दिल्ली के अवैध कॉलोनियों में रहने वाले लाखों परिवारों को बड़ा तोहफा मिला है. केंद्र और दिल्ली की डबल इंजन सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिससे 45 से 50 लाख लोगों की जिंदगी बदल जाएगी. केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एलान किया कि अब दिल्ली की 1731 में से 1511 अवैध कॉलोनियों को As-is Where-is यानी जहां जो जैसा है… के आधार पर रेगुलर किया जाएगा. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब इन कॉलोनियों के लोग अपने मकान और प्लॉट की सीधी रजिस्ट्री करा सकेंगे और बैंकों से लोन भी ले पाएंगे.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने PM-UDAY योजना शुरू की थी, ताकि लोगों को मालिकाना हक मिल सके. हालांकि, तकनीकी दिक्कतों और तालमेल की कमी के कारण अब तक केवल 40,000 लोगों को ही इसका लाभ मिल पाया था. अब सरकार ने सभी तकनीकी अड़चनों को दूर कर दिया है:
सर्किल रेट का झंझट खत्म: पहले DDA, L&DO और दिल्ली सरकार के सर्किल रेट अलग-अलग थे. अब पूरी दिल्ली में एक समान सर्किल रेट लागू होगा.
DDA नहीं, पटवारी करेंगे काम: पहले सर्वे का काम DDA अधिकारी करते थे, जिसमें देरी होती थी. अब दिल्ली राजस्व विभाग के पटवारी और तहसीलदार खुद जमीन पर जाकर सर्वे करेंगे.
फिक्स्ड टाइमलाइन: सर्वे की रिपोर्ट 7 दिन में देनी होगी, आपत्तियों का निपटारा 15 दिन में होगा और कन्विंस डीड यानी मालिकाना हक के कागज 45 दिन के भीतर मिल जाएंगे.
मास्टर प्लान 2041 और MCD की मंजूरी
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि दिल्ली अब ‘विकसित भारत’ के सपने के साथ ‘विकसित दिल्ली’ की ओर बढ़ रही है. मास्टर प्लान 2041 अब अपने फाइनल शेप में है. आज के बाद इन कॉलोनियों में जो भी नए मकान बनेंगे, उन्हें नगर निगम (MCD) से नक्शा पास कराना होगा. पुराने मकानों को भी निगम की शर्तों के मुताबिक नियमित किया जाएगा.
किसे मिलेगा लाभ और कब से शुरू होंगे आवेदन?
सरकार ने साफ किया है कि यह योजना उन कॉलोनियों के लिए है जो वन विभाग, यमुना खादर (Zone-O), प्राचीन स्मारकों या हाई-टेंशन लाइनों जैसी प्रतिबंधित जगहों पर नहीं बनी हैं. दिल्ली की अवैध कॉलोनियों में मालिकाना हक पाने और रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया को अब सरकार ने काफी आसान बना दिया है. 24 अप्रैल 2026 से आप SWAGAM पोर्टल के जरिए आवेदन कर पाएंगे.
यहां स्टेप-बाय-स्टेप पूरी प्रक्रिया समझें
- ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन: सबसे पहले आपको दिल्ली सरकार/DDA के अधिकृत पोर्टल ‘SWAGAM’ पर जाना होगा. यहां अपनी कॉलोनी का नाम और अपने मकान/प्लॉट की बेसिक जानकारी (क्षेत्रफल, गली नंबर आदि) भरकर अपना रजिस्ट्रेशन करना होगा.
- जरूरी दस्तावेजों का इंतजाम: आवेदन के समय आपके पास ये कागज होने चाहिए. GPA यानी मकान की पुरानी पावर ऑफ अटॉर्नी.एग्रीमेंट टू सेल यानी खरीद-बिक्री का एग्रीमेंट. कब्जे का प्रमाण. पैसे के लेन-देन की रसीद. आधार कार्ड या वोटर आईडी.
- अब पटवारी और तहसीलदार करेंगे सर्वे: पहले ये काम DDA करता था, लेकिन अब दिल्ली राजस्व विभाग के पटवारी और तहसीलदार आपके घर आएंगे. आवेदन के 7 दिनों के भीतर उन्हें GIS सर्वे की रिपोर्ट देनी होगी.
- कमियों को दूर करना: अगर आपके आवेदन में कोई कागज कम है या तकनीकी गलती है, तो विभाग आपको 15 दिन के भीतर सूचना देगा. आपको उन कमियों को पोर्टल पर ही ठीक करना होगा.
- कन्विंस डीड की प्राप्ति: सर्वे और कागजों की जांच सही पाए जाने पर, अगले 45 दिनों के भीतर आपको कन्विंस डीड या ऑथराइजेशन स्लिप जारी कर दी जाएगी. यह स्लिप आपके मालिकाना हक का सबसे बड़ा कानूनी सबूत होगी.
- सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में फाइनल रजिस्ट्री: कन्विंस डीड मिलने के बाद, आप संबंधित सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में जाकर अपने नाम पर सीधी रजिस्ट्री (Registration) करा सकते हैं. इसके बाद आप अपने मकान पर बैंक से होम लोन भी ले पाएंगे.
सस्ती आवास व्यवस्था पर भी जोर
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक और बड़ा एलान करते हुए कहा कि दिल्ली में सस्ती आवास व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए भी योजना लाई गई है. सरकार का लक्ष्य है कि दिल्ली के हर नागरिक के पास अपना कानूनी घर हो और उन्हें सम्मान के साथ जीने का हक मिले. 24 अप्रैल से शुरू होने वाली इस प्रक्रिया के बाद दिल्ली के रियल एस्टेट मार्केट में भी उछाल आने की उम्मीद है, क्योंकि अब इन संपत्तियों की खरीद-बिक्री कानूनी रूप से वैध हो जाएगी.
