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दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण और पानी का संकट बड़ी समस्या है. इससे राहत देने के लिए लगातार कार्रवाई होती हैं, पर लोगों को कोई स्थाई समाधान नहीं मिल रहा है. प्रदूषण को लेकर पब्लिक अकाउंट्स कमिटी (पीएसी) और पानी पर सीएजी की रिपोर्ट से बड़ा खुलासा हुआ है
प्रदूषण और जल संकट मामले में तत्काल एक्शन लेने की बात कही गयी.
नई दिल्ली. दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण और पानी का संकट बड़ी समस्या है. इससे राहत देने के लिए लगातार कार्रवाई होती हैं, पर लोगों को कोई स्थाई समाधान नहीं मिल रहा है. प्रदूषण को लेकर पब्लिक अकाउंट्स कमिटी (पीएसी) और पानी पर सीएजी की रिपोर्ट से बड़ा खुलासा हुआ है और इससे राहत न मिलने का सच भी सामने आ गया है. दोनों में रिपोर्ट में खामियां और वित्तीय अनियमितताएं की बात सामने आयी हैं. रिपोर्ट से साफ है कि वाहन प्रदूषण नियंत्रण बस सेवाएं इलेक्ट्रिक वाहन नीति और पानी की आपूर्ति-गुणवत्ता में सुधार की तत्काल जरूरत है.
पीएसी रिपोर्ट में वाहन प्रदूषण पर ध्यान केंद्रित किया गया. सीएजी के 2021 तक के प्रदर्शन ऑडिट पर आधारित इस रिपोर्ट में कहा गया कि एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन सड़कों, पेड़ों या इमारतों के बहुत पास हैं, जिससे सटीक डेटा पर सवाल उठते हैं. कई स्टेशन सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के मानकों का पालन नहीं कर रहे.
अधूरा डेटा होने के बावजूद एक्यूआई गणना की जा रही है और लेड जैसे महत्वपूर्ण प्रदूषक की माप तक नहीं हो रही. दिल्ली को 11 हजार बसों की जरूरत है लेकिन 2021 तक केवल 6 हजार 750 बसें उपलब्ध थीं. लास्ट माइल कनेक्टिविटी की समस्या बरकरार है जिससे लोग बसों का इस्तेमाल कम करते हैं . न तो ईवी बोर्ड बना और न ही ईवी सेल सक्रिय रही. चार्जिंग स्टेशन और पार्किंग व्यवस्था में भारी कमी है. बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों का कोई ठोस डेटा नहीं रखा जा रहा. पुराने वाहनों को स्क्रैप करने की प्रक्रिया बेहद धीमी चल रही है.
दूसरी ओर डीजेबी पर सीएजी की 2017-22 की रिपोर्ट में पानी की आपूर्ति सीवरेज और वित्तीय प्रबंधन की कमियां उजागर हुईं. मार्च 2022 तक डीजेबी पर 66 हजार 595 करोड़ रुपये का कर्ज है. उपभोक्ताओं से 21 हजार 696 करोड़ रुपये का जल शुल्क वसूला नहीं गया. गैर-राजस्व पानी (रिसाव और चोरी) 51 प्रतिशत से बढ़कर 53 प्रतिशत हो गया जिससे करीब 4 हजार 988 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
पानी की बर्बादी भी बढ़ी है. वितरण के दौरान 16 प्रतिशत से बढ़कर 21 प्रतिशत पानी बर्बाद हो रहा. फ्लो मीटर न लगने से आपूर्ति का सटीक मापन ही नहीं हो पा रहा. परीक्षण लैबों में स्टाफ और उपकरणों की भारी कमी है. जल जांच ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स के मानकों के मुताबिक नहीं हो रही. 55 प्रतिशत भूजल नमूने पीने लायक नहीं पाए गए. चंद्रावल और वजीराबाद वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट अधूरे पड़े हैं. एशियन डेवलपमेंट बैंक ने 2 हजार 243 करोड़ रुपये की फंडिंग वापस ले ली. अयोग्य ठेकेदारों को काम सौंपे जाने और अधूरी प्रोजेक्ट पर 52 करोड़ रुपये से ज्यादा व्यर्थ खर्च होने की बात कही गई. इस दौरान दिल्ली सरकार न जल नीति बना पाई और न ही जल परामर्श परिषद गठित की.
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करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें
