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क्या आप जानते हैं कि दिल्ली की पहली पुलिस एफआईआर कब और कैसे दर्ज हुई थी? दिल्ली का पहला पुलिस स्टेशन कौन सा था और किस एक्ट के तहत उस दौर में एफआईआर दर्ज की जाती थी. दिल्ली पुलिस के इतिहास से जुड़े इन सवालों का रोचक जवाब जानने के लिए पढ़ें आगे.
आज ही के दिन दिल्ली पुलिस ने अपनी पहली एफआईआर दर्ज की थी और आज के ही दिन कुख्यात दस्यु सरगना वीरपप्पन का एनकाउंटर किया गया था. (Image: AI)
Delhi Police First FIR: महिलाओं के कपड़े, एक हुक्का, खाना पकाने के तीन छोटे बर्तन और एक कटोरा. आज से करीब 165 साल पहले 45 आने यानी करीब 2.80 रुपये की कीमत के इसी सामान की चोरी के साथ दिल्ली के पुलिस इतिहास की शुरूआत हुई थी. जी हां, चोरी का यह वही अनोखा मामला है, जिसकी एफआईआर दिल्ली में पहली एफआईआर के तौर पर दर्ज की गई थी.
दरअसल, यह मामला आज से करीब 165 साल पहले 18 अक्टूबर 1861 का है. दिल्ली के सब्जी मंडी पुलिस स्टेशन के सामने महिलाओं के कपड़े, एक हुक्का, खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाली तीन छोटी देगचियां, एक कटोरा और कुछ अन्य घरेलू सामान के चोरी होने का मामला सामने आया था. उस समय चोरी हुए इस सामान की कीमत करीब 45 आने आंकी गई थी.
आपको बता दें कि आज के दौर में जिस तरह हम किसी भी चीज की कीमत रुपए और पैसों में आंकते हैं, उस दौर में कीमत रुपए और आने में आंकी जाती थी. उस समय एक रुपए में कुल 16 आने आते थे. इस लिहाज से 45 आने के इस सामान की कीमत करीब 2 रुपए 81 पैसे बैठती है. इसी शिकायत ने राजधानी के पुलिस इतिहास में एक ऐसी जगह बनाई, जिसे आज भी इतिहास के तौर पर याद किया जाता है.
उर्दू और फारसी में लिखी गई थी पहली एफआईआर
रिकॉर्ड्स के अनुसार, इस मामले की शिकायत दर्ज कराने वाले शख्स का नाम मैउद्दीन था. वह दिल्ली के कटरा शीश महल इलाके में रहते थे. उस समय यह इलाका सब्जी मंडी पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आता था. दिल्ली की पहली एफआईआर आज इस्तेमाल होने वाले फॉर्म की तरह नहीं लिखी गई थी. उस समय प्रशासन, अदालतों और पुलिस के दस्तावेजों में उर्दू और फारसी का इस्तेमाल होता था. यही वजह है कि इस ऐतिहासिक एफआईआर का कुछ हिस्सा उर्दू में और कुछ हिस्सा फारसी में लिखा गया था.
राजधानी नहीं, बल्कि पंजाब प्रांत का हिस्सा थी दिल्ली
उस समय दिल्ली देश की राजधानी नहीं, बल्कि पंजाब प्रांत का हिस्सा थी. अंग्रेजों के शासन में पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था को व्यवस्थित करने की कोशिशें चल रही थीं. इन्हीं कोशिशों के तहत उस दौर में होने वाले अपराधों की शिकायत को लिखित रूप में दर्ज करने का फैसला किया गया था. इस फैसले को अमलीजामा पहनाने के लिए 18 अक्टूबर 1861 को सब्जी मंडी थाने के तौर पर दिल्ली के पहले थाने की स्थापना की गई थी. साथ ही, किस अपराध की शिकायत किस धारा के तहत दर्ज की जाएगी, इसके लिए भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 को भी लागू किया गया था.
आज ही हुआ था दस्यु सरगना वीरप्पन का अंत
दिल्ली की पहली एफआईआर के अलावा 18 अक्टूबर का इतिहास एक अन्य बड़े घटनाक्रम से जुड़ा हुआ है. 2004 में इसी तारीख को कुख्यात चंदन तस्कर और दस्यु सरगना वीरप्पन को सुरक्षा बलों ने एक मुठभेड़ में मार गिराया था. चंदन की तस्करी, हाथियों के शिकार सहित कई जघन्य आपराधिक मामलों के मामलों में वीरप्पन की तलाश तमिलनाडु के साथ कर्नाटक और केरल पुलिस कर रही थी. वीरप्पन को गिरफ्त में लेने के लिए कई वर्षों तक अभियान चलाए गए. आखिरकार 18 अक्टूबर 2004 को तमिलनाडु के स्पेशल टास्क फोर्स ने एक ऑपरेशन के दौरान उसे मार गिराया था..
