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Saurav Das-Ashutosh Ranka News: दिल्ली की अदालत ने जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को 50-50 हजार रुपये के मुचलके पर रिहा कर दिया. दोनों ने शांति बनाए रखने का लिखित आश्वासन दिया है.
आशुतोष रांका और सौरव दास ने कोर्ट की दिए शपथ पत्र में क्या कहा (फोटो: न्यूज 18)
नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली की अदालत से राहत मिल गई है. जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट के सामने लिखित आश्वासन दिया कि वे शांति भंग करने वाला कोई काम नहीं करेंगे. उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए यह भी कहा कि भविष्य में विरोध-प्रदर्शन संविधान और कानून के दायरे में रहकर ही किए जाएंगे.
दिल्ली पुलिस ने दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी. हालांकि, अदालत ने माना कि शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड और लिखित आश्वासन पर्याप्त हैं. फिलहाल दोनों को हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है. इसके बाद अदालत ने उनकी रिहाई का आदेश दे दिया.
‘मैं शांति भंग करने वाला कोई काम नहीं करूंगा…’, आशुतोष रांका ने क्या कहा?
आशुतोष रांका ने अदालत में दिए अपने लिखित आश्वासन में कहा कि वह शांति भंग करने वाला कोई भी काम नहीं करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें न्यायपालिका और उसके सभी भागों पर पूरा भरोसा है, जिसमें SEM कोर्ट भी शामिल है. रांका ने शांति, कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति बनाए रखने के प्रति अपनी बात दोहराई. उन्होंने खास तौर पर विश्वास दिलाया कि जब तक जंतर-मंतर को कानून के अनुसार विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल की मंजूरी नहीं मिलती है, तब तक वह वहां प्रदर्शन करने का कोई ऐलान नहीं करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में होने वाले सभी विरोध-प्रदर्शन संविधान के दायरे में रहकर किए जाएंगे.
सौरव दास ने भी कोर्ट को दिया यही भरोसा
CJP नेता सौरव दास ने भी अदालत में इसी तरह का लिखित आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि वह शांति भंग करने वाला कोई काम नहीं करेंगे और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है. दास ने भी शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात दोहराई. कोर्ट को दी उनकी गारंटी के अनुसार, जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन के संबंध में कानून का पालन किया जाएगा और भविष्य में कोई भी प्रदर्शन संविधान के दायरे से बाहर नहीं होगा. दोनों नेताओं की ओर से दिए गए लिखित आश्वासन को अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया गया है. इसका मतलब है कि उनके वादे न्यायिक रिकॉर्ड का हिस्सा रहेंगे.
दिल्ली पुलिस ने क्यों मांगी थी तीन दिन की अतिरिक्त हिरासत?
यह मामला जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है. पुलिस ने शांति भंग होने की आशंका के आधार पर दोनों नेताओं के खिलाफ एहतियातन कार्रवाई की थी. इस मामले में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था. बुधवार को उनकी हिरासत की अवधि समाप्त होने पर दिल्ली पुलिस ने इसे तीन दिन और बढ़ाने की मांग की. पुलिस की ओर से आशंका जताई गई थी कि रिहा होने पर शांति-व्यवस्था से जुड़ी स्थिति दोबारा पैदा हो सकती है. हालांकि, सुनवाई के दौरान दोनों नेताओं ने लिखित आश्वासन दिया कि वे शांति भंग नहीं करेंगे और कानून का पालन करेंगे. अदालत ने इन आश्वासनों और शांति बनाए रखने के लिए दिए जाने वाले बॉन्ड पर विचार किया. इसके बाद हिरासत बढ़ाने की मांग स्वीकार नहीं की गई.
50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहाई
अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रंका को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानतदार देने का निर्देश दिया. रिहाई से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों के लिए रिहाई वारंट जारी किया गया. इस तरह दोनों नेताओं को जेल से बाहर आने का रास्ता मिल गया. अदालत के सामने दिए गए लिखित आश्वासन और शांति बनाए रखने के बांड इस मामले में अहम रहे.
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर क्या है शर्त?
दोनों नेताओं ने अपने लिखित आश्वासन में स्पष्ट किया कि वे जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन के लिए आह्वान नहीं करेंगे, जब तक वहां प्रदर्शन स्थल की अधिसूचना कानून के अनुसार समाप्त नहीं कर दी जाती. उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में विरोध-प्रदर्शन संविधान के दायरे में ही होंगे.
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अरुण बिंजोला वर्तमान में News18 हिंदी में एसोसिएट एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में वह करीब 19 वर्षों से काम कर रहे हैं, जिसमें 13 वर्षों से अधिक समय डिजिटल मीडिया में बी…
