पुराने शतरंज बोर्ड से हुई शुरुआत… 11 साल की भारतवंशी बोधना शिवानंदन बनीं इंग्लैंड की नंबर-1 महिला खिलाड़ी

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Bodhana Sivanandan: नॉर्थ लंदन के हैरो की रहने वाली 11 वर्षीय स्कूल छात्रा बोधना शिवानंदन, फिडे (FIDE) की अप्रैल 2026 की रैंकिंग के अनुसार इंग्लैंड की सबसे टॉप महिला शतरंज खिलाड़ी बन गई हैं. उन्होंने 25 साल और चार बार की ब्रिटिश महिला चैंपियन लैन याओ को पछाड़कर यह स्थान हासिल किया है. इसके साथ ही बोधना ने पहली बार दुनिया की टॉप 100 महिलाओं की सूची में भी जगह बनाई है, जहां वे 2366 की रेटिंग के साथ 72वें नंबर पर हैं.

बोधना शिवानंदन ने रचा इतिहास.

नई दिल्ली. खेल जगत में भारतवंशियों का डंका पूरी दुनिया में बज रहा है. अब इस कड़ी में एक नया नाम जुड़ा है. ये नाम है बोधना शिवानंदन. महज 11 साल की इस नन्ही शतरंज खिलाड़ी ने इतिहास रचते हुए इंग्लैंड की टॉप रेटेड महिला खिलाड़ी होने का गौरव हासिल किया है. फिडे (FIDE) की ताजा रेटिंग के अनुसार, बोधना की रेटिंग अब 2366 हो गई है. उन्होंने चार बार की ब्रिटिश चैंपियन लैन याओ को पीछे छोड़ते हुए यह मुकाम हासिल किया है. इतना ही नहीं, बोधना ने पहली बार दुनिया की टॉप-100 महिला खिलाड़ियों की सूची में भी जगह बना ली है, जहां वे वर्तमान में 72वें स्थान पर हैं.

उत्तर लंदन में रहने वाली बोधना की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है. उन्होंने शतरंज खेलना किसी प्रोफेशनल कोचिंग से नहीं, बल्कि कोरोना लॉकडाउन के दौरान घर में मिले एक पुराने चेस सेट से शुरू किया था. उनके पिता उस पुराने चेस सेट को फेंकने वाले थे, लेकिन बोधना ने उसे उठा लिया और वहीं से उनके जीवन का नया सफर शुरू हुआ. बोधना ने हाल ही में ग्रीस में एक टूर्नामेंट के दौरान पूर्व वर्ल्ड चैंपियन मारिया मुजीचुक को हराकर सबको हैरान कर दिया था. वे अब ‘वुमेन इंटरनेशनल मास्टर’ का खिताब भी अपने नाम कर चुकी हैं.

बोधना शिवानंदन ने रचा इतिहास.

ऋषि सुनक ने भी दी बधाई
बोधना की इस कामयाबी पर ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने खुशी जाहिर की. उन्होंने एक पुरानी याद साझा करते हुए कहा, ’11 साल की उम्र में इंग्लैंड की नंबर-1 खिलाड़ी बनने पर बोधना को बहुत बधाई. हमने एक बार डाउनिंग स्ट्रीट के गार्डन में साथ मैच खेला था. उनकी इस सफलता को देखकर मुझे जरा भी हैरानी नहीं हो रही है.’ इंग्लिश चेस फेडरेशन के सीईओ रिचर्ड वॉल्श ने उन्हें ‘असाधारण प्रतिभा’ करार दिया है. उन्होंने कहा, ‘बोधना न केवल लड़कियों के लिए, बल्कि इंग्लैंड के हर खिलाड़ी के लिए एक मिसाल पेश कर रही हैं.’

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