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Tihar Foreign Prisoners Record: दिल्ली की तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जेलों में विदेशी कैदियों की संख्या बढ़कर 766 हो गई है, जिनमें से 94% यानी 721 विचाराधीन कैदी हैं. आरटीआई के आंकड़ों के मुताबिक, सजायाफ्ता विदेशी कैदियों में पाकिस्तान के नागरिकों की संख्या सबसे ज्यादा है, जबकि नाइजीरियाई नागरिक कुल विदेशी कैदियों का लगभग आधा हिस्सा यानी 361 हैं. वहीं, बांग्लादेश के 11 नागरिक भी इन जेलों में बंद हैं.
तिहाड़ का सच सामने आ गया है. (प्रतिकात्मक तस्वीर)
दिल्ली की तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जेलों का एक बड़ा सीक्रेट बाहर आया है. एक RTI रिपोर्ट ने तिहाड़ की सलाखों के पीछे छुपा हुआ एक बहुत बड़ा सस्पेंस खोल दिया है. आखिर किस देश के कैदियों से पटी हुई है दिल्ली की हाई-सिक्योरिटी जेलें? आपको लग रहा होगा पाकिस्तान या बांग्लादेश जैसे देशों की संख्या यहां सबसे ज्यादा है. जब आंकड़े सामने आए तो अधिकारी भी शॉक रह गए. कुल 766 विदेशी कैदी अंदर बंद हैं, लेकिन ट्विस्ट यह है कि इनमें से 94% यानी 721 कैदी तो सिर्फ कोर्ट की तारीखों का इंतजार कर रहे हैं. अगर बात सजायाफ्ता कैदियों की हो, तो पाकिस्तान के नागरिकों का दबदबा सबसे ऊपर है, तो वहीं नाइजीरियाई गैंग्स ने संख्या के मामले में पूरी जेल पर कब्जा जमा रखा है. आइए देखते हैं कि इस हाई-वोल्टेज जेल ड्रामा का पूरा हिसाब-किताब क्या है.
आंकड़े चीख-चीख कर कह रहे हैं कि दिल्ली की इन जेलों में कुल 766 विदेशी नागरिक बंद हैं. आज तक न्यूज चैनल की इस आरटीआई के मुताबिक सबसे बड़ा शॉकिंग ट्विस्ट यह है कि इनमें से 721 यानी करीब 94 फीसदी कैदी ऐसे हैं जो सिर्फ विचाराधीन (Under-trial) हैं. यानी जिनका ट्रायल अभी कोर्ट में लटका हुआ है और फैसला आना बाकी है. सजा सिर्फ 37 लोगों को ही सुनाई गई है, बाकी या तो हिरासत में हैं या दूसरी श्रेणियों में आते हैं. यानी जेलें भरी तो हैं, पर इंसाफ की फाइलें धूल फांक रही हैं.
पाकिस्तान का दबदबा और नाइजीरियाई नागरिकों का भौकाल
अब बात करते हैं देशों की, कि किसका सिक्का कहां चल रहा है. जब बात सजायाफ्ता (Convicted) विदेशी कैदियों की आती है, तो पाकिस्तान के नागरिकों की संख्या सबसे ऊपर है. दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक, सजा पाने वालों में 12 पाकिस्तानी और 3 बांग्लादेशी नागरिक शामिल थे. इतना ही नहीं, प्रशासनिक या निवारक आदेशों के तहत हिरासत में रखे गए सातों के सातों विदेशी नागरिक सिर्फ पाकिस्तान के ही थे.
दूसरी तरफ, अगर कुल संख्या की बात करें तो नाइजीरिया के नागरिकों ने सबको पीछे छोड़ दिया है! दिल्ली की जेलों में अकेले नाइजीरिया के 361 नागरिक बंद हैं, जो कुल विदेशी कैदियों का लगभग आधा हिस्सा हैं. नाइजीरियाई कैदियों की यह संख्या बांग्लादेशियों से करीब 33 गुना ज्यादा है. वहीं, बांग्लादेश के कुल 11 नागरिक जेल में बंद मिले, जिनमें से 8 विचाराधीन और 3 सजायाफ्ता हैं.
पांच साल में रिकॉर्ड तोड़ उछाल
यह पूरा खेल सिर्फ आज का नहीं है, बल्कि पिछले पांच सालों में ग्राफ रॉकेट की तरह ऊपर गया है. साल 2021 में जहां दिल्ली की जेलों में 659 विदेशी कैदी थे, वहीं दिसंबर 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 718 हुआ और 31 अगस्त 2026 तक पहुंचते-पहुंचते यह सीधे 766 के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया. घुसपैठ और राजनीतिक बहसों के बीच इन आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि दिल्ली की सलाखों के पीछे विदेशी अपराधियों का एक अलग ही संसार बस रहा है, जहाँ हर देश का अपना अलग ही ‘किस्सा’ चल रहा है.
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पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…
