'परिवारों का संकट समझें', धरने-प्रदर्शनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा दिल्ली के 10 लाख कारोबारियों का दर्द

Supreme Court CJP Protest: सुप्रीम कोर्ट ने 16 अक्टूबर को दिल्ली किराना कमेटी तथा दिल्ली आयरन एंड हार्डवेयर मर्चेंट्स एसोसिएशन द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत दायर रिट याचिका पर सुनवाई की. याचिका में व्यापारियों की आजीविका की रक्षा करने तथा वर्तमान त्योहारी एवं विवाह सीजन के दौरान दिल्ली के प्रमुख व्यावसायिक बाजारों तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की गई है. याचिका अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई द्वारा दायर की गई और उन्होंने ही न्यायालय में व्यापारी संगठनों की तरफ़ से इसकी पैरवी की.

सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत ने छोटे दुकानदारों, फेरीवालों और स्टॉल संचालकों को हो रही कठिनाइयों को स्वीकार करते हुए कहा कि इन महत्वपूर्ण दिनों में ही वे अपनी आजीविका कमाते हैं और इस दौरान उनके परिवारों को कठिनाइयों, परेशानियों तथा संकट का सामना करना पड़ता है. याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने मामले की गंभीरता और तात्कालिकता को रेखांकित करते हुए न्यायालय को बताया कि प्रदर्शनों के कारण दिल्ली में प्रतिदिन ₹250 करोड़ से अधिक के व्यापारिक नुकसान का अनुमान है.

अधिवक्ता ने नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) द्वारा कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को बंद रखने संबंधी अधिसूचना का मुद्दा भी न्यायालय के समक्ष उठाया. उन्होंने तर्क दिया कि इस प्रतिबंध से क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियां प्रभावी रूप से ठप हो सकती हैं और श्रमिकों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है. वर्तमान त्योहारी सीजन को देखते हुए व्यावसायिक गतिविधियों पर पड़ने वाले इस असमानुपातिक प्रभाव को विशेष रूप से रेखांकित किया गया.

याचिका के मुख्य उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव सुमित अग्रवाल ने कहा कि याचिका का उद्देश्य शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकार को सीमित करना नहीं है. इसका उद्देश्य प्रदर्शन के अधिकार तथा व्यापारियों, श्रमिकों और आम जनता के आजीविका, व्यापार एवं आवागमन से जुड़े मौलिक अधिकारों के बीच एक उचित संतुलन स्थापित करना है.

याचिका में अक्टूबर 2026 से जनवरी 2027 तक की अवधि के दौरान यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है कि प्रदर्शन, जुलूस, धरने, बैठकों और सड़क अवरोधों के कारण चांदनी चौक, सदर बाजार, कनॉट प्लेस और खान मार्केट सहित प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में आने-जाने का मार्ग बाधित न हो. इसके अतिरिक्त, व्यावसायिक क्षेत्रों से दूर उपयुक्त प्रदर्शन स्थलों की पहचान कर उन्हें अधिसूचित करने, प्रदर्शनों के समय और तरीके का उचित नियमन करने तथा बाजारों तक निर्बाध पहुंच और सार्वजनिक परिवहन सुनिश्चित करते हुए प्रदर्शन के अधिकार के साथ संतुलन स्थापित करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने की मांग भी की गई है.

अग्रवाल ने आगे कहा कि दिल्ली में 10 लाख से अधिक व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं, जिनसे एक करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है. इसके अतिरिक्त, प्रतिदिन लगभग पांच लाख व्यापारी दूसरे राज्यों से कारोबार के सिलसिले में दिल्ली आते हैं. दिल्ली में प्रतिदिन ₹500–600 करोड़ के व्यापारिक कारोबार का अनुमान है. व्यापारिक संगठनों का आकलन है कि पुराने और नई दिल्ली के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में आवागमन एवं व्यापारिक गतिविधियों में व्यवधान के कारण प्रतिदिन लगभग ₹250 करोड़ का कारोबार प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो सकता है.

अग्रवाल ने कहा कि वर्ष के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समय में लगातार हो रहे व्यवधानों के कारण दिल्ली के व्यापारी गहरी चिंता, पीड़ा और मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं. ग्राहकों की आवाजाही में कमी, लगातार बढ़ती वित्तीय देनदारियों और त्योहारी सीजन में होने वाले अपूरणीय नुकसान की आशंका ने व्यापारियों में व्यापक बेचैनी पैदा कर दी है. इसका असर व्यापारियों, छोटे दुकानदारों, फेरीवालों और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ रहा है. कैट ने जोर देकर कहा कि व्यापारिक समुदाय, जो लाखों लोगों की आजीविका का आधार है और देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है, उसे विशेष रूप से त्योहारी एवं विवाह सीजन के दौरान शांतिपूर्ण और निर्बाध वातावरण में अपना कारोबार करने का अवसर मिलना चाहिए.

अग्रवाल ने कहा, “त्योहारी एवं विवाह सीजन व्यापारियों के लिए वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है. इन कुछ सप्ताहों में होने वाला व्यापारिक नुकसान बाद में आसानी से पूरा नहीं किया जा सकता, जबकि वेतन, किराया, ईएमआई और अन्य व्यावसायिक देनदारियां लगातार बनी रहती हैं. इसका प्रभाव केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कर्मचारियों, दिहाड़ी मजदूरों, फेरीवालों, परिवहनकर्ताओं, आपूर्तिकर्ताओं और देशभर से दिल्ली के बाजारों पर निर्भर व्यापारियों की आजीविका पर भी पड़ता है.”

कैट शीघ्र ही दिल्ली के विभिन्न व्यापारिक संगठनों की बैठक बुलाएगा, जिसमें इस महत्वपूर्ण विषय पर विचार-विमर्श कर व्यापारियों के हितों की रक्षा करने, व्यावसायिक बाजारों तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने तथा त्योहारी एवं विवाह सीजन के दौरान व्यापारिक गतिविधियों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित होने से बचाने के लिए एक समन्वित रणनीति तैयार की जाएगी. कैट ने आशा व्यक्त की कि सुनवाई के दौरान व्यापारियों की आजीविका से जुड़ी जिन चिंताओं पर ध्यान दिया गया है, उन पर उचित विचार किया जाएगा तथा आवश्यक निर्देशों के माध्यम से शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार का सम्मान करते हुए व्यापारियों की आजीविका की रक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी.

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