नोएडा. दिल्ली से सटे नोएडा सेक्टर 15A में रहने वाले उपजीव सिंह ओबरॉय (70) ने करीब 45 साल मर्चेंट नेवी में अपनी सेवा देने के बाद 2021 में रिटायरमेंट लिया. वे यहीं नहीं रुके, अब शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और AI क्षेत्र में समाजसेवा कर रहे हैं. वे उन लोगों के लिए उदाहरण हैं, जो रिटायरमेंट के बाद अपने घर, सोसाइटी, सेक्टर और गांव तक ही सिमिट जाते हैं. उपजीव सिंह हजारों बच्चो को फ्री क्लास देकर आगे बढ़ा रहे हैं. उनका कहना है कि वे समाज में उस वर्ग के छात्रों के लिए काम कर रहे जो आर्थिक तंगी के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं. लोकल 18 से उपजीव बताते हैं कि ये आइडिया उन्हें 2021 में आया था, जब उनकी रिटायरमेंट में कुछ ही समय बचा था. उन्हें लगा हमें सोसाइटी को समाजसेवा के जरिए कुछ लौटाना चाहिए. खासकर उन छोटी बच्चियों और लड़कों को, जो स्कूल में पढ़ाते हैं, लेकिन जिंदगी में ज्यादा काम नहीं आता. उसे कवरअप करने के लिए स्किल डेवलपमेंट की जरूरत है.
15 सरकारी स्कूल जुड़ चुके
उपजीव बताते हैं कि पर्सनालिटी डेवलेपमेंट, स्पोकन इंग्लिश, और हाउ टू कम्युनिकेशन हम सिखाते हैं. अब तक 1500 छात्र-छात्राएं हम से जुड़ चुके हैं. बहुतों को प्लेसमेंट मिल गई है. दूसरे बच्चे भी अपने अपने फील्ड अच्छा कर रहे हैं. ओबरॉय का कहना है कि जितने भी स्कूल हमने अब तक सेलेक्ट किए हैं, वे हमें रिपीट कर रहे हैं. अभी हमारे पास 15 सरकारी स्कूलों के बच्चे हैं. इस साल हम चाहते हैं कि करीब 20 स्कूल के बच्चे हमसे जुड़ सकें.
कहां से आता है पैसा
उपजीव बताते हैं कि इंस्टिट्यूट बियॉन्ड बॉर्डर्स हमारा इंस्टीट्यूट है. हम सरकारी स्कूल के अलावा प्राइवेट स्कूल के साथ भी काम करते है, जहां सिर्फ एकेडमिक पर फोकस किया जाता है, पर्सनैलिटी पर नहीं, उन बच्चों को हम टारगेट करके आगे बढ़ा रहे हैं. ये काम हम खुद की अर्निंग और दूसरे डोनर्स के माध्यम से कर रहे हैं. जो डोनर्स हैं, वे समय-समय पर इसकी पारदर्शिता चेक करते हैं. हम शिक्षा से जुड़ा मटेरियल, ट्रांसपोर्ट, ट्रेनर्स कॉस्ट सहित सभी फैसिलिटी छात्रों को प्रोवाइड करवाते हैं. हम 7वीं क्लास से ऊपर वाले छात्रों को पढ़ाते हैं, जो खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं. एक छात्र गूगल में कुछ दिन पहले ही इंटर्न के लिए गया है, दो छात्राएं फोरेंसिक साइंस कर रही हैं. दीपिका शर्मा और दीक्षा मिश्रा ने एक AI टीचर रोबोट बनाया है, जो आने वाले दिनों में बड़ा प्रोजेक्ट बनकर उभरेगा.
मिलता है सुकून
उपजीव सिंह ओबेरॉय के मुताबिक, आज के बच्चों को आप कुछ सिखाना चाहते हैं और आगे बढ़ाना चाहते हैं तो आपको उनके साथ चलना पड़ेगा. हम ऑनलाइन AI क्लास भी लेते हैं. बच्चो को फाइनेंस लिट्रेसी के बारे में गहनता से बताया जाता है. उनकी टीम में इंटर्न और ट्रेनर्स समेत कुल 8 सदस्य हैं, जो हर दिन किसी न किसी स्कूल में क्लास लेते हैं. उपजीव सिंह कहते हैं कि 45 साल जिस जुनून के साथ मर्चेंट नेवी में देश सेवा की, अब घर बैठने का मन नहीं करता है. ये काम बहुत सुकून देता है.
