ग्राउंड रिपोर्ट: इसी तरह प्रदर्शन हुए तो दिल्ली छोड़ना पड़ेगा… पुरानी दिल्ली के व्यापारियों का छलका दर्द

Ground Report On Delhi Protest: दिल्ली में बीते कुछ दिनों से लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन से राजधानी के व्यापारी परेशान हो गए हैं. त्योहारी सीजन उनके लिए कमाई का समय होता है लेकिन ऐसे वक्त में दिल्ली में बीते कुछ दिनों से रोज विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. इस कारण सड़कें बंद रहती हैं. कई बार मेट्रो स्टेशन बंद रहे. लोगों की आवाजाही पर कई तरह की बंदिशें हैं. इस कारण कारोबार के नजरिए सबसे अहम पुरानी दिल्ली के व्यापारी तंग आ चुके हैं. उनका कहना है कि हाल के प्रदर्शनों से उनके कारोबार पर करोड़ों रुपये का असर पड़ा है. व्यापारियों के मुताबिक प्रदर्शन के कारण रास्ते बंद रहे, आने-जाने में परेशानी हुई और ग्राहक बाजार तक नहीं पहुंच सके. कई दुकानदारों को दुकानें बंद रखनी पड़ीं. त्योहारों के सीजन में कारोबार प्रभावित होने से उनकी चिंता बढ़ गई है.

व्यापारियों का कहना है कि प्रदर्शन के कारण आने-जाने में काफी समय लग रहा है. बाहर से आने वाले ग्राहक बाजार तक नहीं पहुंच पा रहे हैं. एक व्यापारी ने कहा- हम बिल्कुल असहाय महसूस कर रहे हैं. जेन-जी क्या करना चाहती है, हमें समझ में नहीं आ रहा. वे क्या योजना बना रहे हैं? जो काम होना है, वह तो होगा ही. उनके प्रदर्शन से कोई असर नहीं पड़ने वाला.

एक अन्य व्यापारी ने कहा कि उनकी दुकान ऐसे इलाके में है, जो नई दिल्ली और पुरानी दिल्ली की सीमा पर पड़ता है. कनॉट प्लेस बंद होने का असर उनके बाजार पर भी पड़ता है. उन्होंने कहा कि त्योहारों के सीजन में बाजार बंद रहेगा तो करोड़ों रुपये का नुकसान होगा. ग्राहक डरे हुए हैं और दुकानदार खाली बैठे हैं. आने जाने के लिए लोगों को काफी घूमकर आना पड़ रहा है. मेट्रो बंद होने से भी बहुत परेशानी हुई.

इसी तरह प्रदर्शन हुए तो दिल्ली छोड़नी पड़ेगी

व्यापारियों का कहना है कि पिछले एक सप्ताह से वे परेशान हैं. एक व्यापारी अनुराग बंसल ने कहा कि अगर दिल्ली में इसी तरह प्रदर्शन होते रहे तो हमें लगता है कि दिल्ली छोड़कर बाहर शिफ्ट होना पड़ेगा. उन्होंने बताया कि उन्हें आने-जाने के कई रास्ते पता हैं, लेकिन इसके बावजूद वे समय पर नहीं पहुंच पा रहे. ऐसे में ग्राहकों का बाजार तक पहुंचना और मुश्किल है. उन्होंने कहा कि उनका स्टाफ भी दुकान तक नहीं पहुंच सका, जिसके कारण दुकान बंद रखनी पड़ी.

अनुराग बंसल

एक व्यापारी ने प्रदर्शनों के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदर्शन का कोई मकसद होना चाहिए. पता नहीं ये क्या करना चाहते हैं. आज इसे हटा दो, कल उसे हटा दो. यह तानाशाही है. मैं इसके खिलाफ हूं. कानून के हिसाब से चलना चाहिए. संविधान नाम की भी कोई चीज है.

जेन-जी के वीडियो देखकर शर्म आती है

व्यापारियों ने जेन-जी के प्रदर्शनों पर भी नाराजगी जताई. व्यापारी सचिन गुप्ता का कहना है कि प्रदर्शन के पीछे की मंशा उन्हें समझ नहीं आ रही है. एक व्यापारी ने कहा, ‘जेन-जी की बातें सुनते हैं. इनके वीडियो देखते हैं, जो वायरल हो रहे हैं, तो शर्म आती है.’

सचिन गुप्ता

एक अन्य व्यापारी ने कहा कि उन्हें लगता है कि युवा किसी के बहकावे में आकर ऐसा कर रहे हैं. उनके मुताबिक, इसका सीधा असर व्यापारियों और आम लोगों पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि यह त्योहारों का समय है और ऐसे प्रदर्शनों से कारोबार के साथ-साथ बाजार की साख भी खराब हो रही है.

रामलीला मैदान में प्रदर्शन को लेकर भी चिंता

व्यापारियों ने कहा कि रामलीला मैदान उनके बाजारों के काफी करीब है. ऐसे में उन्हें चिंता है कि आगे क्या होगा और पुरानी दिल्ली के कारोबार पर इसका कितना असर पड़ेगा. एक व्यापारी ने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार का मुद्दा संसद में उठाया जाता तो शायद वहां चर्चा हो सकती थी. उन्होंने कहा कि नेट तो संसद में भी है. संसद में विपक्ष काम नहीं चलने देता. ज्ञानेश कुमार का मुद्दा था तो संसद में उठाते, शायद कल्याण निकलता.

कुछ व्यापारियों ने इन प्रदर्शनों को दिल्ली को ठप करने की कोशिश बताया. उनका कहना है कि प्रदर्शन के कारण व्यापारियों को परेशानी हो रही है और दिल्ली की छवि भी खराब हो रही है. एक व्यापारी ने कहा कि यह धरना नहीं है, दिल्ली को हाईजैक करने की कोशिश है. व्यापारी परेशान हैं. पूरी दिल्ली में ही प्रतिबंध लगा देना चाहिए कि कहीं कोई प्रदर्शन नहीं होगा.

व्यापारी नीरज रस्तोगी का कहना है कि जेन-जी के प्रदर्शन करने वाले अपनी बात पर अड़े रहेंगे और इन प्रदर्शनों के पीछे कुछ लोग उन्हें समर्थन दे रहे हैं. उनके मुताबिक ऐसे प्रदर्शनों से कोई समाधान निकलने वाला नहीं है और इसका नुकसान व्यापारियों तथा आम लोगों को उठाना पड़ रहा है.

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