UER-II से दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे तक सीधा लिंक
NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, पहली परियोजना करीब 20 किलोमीटर लंबी होगी. इसका उद्देश्य दिल्ली की तीसरी रिंग रोड के तौर पर विकसित UER-II को निर्माणाधीन दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे से सीधे जोड़ना है. इस लिंक के बनने से दिल्ली, गुरुग्राम और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की ओर जाने वाले वाहनों को दिल्ली या हरियाणा के लंबे और व्यस्त रास्तों से होकर गुजरने की जरूरत कम हो सकती है. फिलहाल दिल्ली से दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे तक पहुंचने वाले वाहनों को बहादुरगढ़ के पास नीलोठी या कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे की ओर जाना पड़ता है. इससे कई यात्रियों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है. प्रस्तावित लिंक सीधे UER-II को दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे और केएमपी के जंक्शन क्षेत्र से जोड़ने की योजना पर आधारित है.
नजफगढ़, मुंडका, द्वारका वालों को राहत
यह कॉरिडोर दिल्ली के कराला-कंझावला क्षेत्र के पास UER-II से शुरू होकर कंझावला रोड से आगे बढ़ेगा. प्रस्तावित मार्ग लाडपुर, जोंती, कनोदा और कुलसी गांवों के आसपास से होते हुए हरियाणा के बहादुरगढ़ के निकट लाडरवान गांव के पास मुख्य एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा. इससे नजफगढ़, मुंडका, द्वारका और बहादुरगढ़ के आसपास के इलाकों को भी तेज संपर्क मार्ग मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा बहादुरगढ़ बाईपास, एनएच-9 और UER-II के बीच बेहतर संपर्क बनने से पश्चिमी दिल्ली तथा हरियाणा की ओर से आने-जाने वाले यातायात को वैकल्पिक मार्ग मिल सकता है. कराला-कंझावला और आसपास के इलाकों के लिए भी यह कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
गाजियाबाद जानेवालों की बल्ले-बल्ले
दूसरी परियोजना करीब 17 किलोमीटर लंबी और 6 लेन की एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगी. इसका मकसद उत्तरी दिल्ली में अलीपुर के पास UER-II को यमुना पार कर उत्तर प्रदेश के लोनी क्षेत्र के पास ट्रोनिका सिटी और दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे (एनएच-709बी) से जोड़ना है. इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 3,500 करोड़ रुपये बताई गई है. प्रस्तावित कॉरिडोर अलीपुर में एनएच-44 के पास UER-II के अंतिम छोर से आगे बढ़ेगा. इसके बाद यह बकोली, हिरनकी और खमपुर की दिशा से होते हुए यमुना बांध रोड तक पहुंचेगा. यहां से यमुना पर प्रस्तावित नए पुल के जरिए कॉरिडोर ट्रांस-यमुना क्षेत्र में प्रवेश करेगा और लोनी सीमा के पास ट्रोनिका सिटी के अग्नौला-मंडोला क्षेत्र में एनएच-709बी से जुड़ने की योजना है. इस लिंक का उद्देश्य दिल्ली के भीतर से गुजरने वाले अंतरराज्यीय यातायात को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराना है. राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के पश्चिमी एवं उत्तरी हिस्सों से उत्तराखंड, सहारनपुर, शामली या पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाले वाहनों को दिल्ली के भीतरी हिस्सों में प्रवेश करने की जरूरत कम होगी.
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से नोएडा तक 35 किलोमीटर का कॉरिडोर
तीसरी परियोजना तीनों में सबसे लंबी होगी. करीब 35 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर के जरिए दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को नोएडा और गौतमबुद्ध नगर क्षेत्र से सीधे जोड़ने की योजना है. परियोजना की अनुमानित लागत करीब 4,400 करोड़ रुपये बताई गई है. प्रस्तावित कॉरिडोर दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के अक्षरधाम के पास वाले हिस्से से जुड़कर दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा के साथ आगे बढ़ेगा. इसका उद्देश्य लोनी और पूर्वी दिल्ली के घने यातायात वाले इलाकों को बाईपास करते हुए नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र तक तेज संपर्क उपलब्ध कराना है. आगे यह नोएडा एक्सप्रेसवे से जुड़ने की योजना है. फिलहाल उत्तर, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के कई हिस्सों से नोएडा या ग्रेटर नोएडा जाने वाले वाहनों को आउटर रिंग रोड, रिंग रोड, कश्मीरी गेट, आईटीओ, अक्षरधाम या डीएनडी फ्लाईवे जैसे व्यस्त मार्गों से होकर गुजरना पड़ता है. यातायात की स्थिति के आधार पर इस सफर में काफी समय लग सकता है. इससे दो से ढाई घंटे की यात्रा 30 से 35 मिनट में पूरी हो सकेगी.
