरेशन फॉर्म नहीं बने और वे उनके बूथ लेवल ऑफ़िसर्स (BLOs) तक नहीं पहुंचे, और वे SIR प्रक्रिया के जरिए खुद को रजिस्टर नहीं करवा पाईं.
उत्तर-पश्चिम दिल्ली के मुबारकपुर डबास में रहने वाली घरेलू कामगार पूजा देवी ने बताया कि उनके परिवार के दूसरे सदस्यों को SIR फॉर्म मिले, लेकिन उन्हें नहीं. उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, “जब SIR शुरू हुआ, तो मेरे परिवार में सभी को SIR फॉर्म मिला, सिवाय मेरे. हम कई बार BLO के पास गए, लेकिन उन्होंने कहा कि मेरा नाम लिस्ट में नहीं है और मुझे बाद में फॉर्म 6 का इस्तेमाल करके नए सिरे से रजिस्टर करना चाहिए.” रिपोर्ट में कहा गया है कि देवी ने 2020 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में वोट दिया था और उनके वोटर ID की पुष्टि भी की गई थी.
आदर्श नगर में रहने वाले बलजिंदर कुमार ने भी कहा कि उन्हें यह जानकर हैरानी हुई कि उनका नाम लिस्ट में नहीं था. रिपोर्ट के मुताबिक, कुमार ने बताया कि वह 2010 से इसी घर में रह रहे हैं और दो दशकों से ज्यादा समय से इस इलाके में वोटर रहे हैं. कुमार ने कहा, “मैं दो दशकों से ज्यादा समय से इस इलाके में वोटर रहा हूं. मुझे हैरानी हुई कि हटाए गए वोटरों की लिस्ट में भी मेरा नाम नहीं था. BLO अब कह रहे हैं कि मुझे फॉर्म 6 भरकर नए वोटर के तौर पर रजिस्टर करना चाहिए. लेकिन इसका मतलब तो यह होगा कि मैं मान रहा हूं कि मैंने पहले कभी वोट नहीं दिया है.” रिपोर्ट में बताया गया है कि ओखला, तिमारपुर, तुगलकाबाद, नरेला, रोहिणी और जंगपुरा के निवासियों ने भी ऐसे ही अनुभव बताए.
दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी के दफ्तर के अधिकारियों ने लगभग 11 लाख नाम हटाए जाने की वजह रूटीन तिमाही वोटर लिस्ट संशोधन और BLO की गलतियों को बताया. एक सीनियर अधिकारी ने कहा, “भले ही यह संख्या ज़्यादा है, लेकिन हो सकता है कि उस एक साल में रूटीन संशोधन के दौरान ये नाम हटाए गए हों. BLO ने मई और जून में प्री-SIR मैपिंग के दौरान भी नाम हटाए हो सकते हैं.” अधिकारी ने कहा कि जिन लोगों के नाम हटा दिए गए थे, वे फॉर्म-6 के जरिए वोटर के तौर पर रजिस्टर करके वोटर लिस्ट में अपना नाम वापस जुड़वा सकते हैं.
यह मामला तब सामने आया है जब दिल्ली के CEO ऑफिस ने SIR के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट तैयार करने के बारे में अलग से जानकारी दी है. ऑफिस ने बताया कि BLOs द्वारा घर-घर जाकर वेरिफिकेशन करने के बाद 31 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पब्लिश की गई थी. CEO ऑफिस ने कहा कि जो वोटर अपने रजिस्टर्ड पते पर नहीं मिले या जिनके बारे में पता चला कि वे कहीं और चले गए हैं, उन्हें ‘अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लिकेट’ (ASDD) कैटेगरी में रखा गया है.
ASDD लिस्ट ECINet के जरिए BLOs द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर बनाई गई थी और इसे दिल्ली CEO की वेबसाइट पर अपलोड किया गया था. इसमें कहा गया है कि जो एन्यूमरेशन फ़ॉर्म इकट्ठा नहीं किए जा सके, उन्हें पांच कैटेगरी में बांटा गया – मौत, पता न चलना/मौजूद न होना, हमेशा के लिए कहीं और चले जाना, पहले से ही रजिस्टर होना और अन्य. ऑफिस ने बताया कि BLOs ने बूथ लेवल एजेंट्स (BLAs) को जानकारी देने के बाद घर-घर जाकर सर्वे किया और उनके साथ समय-समय पर मीटिंग्स कीं.
CEO ऑफ़िस ने यह भी कहा कि राजनीतिक पार्टियां अपने BLAs से संबंधित BLOs से संपर्क करने और ASDD लिस्ट में शामिल वोटर्स के पते नोट करने के लिए कह सकती हैं. दावे और आपत्तियां 30 सितंबर तक की जा सकती हैं. CEO ऑफिस ने कहा है कि जो वोटर 30 जून से 17 अगस्त के तय समय के दौरान अपने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं कर पाए थे, वे अब भी वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल करवा सकते हैं.
साफ तौर पर बताया गया है कि ऐसे वोटर ‘दावे और आपत्तियों’ के समय (जो 31 अगस्त से 30 सितंबर तक चलेगा) तय डिक्लेरेशन फॉर्म और जरूरी डॉक्यूमेंट्स के साथ फॉर्म 6 जमा कर सकते हैं. फाइनल वोटर लिस्ट 4 नवंबर, 2026 को पब्लिश की जाएगी. फॉर्म 7 का इस्तेमाल किसी प्रस्तावित नाम को शामिल करने पर आपत्ति जताने या पहले से मौजूद एंट्री को हटाने के लिए किया जा सकता है, जबकि फॉर्म 8 का इस्तेमाल पता बदलने और जानकारी में सुधार करने जैसे कामों के लिए किया जा सकता है. एप्लीकेशन ERO, AERO और BLO को (तय पोलिंग स्टेशन सहित) फिजिकली जमा किए जा सकते हैं, या फिर इलेक्शन कमीशन के वोटर सर्विस पोर्टल और ECINET मोबाइल ऐप के जरिए ऑनलाइन जमा किए जा सकते हैं.
