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नोएडा सेक्टर 63 स्थित डी स्क्वॉयर मॉल के बेसमेंट में खुला ‘द अटेंडेंस शीट कैफे’ लोगों को बचपन के दिनों में ले जाता है. क्लासरूम की तर्ज पर डिजाइन इस कैफे में डेस्क, ब्लैकबोर्ड, रोल नंबर और साइंस लैब प्रोजेक्ट्स मौजूद हैं. यहां मार्कशीट रूपी मेन्यू में ‘गृहकार्य तड़का मैगी’ और ‘बैकबेंचर मोमोज’ जैसे व्यंजन टिक कर ऑर्डर होते हैं. बिल भी अंक तालिका के रूप में A, B, C ग्रेड के साथ आता है, जहां अटेंडेंस वाल पर हाजिरी लगाने की अनूठी सुविधा है.
स्कूल का वह दौर शायद हर किसी की जिंदगी का सबसे हसीन हिस्सा होता है-दोस्तों के साथ डेस्क शेयर करना, टिफिन चुराना और ब्लैकबोर्ड पर नजर टिकाए रखना. उम्र के किसी भी पड़ाव पर खड़े इंसान के दिल में एक बार फिर क्लासरूम में लौटने की चाह हमेशा जिंदा रहती है. लोगों के इसी नॉस्टैल्जिया को ताजा करने के लिए दिल्ली से सटे नोएडा के सेक्टर 63 स्थित डी स्क्वॉयर मॉल के बेसमेंट में एक बेहद अनोखा और दिलचस्प कैफे शुरू हुआ है, जिसका नाम है ‘द अटेंडेंस शीट कैफे’. यह कैफे अपने खास इंटीरियर और स्कूल-थीम वाले अंदाज से ग्राहकों को सीधे उनके बचपन के दिनों में ले जाता है.
कैफे के भीतर कदम रखते ही यह किसी रेस्टोरेंट जैसा नहीं, बल्कि एक जीवंत क्लासरूम जैसा नजर आता है. यहां ग्राहकों के बैठने के लिए पारंपरिक कुर्सियों की जगह स्कूल जैसी डेस्क लगाई गई हैं. दीवारों पर ब्लैकबोर्ड और ग्रीन बोर्ड सजे हैं. टेबल नंबर की पहचान के लिए क्रमांक यानी रोल नंबर तय किए गए हैं. इसके अलावा कैफे में बुक्स लाइब्रेरी और एक साइंस लाइब्रेरी भी तैयार की गई है, जहाँ स्कूल के दिनों में बनाए जाने वाले लाइव प्रोजेक्ट्स जैसे पंपिंग प्रोजेक्ट, सोलर हाउस और विंड एनर्जी से जुड़े मॉडल रखे गए हैं.
लोकल 18 से बातचीत में बायबायकार्ट के को-फाउंडर एंड डायरेक्टर और कैफे के ऑनर आशीष पांडेय ने बताया कि इस कैफे को तैयार करने का मुख्य मकसद लोगों को उनके स्कूल के पुराने दिनों को दोबारा जीने का मौका देना है. कैफे की सबसे अनूठी पहचान इसका मेन्यू कार्ड है, जिसे हूबहू स्कूल की मार्कशीट की तरह डिजाइन किया गया है. ग्राहक को ऑर्डर देने के लिए यही मार्कशीट दी जाती है, जिसमें दर्ज हर डिश के नीचे उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री और उसके स्वाद से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी गई है.
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मेन्यू में मौजूद व्यंजनों के नाम भी स्कूल की यादों को ध्यान में रखकर गढ़े गए हैं. यहां आने वाले लोग ‘गृहकार्य तड़का मैगी’, ‘ट्यूशन वाली मैगी’, ‘स्टाफ रूम प्रिंसिपल चाय’ और ‘प्रार्थना सभा चाय’ का लुत्फ उठा सकते हैं. मॉकटेल्स को ‘कैमिस्ट्री साइंस लैब मॉकटेल्स’ का नाम दिया गया है, जबकि स्नैक्स में ‘बैकबेंचर मोमोज’ काफी चर्चा में रहते हैं. ग्राहकों को जो भी डिश पसंद आती है, वे मार्कशीट में उस पर टिक लगाकर स्टाफ को सौंप देते हैं और थोड़ी ही देर में ऑर्डर उनके रोल नंबर वाली डेस्क पर पहुंच जाता है.
स्कूल में जिस तरह परीक्षा की उत्तर पुस्तिका जमा करने के बाद परिणाम आता था, उसी तर्ज पर यहाँ भोजन के बाद बिल पेश किया जाता है. यहां बिल को ‘अंक तालिका’ (रिजल्ट शीट) का नाम दिया गया है. भुगतान की इस प्रक्रिया में ग्राहकों को स्कूल की तरह A, B और C जैसे ग्रेड्स भी दिए जाते हैं, जिससे खाने से लेकर बिलिंग तक का पूरा अनुभव स्कूल की व्यवस्था से जुड़ा रहता है.
कैफे के नामकरण पर आशीष पांडेय बताते हैं कि स्कूल में दिन की शुरुआत हमेशा हाजिरी यानी उपस्थिति से होती है, इसलिए कैफे का नाम ‘द अटेंडेंस शीट’ रखा गया. यहां एक खास ‘अटेंडेंस वाल’ बनाई गई है, जहां खाना खत्म करने के बाद ग्राहक चॉक की मदद से बोर्ड पर अपना नाम, स्कूल का रोल नंबर और अपनी पसंदीदा डिश लिखकर अपनी उपस्थिति दर्ज कर सकते हैं.
इसके साथ ही एक अन्य दीवार पर स्कूल के क्लासरूम में एंट्री और डिसिप्लिन से जुड़ी पुरानी बातें अंकित की गई हैं जैसे क्लास में आने से पहले पूछा जाने वाला May I come in, sir?, शरारत पर मिलने वाली सजा Stand up on the bench, शोर मचाने पर गूंजने वाला Silence in the class और होमवर्क चेकिंग के दौर की यादें. यह पूरा सेटअप आने वाले हर शख्स को एक बार फिर अपनी पुरानी क्लास के दिनों में पहुंचा देता है.
