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दिल्ली-एनसीआर में घर खरीदने का सपना हर कोई देखता है. रोजी-रोटी की तलाश में देश के दूसरे राज्यों से आए कामगार-नौकरी पेशा लोग यहां पर घर खरीदते हैं. नई कॉलोनी में आसान किश्तों में घर लेते हैं. सोसायटी में फ्लैट लेते हैं. नोएडा-गाजियाबाद में गांवों के आसपास नई कॉलोनियां बसी हुई हैं, उनमें घर खरीदते हैं, प्लॉट लेते हैं. यह भी सच है कि नोएडा-गाजियाबाद में सबसे ज्यादा अवैध कॉलोनियां हैं. जीडीए तो 351 से अधिक अवैध कॉलोनियां चिह्नित कर चुका है. आइये जानते हैं कि कोई कॉलोनी वैध है या अवैध कैसे जानें, अगर प्लॉट अवैध कॉलोनी में है तो उसका नक्शा कैसे पास कराएं.
दिवाली के समय प्लॉट-फ्लैट की खरीदारी-बुकिंग सबसे शुभ मानी जाती है. इस दौरान कई बिल्डर आसान किश्तों में घर-फ्लैट या प्लॉट खरीदने का ऑफर देते हैं. बैंक लोन मेला लगाते हैं. अथॉरिटी नई हाउसिंग स्कीम लॉन्च करती हैं. नई सोसाइटी में बुकिंग शुरू होती है. नोएडा-गाजियाबाद में घर का सपना तो हर कोई देखता है. यह भी सच है कि इन्हीं दो शहरों में सबसे ज्यादा अवैध कॉलोनियां हैं. गाजियाबाद में तो 300 से ज्यादा अवैध कॉलोनियां हैं. लोनी, मुरादनगर, मोदीनगर, और हिंडन नदी के किनारे सबसे ज्यादा अवैध बसाहट है. आपकी कॉलोनी वैध है या अवैध, आसान तरीके से जान सकते हैं.
‘कब तक किराया देते रहेंगे, मकान मालिक बनिए’, ‘आसान किश्तों में प्लॉट’, ‘जड़ से मकान’, ‘सिर्फ 5 लाख के डाउनपेमेंट पर मकान’….इस तरह के होर्डिंग-बैनर आपने नोएडा-गाजियाबाद में गली-चौराहों पर जरूर देखे होगें. कैसे पहचाने कि नोएडा-गाजियाबाद में जिस कॉलोनी में आ रह रहे हैं, वो वैध है या अवैध. अगर प्लॉट अवैध कॉलोनी में स्थित है तो नक्शा कैसे पास होगा? कोई भी प्रॉपर्टी अवैध क्यों होती, बिल्डिंग का नक्शा कैसे पास होता है और इसके क्या नियम हैं , इन सवालों को जाने बिना दिल्ली-एनसीआर में घर लेना मुसीबत मोल लेने जैसा है. ऐसी जगह पर प्लॉट या मकान लेने पर आपका पैसा डूब सकता है.
नोएडा-गाजियबाद में अच्छी बसाहट वाली कई कॉलोनियां अवैध हैं, यह फैक्ट किसी से छुपा नहीं है. अगर आप नोएडा-गाजियबाद या फरीदाबाद में किसी कॉलोनी में मकान या प्लॉट खरीदने जा रहे हैं तो यह खबर आपके लिए है. मकान या प्लॉट खरीदने से पहले यूपी आवास-विकास परिषद, अथॉरिटी या हाउसिंग बोर्ड में जरूर जाएं. कॉलोनी की वैधता के बारे में जान लें. ठीक वैसे ही जैसे कोई नई गाड़ी खरीदने के लिए आप किसी एजेंसी में जाते हैं. अगर सेकंड हैंड गाड़ी खरीदते हैं तो गाड़ी मालिक से पक्के कागज-आरसी मांगते हैं, ठीक इसी तरह बिल्डर से कॉलोनी के अप्रूवल लेटर की कॉपी जरूर मांगे. बिल्डर से लेआउट पास किए जाने का परमिट नंबर जानें. इसी परमिट लेटर (अनुज्ञा पत्र) में कॉलोनी कितने एरिया में है, पार्क कहां है, सबकुछ दर्ज होता है. रेरा रजिस्ट्रेशन नंबर भी मांग सकते हैं. इन्हीं कागजों से तय हो जाता है कि कॉलोनी लीगल है या नहीं.
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ये तीन चीजें पास ले आउट, अनुज्ञा पत्र और रेरा नंबर ही किसी कॉलोनी की वैधता को तय करती हैं. अथॉरिटी की ओर से इन तीनों की कॉपी बिल्डर को दी जाती है, ताकि वो ग्राहकों को दिखा सकें. अगर बिल्डर इन्हें दिखाने में आनाकानी करे, या दिखाने से इनकार करे, या कहे कि उसके पास सभी जरूरी कागज हैं लेकिन दिखाना नहीं चाहता तो आप यह जांच करें कि कॉलोनी की किसी भी सड़क की चौड़ाई 9 मीटर या 30 फीट से कम तो नहीं है. कॉलोनी के अंदर की सड़कें अगर 15, 20 या 25 फीट की हैं तो नक्शा पास नहीं होता. पहली नजर में कॉलोनी अवैध प्रतीत होगी. कॉलोनी में ग्रीन एरिया (पार्क) के लिए जगह नहीं छोड़ी गई तो भी आप समझ सकते हैं कि कॉलोनी अवैध है. ऐसे में आप यह निर्णय आसानी से ले सकेंगे कि वहां पर प्लॉट खरीदें या न खरीदें.
गाजियाबाद में 300 से ज्यादा कॉलोनियां अवैध है. इसकी लिस्ट गाजियाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी की वेबसाइट पर उपलब्ध है. आप इस लिंक पर जाकर https://gdaghaziabad.in/list-of-unauthorized-colonies/ अवैध कॉलोनियों की लिस्ट भी चेक कर सकते हैं. इसी तरह नोएडा अथॉरिटी की साइट पर भी अवैध कंस्ट्रक्शन की लिस्ट मौजूद है. अब सवाल आता है कि अगर आपने गलती से किसी अवैध कॉलोनी में घर या प्लॉट ले लिया है तो उसका नक्शा कैसे पास होगा. इसका सीधा सा जवाब है कि ऐसा होना मुश्किल है. दरअसल, कॉलोनी का एरिया किसी भू-स्वामी का होता है, वही उस पर कॉलोनी काटता है. रोड के लिए जगह छोड़ता है. यानी एक ही खसरा नंबर पर कई खरीदारों के नाम जुड़ जाते हैं. जहां पर सड़क होती है, उन पर स्वामित्व मालिक का ही होता है, इसलिए ऐसी जगह पर निगम पक्के सड़क नहीं बनाता. न ही ऐसे कॉलोनी के मकान का नक्शा पास होता.
