नोएडा: बीते 22 दिनों से लगातार धरने पर बैठे नोएडा डूब क्षेत्र के निवासियों में से 250 से अधिक लोगों पर नोएडा पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है. पुलिस का कहना है कि बिना अनुमति के सड़क पर उतरकर किसानों और डूब क्षेत्र निवासियों ने यह प्रदर्शन किया. अनशन पर बैठी महिलाओं से जब बातचीत की गई, तो उन्होंने दो टूक कहा कि वे इन मुकदमों और दबाव से डरने वाली नहीं हैं और न ही पीछे हटेंगी; यह एफआईआर दर्शाती है कि आंदोलन ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है. आखिर क्या है इन प्रदर्शनकारियों की आगामी रणनीति, जानिए इस विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट में…
बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बच्चों का भविष्य संकट में
धरने पर बैठी पूजा ने बताया कि उन्होंने अपने परिवार की वर्षों की जमा-पूंजी लगाकर यहां मकान बनाया है. उनके मुताबिक, उनके परिवार में चार बेटियां हैं. बड़ी बेटी बीए कर रही है, जबकि छोटी बेटी इंटर की पढ़ाई कर रही है. उन्होंने कहा कि बिजली नहीं होने की वजह से बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है. उनके अनुसार, घर में सोलर पैनल लगा है, लेकिन मौसम खराब होने पर उससे भी पर्याप्त बिजली नहीं मिल पाती. पूजा ने बताया कि उनकी बेटियां फोन करके पढ़ाई न हो पाने की परेशानी बयां करती हैं.
मूलभूत अधिकारों के लिए मच्छरों और मौसम की मार झेलती महिलाएं
उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी शासन-प्रशासन से किसी विशेष सुविधा की नहीं, बल्कि बिजली और पानी जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की मांग कर रहे हैं. वहीं, धरने में शामिल नीना मिश्रा ने भी स्पष्ट किया कि जब तक बिजली नहीं मिलेगी, तब तक यह धरना निरंतर जारी रहेगा. उन्होंने बताया कि वह लगभग सात वर्षों से यहां रह रही हैं और धरने के दौरान मच्छरों के प्रकोप समेत कई प्रकार की गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.
‘मांगें पूरी नहीं हुईं तो शुरू होगा जेल भरो आंदोलन’: सुखवीर खलीफा
भारतीय किसान परिषद के नेता सुखवीर खलीफा ने कहा कि इस पूरे क्षेत्र में भारी तादाद में लोग बिजली और पानी की विकट समस्या से जूझ रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि लाखों नागरिकों और छात्र-छात्राओं की शिक्षा पर इसका सीधा असर पड़ रहा है. उनके मुताबिक, मातृशक्ति लगातार इस धरने और आमरण अनशन में कंधे से कंधा मिलाकर शामिल है. उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बावजूद आंदोलन को समाप्त नहीं किया जाएगा और यदि आवश्यकता पड़ी, तो जेल भरो आंदोलन की शुरुआत की जाएगी. सुखवीर खलीफा ने प्रदर्शनकारियों की मांग को दोहराते हुए कहा कि मुख्यमंत्री स्तर से बिजली-पानी उपलब्ध कराने के निर्देश के बाद संबंधित अधिकारियों तक स्पष्ट प्रशासनिक आदेश पहुंचने चाहिए, ताकि विद्युत कनेक्शन आवंटन की प्रक्रिया निर्बाध रूप से आगे बढ़ सके.
ऑनलाइन आवेदन निरस्त होने और अवैध कनेक्शनों से हादसों का डर
प्रदर्शनकारियों ने बिजली कनेक्शन जारी करने की मौजूदा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए. सुखवीर खलीफा के अनुसार, चोटपुर और छजारसी में लोगों को मीटर आवंटित किए जाने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन वहां भी कनेक्शन के संदर्भ में अलग-अलग व्यवस्थाएं लागू करने का दावा किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि डूब क्षेत्र के पते पर ऑनलाइन बिजली कनेक्शन हेतु आवेदन करने पर फॉर्म निरस्त कर दिया जाता है और कारण में ‘डूब क्षेत्र’ लिख दिया जाता है. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि पूरे क्षेत्र में अवैध रूप से बिजली की व्यवस्था होने के चलते लगातार गंभीर हादसों का अंदेशा बना रहता है. इसके साथ ही, उन्होंने बिजली के अस्थायी (टेम्पररी) कनेक्शन के नाम पर अत्यधिक दरें वसूले जाने का भी दावा किया.
‘बिजली-पानी मिलते ही खत्म कर देंगे धरना’
धरने में शामिल एक अन्य महिला ने बताया कि उन्होंने भी अपनी पूरी जमा-पूंजी लगाकर यहां अपना आशियाना बनाया है. उनके पति एक प्रतिष्ठित कंपनी में इंजीनियर हैं और घर में छोटे बच्चे हैं. महिला ने भावुक होते हुए कहा कि मासूम बच्चों को घर पर अकेला छोड़कर धरने में बैठना उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं है, किंतु बिजली की गंभीर किल्लत के कारण उन्हें विवश होकर आंदोलन का मार्ग चुनना पड़ा. प्रदर्शनकारियों का साफ तौर पर कहना है कि यदि उनके घरों में वैधानिक रूप से बिजली के मीटर लगाकर कनेक्शन चालू कर दिए जाएं और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित हो जाए, तो वे तत्काल धरना समाप्त कर देंगे. फिलहाल, सभी प्रदर्शनकारी अपनी जायज बिजली-पानी की मांगों को लेकर आंदोलन पर अडिग हैं.
