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Siemens Energy Micro Substation: सीमेंस एनर्जी का माइक्रो सबस्टेशन हाई वोल्टेज को सीधे लो वोल्टेज में बदलकर गांव और शहरों में सस्ती सुरक्षित और स्थिर बिजली सप्लाई देगा. गांव और शहरी क्षेत्रों के लिए कॉम्पैक्ट, मॉड्यूलर और टिकाऊ बिजली समाधान है. इसके जरिए हाई वोल्टेज को सीधे कम वोल्टेज में बदला भी जा सकता है.
नई दिल्ली : भारत में बिजली की सप्लाई जल्द ही और भी ज्यादा मजबूत होने जा रही है. आसानी से हाई-वोल्टेज को लो- वोल्टेज में बदलने की योजना शुरू की जा चुकी है. यह जानकारी सीमेंस एनर्जी के माइक्रो सबस्टेशन के हेड संजय और कंपनी के सदस्य अनुज पांडेय ने दी है. जो कि देश की राजधानी दिल्ली के द्वारका सेक्टर-25 में स्थित यशोभूमि में आयोजित भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट में शामिल होने आए थे. इस दौरान कंपनी के सदस्य अनुज पांडेय और संजय ने बताया कि सीमेंस एनर्जी ने माइक्रो सबस्टेशन तैयार किया है. जो कि गांव और शहरी क्षेत्रों के लिए कॉम्पैक्ट, मॉड्यूलर और टिकाऊ बिजली समाधान है. इसके जरिए हाई वोल्टेज को सीधे कम वोल्टेज में बदला जा सकता है. जो ग्रामीण विद्युतीकरण, ईवी चार्जिंग और डेटा केंद्रों के लिए वरदान साबित होगी.
जानें क्या है माइक्रो सबस्टेशन
कंपनी के सदस्य अनुज पांडेय और संजय ने बताया कि माइक्रो सबस्टेशन क्या है? यह जानना बेहद जरूरी है. क्योंकि इसमें आने वाले समय में नए भारत की झलक देखने को मिलेगी. ये सबस्टेशन कम जगह लेते हैं और इन्हें आसानी से स्थापित किया जा सकता है. ये पारंपरिक ट्रांसफॉर्मर की जरूरत को खत्म करते हुए सीधे हाई वोल्टेज ग्रिड से कम वोल्टेज में बिजली को बदल सकते हैं. उन्होंने बताया कि माइक्रो सबस्टेशन एक छोटा पावर स्टेशन जैसा होता है, जो हाई वोल्टेज बिजली को लो वोल्टेज में बदलता है. आसपास के घरों, ऑफिस, फैक्ट्री या कॉलोनी को बिजली देता है. कम जगह में आसानी से लगाया जा सकता है.
जानें माइक्रो सबस्टेशन की खासियत
इस कंपनी के सदस्य अनुज पांडेय और संजय ने बताया कि माइक्रो सबस्टेशन की खासियत यह है कि इसकी कॉम्पैक्ट डिजाइन है. यानी छोटे आकार में पूरा सिस्टम लगाया जा सकता है. यह पूरी तरह कवर और सुरक्षित है. शहरी इलाकों के लिए बेस्ट है. क्योंकि जहां जगह कम होती है. वहां भी इसे लगाया जा सकता है. इसको बार-बार देखभाल की जरूरत नहीं होती. यह पर्यावरण के अनुकूल भी है. क्योंकि कम शोर और सुरक्षित तकनीक है.
इसका इस्तेमाल रेजिडेंशियल सोसाइटी, मॉल और ऑफिस, इंडस्ट्रियल एरिया, मेट्रो, रेलवे प्रोजेक्ट में किया जा सकता है. जैसे किसी नई सोसाइटी में बिजली पहुंचानी है, लेकिन बड़ा सबस्टेशन लगाने की जगह नहीं है. वहां माइक्रो सबस्टेशन लगाया जाता है. इस माइक्रो सबस्टेशन से भारत को कई बड़े फायदे मिल सकते हैं, खासकर तेजी से बढ़ते शहरों और बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए इससे बिजली की बेहतर सप्लाई होगी. माइक्रो सबस्टेशन से पावर लॉस यानी बिजली की बर्बादी कम होगी. लोगों को ज्यादा स्थिर और लगातार बिजली मिलेगी.
उन्होंने बताया कि भारत में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में कम जगह में लगने के कारण ये भीड़भाड़ वाले शहरों जैसे दिल्ली एनसीआर में बहुत उपयोगी है. बड़े सबस्टेशन के मुकाबले कम खर्च और जल्दी इंस्टॉलेशन इसका होता है. छोटे और मॉड्यूलर होने के कारण गांवों और दूर के क्षेत्रों में भी आसानी से लगाए जा सकते हैं. गांव तक बिजली इससे पहुंचाई जा सकती है.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें
