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Supreme Court CJP Protest: धरने-प्रदर्शनों की आड़ में पूरी दिल्ली को छावनी में बदलने और लाखों नागरिकों की रफ्तार थामने के प्रशासनिक रवैये पर सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है. जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की संयुक्त पीठ ने 11 अक्टूबर को दो-टूक कहा कि सुरक्षा के नाम पर जनता के मौलिक अधिकारों और आवाजाही की आजादी को मनमर्जी से कुचला नहीं जा सकता.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सामान्य स्थिति में इंटरनेट बंद करने की इजाजत नहीं दी जा सकती. (पीटीआई)
CJP Protest Supreme Court: विरोध-प्रदर्शनों के नाम पर दिल्ली को बंधक बनाए जाने और आम जनजीवन ठप करने की प्रशासनिक कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने राजधानी में लगाई गई सख्त पाबंदियों पर अहम दिशा-निर्देश जारी करते हुए साफ किया है कि कानून-व्यवस्था के नाम पर नागरिकों की बुनियादी आजादी और सामान्य आवाजाही को मनमाने ढंग से नहीं छीना जा सकता. अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जब तक संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत लोक-व्यवस्था बिगड़ने की सीधी और अनिवार्य आशंका न हो, तब तक दिल्ली में मेट्रो और रेल सेवाएं पूरी तरह सामान्य रूप से संचालित की जाएं.
सड़कों पर बैरिकेडिंग की तुरंत समीक्षा, इंटरनेट पर बेवजह रोक नहीं
पीठ ने शहर में लोगों की निर्बाध आवाजाही और सुगम यातायात सुनिश्चित करने का आदेश देते हुए प्रशासन को निर्देश दिया कि राजधानी भर में लगाए गए भारी-भरकम बैरिकेड्स की तुरंत समीक्षा की जाए. इसके साथ ही अदालत ने कहा कि इंटरनेट सेवाएं कानून के दायरे में बिना किसी रुकावट के जारी रहनी चाहिए. अदालत ने स्पष्ट किया कि हालांकि इससे आईटी एक्ट के कानूनी अधिकार खत्म नहीं होते, लेकिन सामान्य स्थिति में इंटरनेट बंद करने की मनमानी इजाजत नहीं दी जा सकती.
शांतिपूर्ण जमावड़े और गैरकानूनी हिरासत पर सख्त हिदायत
नागरिक अधिकारों की सुरक्षा पर जोर देते हुए पीठ ने रेखांकित किया कि कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के बिना किसी को भी अवैध रूप से हिरासत में नहीं रखा जाएगा. अदालत ने कहा कि जिन इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू नहीं है, वहां नागरिकों को कानून के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और प्रदर्शन करने की पूरी आजादी है.
सुप्रीम कोर्ट के बाहर से धारा 163 का बोर्ड हटाने का हुक्म
अदालत ने उस जानकारी पर भी कड़ा संज्ञान लिया जिसमें बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट परिसर के आसपास धारा 163 BNSS लागू करने का नोटिस बोर्ड लगा दिया गया है. पीठ ने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते हुए तुरंत इस बोर्ड को हटाने का निर्देश दिया, ताकि आम नागरिकों और वकीलों के अदालत तक पहुंचने और न्याय पाने के अधिकार में कोई बाधा न आए.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…
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