550 साल पुराना देवी मंदिर…जहां घने जंगल में प्रकट हुई थीं मां, नवरात्रों में लगता है भव्य मेला, जानिए मान्यता

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Chitra Navratri 2026: गाजियाबाद के दिल्ली गेट स्थित बाला त्रिपुर सुंदरी चतुर्भुजी देवी मंदिर 550 साल पुराना सिद्धपीठ है. मान्यता है कि यहां मां बाला सुंदरी बाल रूप में प्रकट हुई थीं। जूना अखाड़े से जुड़े इस मंदिर में हर मनोकामना पूरी होती है. नवरात्रों में यहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं. दूधेश्वरनाथ समेत अन्य मंदिरों के साथ यह शहर की रक्षा का प्रतीक भी माना जाता है.

गाजियाबाद के दिल्ली गेट स्थित प्राचीन बाला त्रिपुर सुंदरी चतुर्भुजी देवी मंदिर करीब 550 साल से भी अधिक पुराना सिद्धपीठ माना जाता है. मान्यता है कि जहां आज मंदिर स्थित है . वहां कभी घना जंगल हुआ करता था. इसी स्थान पर मां बाला सुंदरी के प्रकट होने की जनश्रुति है जिसके बाद स्थानीय लोगों ने यहां मंदिर की स्थापना की. समय के साथ यह स्थल आस्था का बड़ा केंद्र बन गया। आज भी हजारों श्रद्धालु यहां आकर मां के दर्शन करते हैं और इसे चमत्कारी धाम मानते हैं.

इस मंदिर की सबसे खास बात यहां विराजमान मां बाला त्रिपुर सुंदरी का बाल रूप और चतुर्भुजी स्वरूप है। चार भुजाओं वाली मां को शक्ति, संरक्षण और कृपा का प्रतीक माना जाता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाल रूप में विराजमान मां अपने भक्तों की मनोकामनाएं जल्दी सुनती हैं. मंदिर में बाला सुंदरी देवी के साथ संतोषी मां, मीनाक्षी देवी, कादंबरी देवी और बड़ी माता सहित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं जिससे यह स्थल पूर्ण आस्था केंद्र बन जाता है.

दिल्ली गेट का यह प्राचीन मंदिर श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा से जुड़ा हुआ है जो इसकी धार्मिक परंपरा को और मजबूत बनाता है. मंदिर का संचालन परंपरागत महंतों के माध्यम से होता है और वर्तमान में इसके 16वें महंत गिरीशानंद इसकी देखरेख कर रहे हैं. अखाड़ा परंपरा के अनुसार यहां पूजा-पाठ और अनुष्ठानों की विशेष विधि अपनाई जाती है, जो इस मंदिर को साधु-संतों और श्रद्धालुओं के लिए एक प्रतिष्ठित धाम बनाती है.

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इस मंदिर को लेकर सबसे बड़ी मान्यता यह है कि यहां आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता. विशेष रूप से संतान प्राप्ति के लिए यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं. माना जाता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना मां बाला सुंदरी जरूर पूरी करती हैं। यही कारण है कि श्रद्धालु अपनी इच्छा पूरी होने पर दोबारा यहां आकर धन्यवाद स्वरूप पूजा करते हैं। मंदिर की यह मान्यता दूर-दराज तक प्रसिद्ध है.

चैत्र और अश्विन नवरात्रों के दौरान इस मंदिर की आस्था अपने चरम पर पहुंच जाती है। नौ दिनों तक यहां विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और विशाल हवन-महायज्ञ का आयोजन होता है. मंदिर परिसर में मेले जैसा माहौल बन जाता है और हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. उत्तर भारत ही नहीं बल्कि भोपाल, जबलपुर, झांसी, ग्वालियर और एनसीआर से भी बड़ी संख्या में भक्त यहां आते हैं. इस दौरान मंदिर पूरी तरह भक्ति और ऊर्जा से भर जाता है.

दिल्ली गेट स्थित यह देवी मंदिर गाजियाबाद की धार्मिक पहचान का अहम हिस्सा है. मान्यता है कि जैसे काशी में भगवान विश्वनाथ के साथ अन्य देवस्थल शहर की रक्षा करते हैं उसी तरह गाजियाबाद में दूधेश्वरनाथ महादेव, काल भैरव, चौपला हनुमान मंदिर और दिल्ली गेट देवी मंदिर मिलकर पूरे शहर की रक्षा करते हैं. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां बाला सुंदरी की कृपा से शहर सुरक्षित रहता है और भक्तों पर कोई बड़ा संकट नहीं आता.

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