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दिल्ली वालों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है. अब घरों के बाहर लगे बोरवेल अवैध नहीं माने जाएंगे. दिल्ली सरकार जल्द ही एक नई ‘घरेलू बोरवेल नीति’ लाने जा रही है, जिसके तहत बोरवेल लगवाने के लिए NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लेने का झंझट पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा. जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने विधानसभा के बजट सत्र में इसका ऐलान किया भूजल स्तर में सुधार को देखते हुए यह फैसला लिया गया है.
दिल्ली सरकार ने बोरवेल लगाने के लिए एनओसी वाले नियमों में बदलाव की घोषणा की. (फाइल फोटो)
Delhi Borewell Policy: अगर आप दिल्ली में रहते हैं, और पानी की किल्लत से बचने के लिए अपने घर में बोरवेल लगवाना चाहते हैं, तो आपके लिए एक बड़ी खुशखबरी है. दिल्ली सरकार जल्द ही एक नई घरेलू बोरवेल नीति लागू करने जा रही है. इस नीति के तहत न सिर्फ पुराने बोरवेल वैध किए जाएंगे, बल्कि नए बोरवेल लगाने की प्रक्रिया को भी बेहद आसान बना दिया जाएगा. दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने शुक्रवार को दिल्ली विधानसभा के बजट सत्र के दौरान इस बड़ी योजना का ऐलान किया.
जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर बोरवेल की अनुमति प्रक्रिया को पूरी तरह से सरल बनाया जा रहा है. अब लोगों को बोरवेल लगवाने के लिए दिल्ली जल बोर्ड (DJB) या नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) से अनुमति लेनी की जरूरत नहीं पड़ेगी. डीएम से एनओसी लेने की जरूरत नहीं होगी. बता दें कि बोरवेल के लिए सेंट्रल ग्राउंड वॉटर अथॉरिटी (CGWA) के भी नियमों का पालन करना पड़ता था.
विधानसभा में क्या कहा?
वर्मा ने विधानसभा में भाषण के दौरान कहा, ‘फिलहाल शहर में कई अवैध बोरवेल लगे हैं और नियमों की जटिलता के कारण लोगों को अक्सर भारी परेशानी और नोटिस का सामना करना पड़ता है. बोरवेल लगवाने के लिए कई तरह की अनुमतियां लेनी पड़ती हैं. हम इन सभी झंझटों को खत्म करेंगे.’ इस नई नीति के तहत दिल्ली में पहले से मौजूद अवैध बोरवेलों को नियमित किया जाएगा. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में लगभग 5,000 बोरवेल हैं, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि असल में यह संख्या इससे कहीं ज्यादा है.
अब क्या होगा?
वर्मा ने कहा कि भूजल के जरूरत से ज्यादा दोहन को रोकने के लिए सरकार इन बोरवेलों पर मीटर लगाएगी, ताकि पानी की बर्बादी रोकी जा सके. सरकार बोरवेल की अनुमति और नियमितीकरण के लिए एक नया ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च करेगी. उम्मीद है कि अगले 2 से 3 महीने में यह पूरी योजना जमीन पर लागू हो जाएगी.
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार का कहना है कि दिल्ली के वाटर लेवल (भूजल स्तर) में हुए सुधार के बाद यह अहम फैसला लिया गया है. इसका मुख्य उद्देश्य शहर की वर्तमान और भविष्य की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करना और जल प्रबंधन (Water Management) को बेहतर बनाना है. इसके अलावा, मंत्री ने यह भी घोषणा की है कि आने वाले सालों में पानी की समस्या को और सुलझाने के लिए दिल्ली की सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता को बढ़ाकर 1,500 मिलियन गैलन प्रतिदिन (MGD) किया जाएगा.
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दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें
