ईरान में 8 दिसंबर को क्या हुआ था? 100 दिन की कहानी, केतन मेहता की जुबानी, कैसे बीते जेल में 50 दिन

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गाजियाबाद के रहने वाले केतन मेहता आखिरकार सकुशल अपने घर वापस लौट आए हैं. जिस बेटे के लिए मां दिन-रात पूजा अर्चना कर रही थी और भगवान से दुआ कर रही थी, वह बेटा करीब 100 दिन बाद ईरान से अपने देश लौट आया है. केतन मेहता को सही-सलामत देख उनके घर में खुशी का माहौल है.

ईरान से लौटे केतन मेहता की कहानी.

गाजियाबादः उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के डीएलएफ इलाके में आज खुशियां लौटी हैं. लेकिन इन खुशियों के पीछे छुपी है. 100 दिनों की एक ऐसी कहानी, जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएं. मर्चेंट नेवी इंजीनियर केतन मेहता, जो समंदर में अपनी ड्यूटी निभा रहे थे. अचानक ईरान नेवी की गिरफ्त में आ गए. गोलियों की गूंज, जेल की सलाखें और जंग जैसे हालात. हर दिन किसी खौफ से कम नहीं था. हालांकि अब वो सकुशल अपने घर लौट आए हैं और न्यूज 18 से खास बातचीत में उन्होंने अपनी आपबीती साझा की है.

8 दिसंबर को शिप पर हुआ था क्या
8 दिसंबर को अरब सागर में मौजूद जहाज पर केतन मेहता अपने काम में जुटे थे तभी अचानक हालात बदल गए. ईरान नेवी ने उनके शिप को चारों तरफ से घेर लिया. रुकने के आदेश दिए और कुछ ही पलों में गोलियों की आवाजें गूंजने लगीं. शिप पर मौजूद 18 क्रू मेंबर्स,ज्यादातर भारतीय को हिरासत में ले लिया गया. उन्होंने कहा, “हम लोग अपना काम कर रहे थे. अचानक नेवी ने घेर लिया. गोलियां चलने लगीं. उस वक्त बहुत डर लग रहा था. समझ नहीं आ रहा था क्या होगा. गन प्वाइंट पर सभी को ईरान के जस्क नेवी बेस ले जाया गया, जहां उन पर डीजल तस्करी का आरोप लगाया गया. इसके बाद कहानी और भी डरावनी हो गई. केतन समेत 10 लोगों को बंदर अब्बास की सेंट्रल जेल भेज दिया गया.

50 दिन तक केतन और उनके साथी जेल में रहे
केतन ने बताया, “करीब 50 दिन हम जेल में रहे. कोई जानकारी नहीं थी. न घरवालों से बात हो पा रही थी. बस इंतजार करते थे कि कब रिहाई होगी. बहुत मुश्किल समय था. फिर कुछ दिन बाद परिवार से बात हुई. तीन फरवरी को कुछ लोगों को रिहा कर दिया गया. लेकिन केतन की रिहाई 27 फरवरी को हो पाई. हालांकि जेल से बाहर आना, आजादी नहीं था. क्योंकि उस वक्त जंग जैसे हालात बन चुके थे और सभी रास्ते बंद थे. जंग शुरू हो गई. हमें एक होटल में रखा गया. करीब 25 दिन वहीं फंसे रहे. बाहर बम धमाकों की आवाजें आती थीं. हर वक्त डर लगा रहता था.”

‘बस उम्मीद थी कि घर आ जाएंगे’
केतन ने बताया कि इस दौरान भारतीय दूतावास लगातार संपर्क में रहा. रेस्क्यू की कोशिशें जारी रहीं और फिर शुरू हुआ एक खतरनाक सफर. करीब 1800 किलोमीटर का लंबा रास्ता. बंदर अब्बास से जोल्फा… अर्मेनिया बॉर्डर पार और दुबई होते हुए भारत वापसी. केतन ने बताया, “दूतावास ने बहुत मदद की. उसी की वजह से हम सुरक्षित वापस आ पाए. प्रधानमंत्री का आभार विदेश मंत्री का आभार सफर लंबा था. लेकिन उम्मीद थी कि अब घर पहुंच जाएंगे.”

केतन के घर लौटते ही खुशी से रो पड़े परिजन
27 मार्च को केतन मुंबई पहुंचे. औपचारिकताएं पूरी करने के बाद जैसे ही दिल्ली स्थित घर पहुंचे. दरवाजा खुलते ही भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा. मां ने बेटे को गले लगाया. बहन की आंखों में खुशी के आंसू थे.
क्योंकि ये सिर्फ वापसी नहीं, एक जंग जीतने जैसा पल था. वहीं केतन आज घर पहुंचे हैं. वह उस मंजर को याद नहीं करना चाहते हैं और अभी कुछ माह तक ब्रेक लिया जॉब पर वापस जाने के लिए.

केतन की बहन डटी रहीं
केतन ने कहा, “घर आकर बहुत अच्छा लग रहा है. परिवार ने जो संघर्ष किया. उसके लिए मैं उनका हमेशा आभारी रहूंगा. वहीं उनकी बहन शिवानी मेहता ने बताया कि इस पूरे संघर्ष में परिवार ने भी हार नहीं मानी. बहन शिवानी ने जंतर-मंतर पर आवाज उठाई. सरकार और अधिकारियों तक लगातार पहुंच बनाई. 100 दिनों का ये सफर. समंदर से लेकर जेल और जंग जैसे हालात तक. केतन मेहता की ये कहानी बताती है कि जिंदगी कब करवट ले ले. कोई नहीं जानता. फिलहाल केतन सुरक्षित अपने घर हैं और इस पूरे रेस्क्यू के लिए सरकार, दूतावास और मीडिया का धन्यवाद कर रहे हैं.

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Prashant Rai

प्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ें

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