Jamia Millia Islamia Placement 2026: कॉलेज में पढ़ाई के साथ अगर किसी छात्र को देश-दुनिया की बड़ी कंपनी में इंटर्नशिप करने का मौका मिल जाए तो यह उसके करियर के लिए बड़ी उपलब्धि होती है लेकिन अगर वही इंटर्नशिप आगे चलकर लाखों रुपये के नौकरी के ऑफर में बदल जाए तो कहानी और खास हो जाती है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया यानी जेएमआई के बीटेक कंप्यूटर इंजीनियरिंग के छात्र मोहम्मद शमून के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है.
जेएमआई के 2027 बैच के छात्र मोहम्मद शमून ने ग्लोबल पेमेंट्स कंपनी वीजा में समर इंटर्नशिप की थी. इस इंटर्नशिप के दौरान उन्हें हर महीने 90,000 रुपये का स्टाइपेंड मिला. इंटर्नशिप पूरी करने के बाद कंपनी ने उनके प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें सालाना 35 लाख रुपये के पैकेज वाला प्री-प्लेसमेंट ऑफर यानी पीपीओ दे दिया.शमून को यह इंटर्नशिप किसी पहचान या सीधे कैंपस ऑफर के जरिए नहीं मिली थी. उन्होंने ऑनलाइन असेसमेंट और इंटरव्यू प्रक्रिया में हिस्सा लेकर यह मौका हासिल किया था. इसके बाद इंटर्नशिप में उनके प्रदर्शन ने उन्हें आगे नौकरी के ऑफर तक पहुंचाया.
इंटरव्यू से मिली वीजा की इंटर्नशिप
मोहम्मद शमून जेएमआई के बीटेक कंप्यूटर इंजीनियरिंग प्रोग्राम के 2027 बैच का हिस्सा हैं.उन्होंने वीजा में समर इंटर्नशिप के लिए ऑनलाइन असेसमेंट दिया और इसके बाद इंटरव्यू हुआ.इसमें सेलेक्ट होने के बाद उन्हें वीजा में इंटर्नशिप करने का मौका मिला.इंटर्नशिप के दौरान कंपनी की ओर से उन्हें हर महीने 90,000 रुपये का स्टाइपेंड दिया गया.कॉलेज के दौरान किसी ग्लोबल पेमेंट्स कंपनी में काम करने का यह अनुभव उनके लिए आगे की नौकरी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण साबित हुआ.
इंटर्नशिप से मिला 35 लाख का पीपीओ
इंटर्नशिप खत्म होने के बाद कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. कंपनी ने इंटर्नशिप के दौरान शमून के प्रदर्शन को देखा और इसके बाद उन्हें प्री-प्लेसमेंट ऑफर यानी पीपीओ दिया गया.इस पीपीओ में सालाना 35 लाख रुपये का कंपेंसेशन है.पीपीओ का मतलब ऐसा नौकरी का ऑफर है जो किसी छात्र को उसकी डिग्री पूरी होने से पहले इंटर्नशिप के दौरान या उसके बाद दिया जाता है.कंपनी की शर्तों के मुताबिक डिग्री पूरी करने के बाद यह ऑफर फुल-टाइम नौकरी में बदल सकता है यानी शमून के लिए इंटर्नशिप सिर्फ कुछ महीनों का काम करने का अनुभव नहीं रही, बल्कि उसी प्रदर्शन के आधार पर उन्हें आगे के करियर का रास्ता भी मिल गया.
यूनिवर्सिटी प्लेसमेंट सेल ने कराई प्लेसमेंट
मोहम्मद शमून का यह प्लेसमेंट जामिया मिल्लिया इस्लामिया के यूनिवर्सिटी प्लेसमेंट सेल यानी यूपीसी के जरिए हुआ.जेएमआई के मुताबिक शमून को मिला पीपीओ उनकी इंटर्नशिप और चयन प्रक्रिया के दौरान किए गए प्रदर्शन का परिणाम है.यूनिवर्सिटी के स्तर पर यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे छात्रों के लिए इंटर्नशिप को आगे नौकरी के अवसर में बदलने की भूमिका सामने आती है.
जेएमआई में इंजीनियरिंग की पढ़ाई
जामिया मिल्लिया इस्लामिया की फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी की स्थापना साल 1985 में हुई थी हालांकि विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग की पढ़ाई इससे भी पहले शुरू हो चुकी थी.जामिया में पहला इंजीनियरिंग कोर्स बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग यानी बीई इन सिविल इंजीनियरिंग था जिसकी शुरुआत 1978 में हुई थी.बाद में 1985 में फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी की स्थापना की गई.आज इस फैकल्टी में सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन, कंप्यूटर इंजीनियरिंग, एनवायरनमेंटल साइंसेज और एप्लाइड साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज जैसे विभाग शामिल हैं.
कई तरह के बीटेक प्रोग्राम
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में अंडरग्रेजुएट स्तर पर कई बीटेक प्रोग्राम उपलब्ध हैं. इनमें सिविल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग (कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी), इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल एंड कंप्यूटर इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, रोबोटिक्स एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स (वीएलएसआई डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी), कंप्यूटर इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (डेटा साइंसेज) शामिल हैं.इनमें से कुछ प्रोग्राम सेल्फ-फाइनेंसिंग मोड में भी संचालित किए जाते हैं.इससे छात्रों को इंजीनियरिंग के अलग-अलग क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने के विकल्प मिलते हैं. कंप्यूटर इंजीनियरिंग भी इन्हीं प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल है.
