घर बसाना हो या करनी हो शादी की तैयारी, गाजियाबाद के गोल मार्केट में मिलेगी बर्तनों की पूरी दुनिया वो भी कम रेंज में

गाजियाबाद में अगर घर के लिए बर्तन खरीदने हैं तो घंटाघर स्थित गोल मार्केट एक ऐसा बाजार है जहां एक ही जगह पर किचन की छोटी से बड़ी जरूरत पूरी हो जाती है. पुराना शहर होने के साथ-साथ यह बाजार बर्तनों की दुकानों के लिए भी लंबे समय से अपनी अलग पहचान बनाए हुए है. यहां रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों से लेकर शादी-ब्याह और बड़े आयोजनों के लिए जरूरी सामान तक की पूरी रेंज दुकानों पर मौजूद है. स्टील, पीतल और दूसरे धातुओं के बर्तनों के साथ किचन में काम आने वाला कई तरह का सामान भी यहां आसानी से मिल जाता है.

1945 में छोटी दुकानों से शुरू हुआ गोल मार्केट का सफर

स्थानीय व्यापारी रवि ने बताया कि गोल मार्केट की शुरुआत करीब 1945 में हुई थी. उस समय बाजार आज की तरह पक्की दुकानों वाला नहीं था. यहां छोटी-छोटी खोखानुमा दुकानें हुआ करती थीं. समय के साथ बाजार का विस्तार हुआ और इन छोटी दुकानों की जगह पक्की दुकानें बनती चली गईं. करीब आठ दशक के सफर में गोल मार्केट ने कई बदलाव देखे लेकिन बर्तनों का कारोबार इसकी सबसे बड़ी पहचान बना रहा.

25 से 30 दुकानों में मिलते हैं हर तरह के बर्तन

आज गोल मार्केट में बर्तनों की करीब 25 से 30 दुकानें हैं. इन दुकानों पर ग्राहक को जरूरत के हिसाब से सामान की लंबी रेंज मिलती है. घर में रोज इस्तेमाल होने वाली छोटी कटोरी, गिलास, चम्मच और प्लेट से लेकर कड़ाही, भगोने, कुकर और दूसरे बड़े बर्तन तक यहां उपलब्ध हैं. शादी-ब्याह के लिए एक साथ बड़ी संख्या में बर्तन खरीदने वाले ग्राहकों के लिए भी यहां कई विकल्प मौजूद हैं.

कम बजट से महंगे बर्तनों तक ग्राहकों के लिए कई विकल्प

इस बाजार की खासियत इसकी रेंज है. कम बजट में सामान खरीदने वाले ग्राहक से लेकर अच्छी क्वालिटी और महंगे बर्तन तलाशने वाले खरीदार तक, सभी के लिए दुकानों पर अलग-अलग विकल्प हैं. घर के किचन के साथ होटल और रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाले बड़े बर्तन और किचन यूटेंसिल्स भी यहां मिलते हैं. यानी जरूरत चाहे एक गिलास की हो या शादी के लिए पूरे किचन का सामान खरीदना हो गोल मार्केट में विकल्प मौजूद हैं.

नोएडा से मेरठ तक आसपास के इलाकों से पहुंचते हैं ग्राहक

गोल मार्केट की दुकानदारी का दायरा गाजियाबाद के पुराने शहर से बाहर तक है. व्यापारियों के मुताबिक नोएडा, मेरठ, मोदीनगर, मुरादनगर और दिलशाद गार्डन समेत आसपास के इलाकों से ग्राहक यहां बर्तन खरीदने पहुंचते हैं. घंटाघर के बीचोंबीच स्थित होने के कारण बाजार तक पहुंचना भी आसान है और आसपास के प्रमुख बाजारों से जुड़ा होने के चलते यहां दिनभर ग्राहकों की आवाजाही बनी रहती है.

80 साल बाद भी बर्तनों का कारोबार बना बाजार की पहचान

करीब 80 साल पुराने इस बाजार की सबसे बड़ी खासियत यही है कि समय बदलने के साथ इसकी दुकानें और सामान की रेंज बदली लेकिन बर्तनों का कारोबार आज भी गोल मार्केट की पहचान बना हुआ है. पुरानी दुकानों से शुरू हुआ यह बाजार आज बर्तनों की खरीदारी के लिए एक पूरा बाजार बन चुका है जहां एक ही जगह पर घर, शादी और कारोबार तीनों जरूरतों के बर्तन मिल जाते हैं.

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