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दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने और सात लोगों की मौत के बाद MCD ने अवैध निर्माणों और नियमों को ताक पर रखकर चल रहे पीजी हॉस्टलों के खिलाफ व्यापक अभियान छेड़ दिया है. राजधानी के सभी 12 जोनों में मास्टर प्लान और बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन करने वाली कम से कम 596 संपत्तियों को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया है, जबकि 190 परिसरों को सील किया गया है. निगम ने 200 से अधिक इमारतों को कारण बताओ नोटिस और लगभग 100 ढांचों को तोड़ने के अंतिम आदेश जारी किए हैं.
दिल्ली में 21 हजार रिहायशी मकानों में कमर्शियल खेल चल रहा है. (पीटीआई)
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में छह सितंबर को पांच मंजिला इमारत गिरने और सात लोगों की दर्दनाक मौत के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) ने अवैध निर्माणों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा विध्वंस अभियान छेड़ दिया है. हादसे से सबक लेते हुए निगम ने राजधानी के सभी 12 जोनों में मास्टर प्लान और बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन करने वालों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी है. शनिवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस विशेष अभियान के तहत अब तक कम से कम 596 संपत्तियों को बुलडोजर चलाकर पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है, जबकि 190 खतरनाक और गैर-कानूनी परिसरों को सील किया जा चुका है.
हादसे के बाद निगम ने दिल्ली भर में चल रहे पेइंग गेस्ट (PG) हॉस्टलों का सघन सर्वे कराया, जिसमें सुरक्षा मानकों और जरूरी मंजूरियों की भारी अनदेखी सामने आई. दिल्ली हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी में 2,453 ऐसी इमारतें चिन्हित की गई हैं जहां नियमों को ताक पर रखकर पीजी संचालित किए जा रहे थे. निगम अब तक 200 से अधिक इमारतों को कारण बताओ नोटिस और करीब 100 ढांचों को तोड़ने के अंतिम आदेश जारी कर चुका है. रिहायशी इलाकों में सुरक्षा को दरकिनार कर खड़े किए गए अवैध ढांचों पर यह सख्त प्रहार शहर में लगातार जारी है.
दिल्ली के सभी 12 जोनों में गरजा बुलडोजर
हादसे के बाद नगर निगम ने अवैध निर्माणों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है.
596 इमारतें जमींदोज: तय नियमों और नक्शे के विपरीत बनी 596 से ज्यादा संपत्तियों को निगम की टीमों ने ध्वस्त किया.
190 परिसरों पर जड़े ताले: सुरक्षा मानकों की अनदेखी और गंभीर उल्लंघनों के चलते 190 इमारतों को मौके पर ही सील कर दिया गया.
नोटिस और डिमोलिशन के आदेश: निगम ने 200 से अधिक मकान मालिकों को नोटिस थमाए हैं और लगभग 100 इमारतों को गिराने के सीधे आदेश दिए हैं.
पीजी हॉस्टलों पर दिल्ली हाईकोर्ट में बड़ा खुलासा
सर्वे में सामने आया कि राजधानी में छात्रों और कामकाजी लोगों के लिए बने पीजी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं.
2453 पीजी इमारतों की पहचान: हाईकोर्ट में दी गई जानकारी के अनुसार, राजधानी में 2,453 इमारतों का इस्तेमाल नियमों के खिलाफ पीजी के तौर पर हो रहा है.
सुरक्षा एनओसी का अभाव: अधिकांश पीजी में न तो फायर सेफ्टी के पुख्ता इंतजाम मिले और न ही बिल्डिंग बायलॉज के तहत जरूरी अप्रूवल लिए गए थे.
हालांकि, सिर्फ 730 इमारतों के ही बिल्डिंग प्लान या मंजूर किए गए प्लान मिल पाए. MCD अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि कुछ इमारतें 50-60 साल पुरानी हैं और कई प्रॉपर्टीज के मालिक कई बार बदले हैं, जिससे रिकॉर्ड ढूंढना मुश्किल हो गया है. सर्वे में पहले भी कई दूसरी रेगुलेटरी कमियों का पता चला था. 2453 PG इमारतों में से सिर्फ़ 31 (यानी 1.2%) के पास दिल्ली फायर सर्विस से ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) था, जबकि मंजूर किए गए बिल्डिंग प्लान सिर्फ 729 इमारतों के लिए उपलब्ध थे.
MCD की हालिया रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2,453 PG इमारतों में से सिर्फ चार को “खतरनाक” की श्रेणी में रखा गया था. इसके अलावा, 3.99 लाख रिहायशी प्रॉपर्टीज के सर्वे में रिहायशी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियों के 21,099 से ज्यादा मामले सामने आए, और ऐसे नियमों के उल्लंघन के लिए लगभग 30-40 प्रॉपर्टीज को सील कर दिया गया.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…
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