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दिल्ली में 1 नवंबर से सर्दियों के प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए कई नए नियम लागू हो गए हैं. राजधानी में बाहर से आने वाली बीएस-VI से कम मानक वाली गाड़ियों पर रोक रहेगी. निर्माण और तोड़फोड़ के काम सीमित होंगे. सरकारी और निजी दफ्तरों में 50 फीसदी वर्क फ्रॉम होम लागू होगा. पार्किंग फीस दोगुनी की जाएगी और पेट्रोल पंपों पर वैध पीयूसी प्रमाणपत्र जरूरी होगा. एआई सिस्टम और कैमरों से नियम तोड़ने वालों पर नजर रखी जाएगी. वहीं 1 नवंबर की सुबह दिल्ली का AQI करीब 150-160 के आसपास बताया गया. जानिए किन इलाकों में हवा ज्यादा खराब है और नए नियमों का उल्लंघन करने पर क्या कार्रवाई होगी.
दिल्ली में 1 नवंबर से पुरानी बाहरी गाड़ियों की एंट्री पर रोक और निर्माण गतिविधियों पर पाबंदी लागू. (फोटो NW18)
दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही हवा की गुणवत्ता (AQI) बिगड़ने लगी है. सुबह की धुंध और आसमान में छाई धुंधली परत के बीच अब सरकार ने प्रदूषण फैलाने वालों पर सख्ती शुरू कर दी है. 1 नवंबर यानी आज से राजधानी में विंटर पॉल्यूशन एक्शन प्लान के तहत कई नए प्रतिबंध लागू हो गए हैं. अब दिल्ली के बाहर से आने वाली पुरानी गाड़ियों की एंट्री पर रोक रहेगी. निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर पाबंदी लगेगी. सरकारी और निजी दफ्तरों में भी 50 फीसदी कर्मचारियों को ही ऑफिस बुलाया जा सकेगा. पार्किंग फीस दोगुनी होगी और नियम तोड़ने वालों पर चालान से लेकर गाड़ी जब्त करने तक की कार्रवाई हो सकती है. यानी अब दिल्ली में प्रदूषण पर सिर्फ अपील नहीं होगी बल्कि सड़कों से लेकर निर्माण स्थलों तक सख्त निगरानी रखी जाएगी.
दिल्ली सरकार ने इस बार प्रदूषण से निपटने के लिए निगरानी और कार्रवाई का पूरा तंत्र तैयार किया है. इसके लिए विशेष एनफोर्समेंट टीमें तैनात की जा रही हैं. एएनपीआर कैमरों और एआई आधारित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से प्रतिबंधित गाड़ियों की पहचान और नियमों के पालन पर नजर रखी जाएगी. उधर 1 नवंबर की सुबह उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली का औसत एक्यूआई करीब 150 से 160 के आसपास बताया गया है. हालांकि अलग-अलग इलाकों में स्थिति काफी अलग है. जहांगीरपुरी और रोहिणी जैसे इलाकों में यह 230 से 250 या उससे ऊपर पहुंचने का अनुमान है. ऐसे में सवाल है कि नए नियम क्या हैं और 24 घंटे में दिल्ली की हवा कितनी बदली?
दिल्ली में प्रतिबंधों के कारण हरियाणा के झज्जर और सोनीपत में भी पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी है. (NW18)
सरकार ने 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक कई प्रतिबंध लागू किए हैं. इनका मकसद वाहनों और निर्माण गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण को कम करना है. प्रमुख नियम इस तरह हैं:
सरकारी और निजी दोनों तरह के दफ्तरों में 1 नवंबर से 31 जनवरी तक अधिकतम 50 फीसदी कर्मचारियों को ही फिजिकल अटेंडेंस की अनुमति होगी. बाकी कर्मचारियों के लिए घर से काम करने की व्यवस्था लागू करनी होगी. इससे रोजाना सड़कों पर वाहनों की संख्या कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
दिल्ली में 1 नवंबर से 28 फरवरी तक अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क दोगुना किया जाएगा. दिल्ली मेट्रो की पार्किंग को इस नियम से छूट दी गई है. सरकार का मकसद निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करना और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है.
दिल्ली के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी उन्हीं वाहनों को दिया जाएगा जिनके पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी पीयूसीसी होगा. बिना वैध प्रमाणपत्र के ईंधन नहीं मिलेगा.
दिल्ली सरकार इस बार नियम लागू कराने के लिए तकनीक का सहारा भी ले रही है.
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