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जंग के मैदान में गोलियां और बारूदी सुरंगों के धमाके झेले. शरीर पर गहरे जख्म आए, किसी ने पैर गंवाया तो किसी ने जिंदगी का एक हिस्सा ही बदलते हुए देखा. लेकिन इन जवानों ने हार मानने से इनकार कर दिया. वर्दी में देश की रक्षा करने वाले इन जांबाजों ने चोट को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि उसी दर्द को अपनी ताकत बना लिया. एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय सेना के 9 पैरा एथलीट मैदान में उतरे और इनमें से 6 ने भारत के लिए 6 मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. इन मेडल्स में 1 गोल्ड, 2 सिल्वर और 3 ब्रॉन्ज शामिल हैं. 5 नवंबर को दिल्ली में सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने इन जांबाज खिलाड़ियों को सम्मानित किया है.
इनकी कहानी सिर्फ मेडल जीतने की नहीं है. यह उन सैनिकों की कहानी है, जिन्होंने जंग में घायल होने के बाद भी जिंदगी से जंग जीत ली. जिनके शरीर पर चोट के निशान हैं, लेकिन हौसले में आज भी कोई कमी नहीं आई.
1. सूबेदार सोलैराज डी: इन जांबाजों में सबसे खास नाम सूबेदार सोलैराज डी का है. 2018 में कारगिल में घायल होने के बाद उन्हें लंबी रिकवरी से गुजरना पड़ा. लेकिन चोट ने उनके हौसले को नहीं तोड़ा. उन्होंने लॉन्ग जंप में लगातार दूसरी बार एशियन पैरा गेम्स का गोल्ड मेडल अपने नाम किया. इतना ही नहीं, 7.15 मीटर की छलांग लगाकर उन्होंने एशियन रिकॉर्ड भी बना दिया.
2. सूबेदार एच होकाटो सेमा: सूबेदार एच होकाटो सेमा की कहानी किसी किसी रियल होरो वाली है. 2002 में कश्मीर के चौकीबल में बारूदी सुरंग के धमाके में उन्होंने अपना बायां पैर गंवा दिया था. लेकिन उन्होंने खुद को उस हादसे तक सीमित नहीं होने दिया. शॉट पुट में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता. इससे पहले वह 2024 पेरिस पैरालंपिक में भी ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके हैं. वह नागालैंड के पहले खिलाड़ी हैं, जिन्होंने पैरालंपिक मेडल जीता है. एक पैर खोने के बाद भी उन्होंने खेल के मैदान में ऐसी वापसी की, जो हजारों लोगों के लिए मिसाल बन गए.
3. सूबेदार अजय कुमार: 2017 में उरी में बारूदी सुरंग के धमाके में सूबेदार अजय कुमार घायल हुए थे. लेकिन चोट के बाद भी उन्होंने दौड़ना नहीं छोड़ा. एशियन पैरा गेम्स में 400 मीटर दौड़ में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर साबित कर दिया कि शरीर की चोट इंसान के इरादे को नहीं रोक सकती.
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4. हवलदार कपिल कुमार: हवलदार कपिल कुमार 2020 में पुंछ में घायल हुए थे. मुश्किल वक्त आया, इलाज हुआ और फिर उन्होंने खेल के मैदान में वापसी की. 400 मीटर फ्रीस्टाइल स्विमिंग में उन्होंने सिल्वर मेडल जीतकर अपनी मेहनत और हिम्मत का दम दिखा दिया.
5. हवलदार प्रदीप कुमार: 2019 में सुंदरबनी में हुए धमाके में हवलदार प्रदीप कुमार ने अपने बाएं पैर का हिस्सा गंवा दिया था. लेकिन उन्होंने अपने सपनों को अधूरा नहीं छोड़ा. एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने डिस्कस थ्रो में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर बता दिया कि शरीर का कोई हिस्सा कम हो सकता है, लेकिन हौसला कम नहीं होना चाहिए.
6. हवलदार राकेश कुंडू: हवलदार राकेश कुंडू के सामने भी चोट और लंबे इलाज की चुनौती थी. लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय वापसी का रास्ता चुना. मेहनत और लगातार तैयारी के बाद उन्होंने डिस्कस थ्रो में सिल्वर मेडल अपने नाम किया. उनकी जीत बताती है कि असली खिलाड़ी वही है, जो गिरने के बाद फिर खड़ा होना जानता है.
