गाजियाबाद: यूपी के गाजियाबाद के डीएलएफ इलाके में आज खुशियां लौटी है. मगर, इन खुशियों के पीछे छुपी है 100 दिनों की एक ऐसी कहानी, जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएं. मर्चेंट नेवी इंजीनियर केतन मेहता, जो समंदर में अपनी ड्यूटी निभा रहे थे… अचानक ईरान नेवी की गिरफ्त में आ गए… गोलियों की गूंज, जेल की सलाखें और फिर जंग जैसे हालात के बीच उनका हर दिन किसी खौफ से कम नहीं था. अब वो सकुशल अपने घर लौट आए हैं, लेकिन उनकी आपबीती किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है.
8 दिसंबर का दिन था. केतन मेहता अपने काम में जुटे थे. तभी अचानक हालात बदल गए. ईरान नेवी ने उनके शिप को चारों तरफ से घेर लिया और रुकने के आदेश दिए. कुछ ही पलों में गोलियों की आवाजें गूंजने लगीं. शिप पर 18 क्रू मेंबर्स थे, जिनमें अधिकतर भारतीय थे. सभी को हिरासत में ले लिया गया. गन प्वाइंट पर सबको ईरान के जस्क नेवी बेस ले जाया गया, जहां उन पर डीजल तस्करी का आरोप लगा.
इसके बाद कहानी और भी डरावनी हो गई. कुछ लोगों को शिप पर ही रोक दिया गया, जबकि केतन समेत 10 लोगों को बंदर अब्बास की सेंट्रल जेल भेज दिया गया. करीब 50 दिन जेल की सलाखों के पीछे… न कोई स्पष्ट जानकारी, न घरवालों से संपर्क… बस इंतजार कब रिहाई होगी. 3 फरवरी को कुछ लोगों को छोड़ा गया, लेकिन केतन को तब भी नहीं छोड़ा गया. उन्हें हर पल डर सता रहा था कि आखिर कभी मैं यहां से छूट भी पाऊंगा या नहीं… आखिरकार उनकी रिहाई 27 फरवरी को हो पाई. हालांकि जेल से बाहर आना आजादी नहीं था. उन्हें एक होटल में रखा गया, जहां करीब 25 दिन तक वो फंसे रहे. इसी दौरान हालात और बिगड़ गए.
क्या बोले केतन?
केतन बताते हैं कि होटल के कमरे में बाहर होने वाले बम धमाकों की आवाजें सुनाई देती थीं. हर पल डर लगता था कि कहीं अगला नंबर मेरा न हो. इसी बीच भारतीय दूतावास से संपर्क बना रहा. रेस्क्यू की कोशिशें जारी रहीं और आखिरकार एक खतरनाक सफर शुरू हुआ. करीब 1800 किलोमीटर का लंबा सफर… बंदर अब्बास से जोल्फा, फिर अर्मेनिया बॉर्डर पार और वहां से दुबई होते हुए भारत वापसी.
27 मार्च को केतन मुंबई पहुंचे. यहां औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दिल्ली पहुंचे. जैसे ही घर का दरवाजा खुला तो भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा. मां ने बेटे को गले लगाया, मिठाई खिलाई, बहन की आंखों में खुशी के आंसू थे क्योंकि ये सिर्फ वापसी नहीं, एक जंग जीतने जैसा पल था.
इस पूरे संघर्ष में परिवार ने भी हार नहीं मानी. अपने भाई की वापसी के लिए बहन शिवानी जंतर-मंतर पर बैठ गई थीं. लगातार आवाज उठा रही थीं, जो सरकार और अधिकारियों तक पहुंच ही गई. आज केतन मेहता सुरक्षित अपने घर हैं. वो इस पूरे रेस्क्यू के लिए सरकार, भारतीय दूतावास और मीडिया का धन्यवाद करते हैं.
कौन-कौन हैं परिवार में?
केतन मेहता के पिता मुकेश मेहता मूल रूप से गुजरात के राजकोट के रहने वाले हैं. करीब 30 साल पहले वह नौकरी की तलाश में दिल्ली आए थे और बाद में गाजियाबाद के साहिबाबाद स्थित डीएलएफ (DLF) इलाके में बस गए. परिवार में पत्नी, दो विवाहित बेटियां और इकलौता बेटा केतन है. केतन ने वर्ष 2018 में मर्चेंट नेवी ज्वॉइन की थी और पिछले आठ वर्षों से समुद्री सेवा में कार्यरत हैं. वह दुबई की ‘MT ग्लोबल ACE’ कंपनी के ऑयल शिप पर तैनात थे.
