नई दिल्ली: नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा के गलियारे बुधवार को उस समय तीखे प्रहारों और फिल्मी उपमाओं से गूंज उठे, जब पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के ‘शीशमहल’ पर आई CAG रिपोर्ट पर चर्चा शुरू हुई. लोक लेखा समिति के निष्कर्षों को ढाल बनाकर कैबिनेट मंत्री परवेश वर्मा ने पूर्व सीएम पर सीधा हमला बोला और उनकी तुलना फिल्म ‘धुरंधर’ के विलेन ‘रहमान डकैत’ से कर दी. वर्मा ने आरोप लगाया कि जिस अहंकार में यह विलासिता पूर्ण महल खड़ा किया गया था उसे दिल्ली की ‘धुरंधर’ जनता ने मिट्टी में मिला दिया है. भ्रष्टाचार के इस ‘शीशमहल’ की फाइलों को खोलते हुए वर्मा ने न केवल फिजूलखर्ची का कच्चा चिट्ठा पेश किया बल्कि ‘शीशमहल पार्ट-2’ के उस काले अध्याय से भी पर्दा उठाया, जिस पर पर्दे के पीछे करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे थे.
पीडब्ल्यूडी मंत्री परवेश वर्मा ने अरविंद केजरीवाल के पूर्व सरकारी आवास के रेनोवेशन पर आई कैग (CAG) रिपोर्ट का हवाला देते हुए आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला बोला है. वर्मा ने सदन में विरोध के अनोखे तरीके के तहत खर्चों की एक लंबी फेहरिस्त वाला ‘रोल’ सभी विधायकों को थमाया जिसमें करोड़ों रुपये के फर्नीचर और साजो-सामान का विवरण दर्ज था.
कोविड की त्रासदी बनाम महल की विलासिता
परवेश वर्मा ने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि जब 2020 में दिल्ली की जनता कोरोना जैसी भीषण महामारी से जूझ रही थी तब मुख्यमंत्री आवास में विलासिता का इंतजाम किया जा रहा था. उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली उस समय दो आपदाओं से लड़ रही थी. एक कोविड और दूसरी आम आदमी पार्टी की सरकार.
वर्मा के अनुसार, जहां अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन के लिए मोस्ट अर्जेंट (सबसे जरूरी) लिखने की जरूरत थी, वहां फाइलों पर यह शब्द केवल ‘शीशमहल’ के निर्माण के लिए इस्तेमाल किया गया. उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा दिए गए 787.91 करोड़ रुपये के फंड का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार ने इसमें से पूरा पैसा खर्च नहीं किया जिससे 26,000 लोगों की जान बचाई जा सकती थी.
बेड से लेकर टॉयलेट सीट तक के दाम
विधानसभा में पेश किए गए ‘खर्चों के रोल’ में परवेश वर्मा ने हैरान करने वाले आंकड़े साझा किए:
· बेड और अलमारी: 40 लाख रुपये का बेड और 28 लाख रुपये की अलमारी.
· बैठने का इंतजाम: 60 लाख रुपये की कुर्सियां और 1.5 करोड़ रुपये की डाइनिंग टेबल.
· पर्दे और कारपेट: 1.5 करोड़ रुपये के पर्दे और 60 लाख रुपये के कारपेट.
· फिटनेस और मनोरंजन: 14 लाख रुपये की ट्रेडमिल और 28.51 लाख रुपये का 88 इंच का टीवी.
· टॉयलेट सीट: 5 लाख रुपये की एक टॉयलेट सीट.
वर्मा ने तंज कसते हुए कहा, “घर में केवल पांच लोग थे लेकिन डाइनिंग टेबल 28 लोगों के बैठने वाली लगाई गई.” उन्होंने आरोप लगाया कि यह जनता की गाढ़ी कमाई का खुला अपमान है.
‘शीशमहल पार्ट-2’ का भी हुआ खुलासा
परवेश वर्मा ने दावा किया कि जो हमने देखा वह सिर्फ शुरुआत थी; ‘शीशमहल पार्ट-2’ का निर्माण भी चोरी-छिपे चल रहा था. लगभग 4000 गज में फैला यह नया ढांचा 25 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा था. उन्होंने आरोप लगाया कि इसके लिए हेरिटेज बंगले तोड़े गए, स्टाफ क्वार्टर और गैराज ढहा दिए गए और बिना अनुमति के दर्जनों पेड़ों की बलि दी गई.
शहीद कांस्टेबल का जिक्र और राजनीतिक प्रहार
हमले को धार देते हुए वर्मा ने दिल्ली पुलिस के शहीद कांस्टेबल अमित कुमार का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि कोविड काल में जान गंवाने वाले इस जवान को एक करोड़ रुपये की सम्मान राशि इसलिए नहीं दी गई क्योंकि वह वोट बैंक नहीं था, जिसके लिए बाद में कोर्ट का सहारा लेना पड़ा. परवेश वर्मा ने हाल ही में रिलीज हुई फिल्म धुरंधर का उदाहरण देते हुए केजरीवाल की तुलना फिल्म के नकारात्मक पात्रों से की और कहा कि दिल्ली की जनता ने अब उन्हें घर बैठाने का मन बना लिया है.
सवाल-जवाब
परवेश वर्मा ने ‘मोस्ट अर्जेंट’ शब्द को लेकर क्या आरोप लगाया?
वर्मा ने आरोप लगाया कि कोविड महामारी के दौरान जब अस्पतालों और स्वास्थ्य सुविधाओं की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब सरकार ने उन फाइलों पर ‘मोस्ट अर्जेंट’ नहीं लिखा, बल्कि मुख्यमंत्री के आवास (शीशमहल) के निर्माण की फाइलों पर इसे दर्ज किया गया.
‘शीशमहल’ के निर्माण के दौरान किन नियमों के उल्लंघन का दावा किया गया है?
भाजपा नेता ने दावा किया कि निर्माण के लिए हेरिटेज बंगलों और स्टाफ क्वार्टर को तोड़ा गया, साथ ही बिना पर्यावरण विभाग की अनुमति के बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए.
केंद्र सरकार द्वारा दिए गए कोविड फंड को लेकर क्या आंकड़ा पेश किया गया?
वर्मा के अनुसार, केंद्र ने दिल्ली को 787.91 करोड़ रुपये दिए थे, लेकिन दिल्ली सरकार ने केवल 582 करोड़ रुपये ही खर्च किए, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में कमी रह गई.
