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कांफ्रेंस के टेक्निकल सेशन में बहुत जबरदस्त और भारी रिसर्च पेश की गई. टीचर्स और स्टूडेंट्स ने नए इनोवेशन और कंक्लूजन सामने रखे. यहां सस्टेनेबल प्रोडक्ट और ग्रीन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने पर पूरा फोकस रहा. एक्सपर्ट्स ने ग्लोबल पॉल्यूशन खत्म करने के लिए कई बहुत अहम उपाय बताए.
शिवाजी कॉलेज में भौतिक विज्ञान विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया.
नई दिल्ली. दिल्ली विश्वविद्यालय के नैक द्वारा ‘ए’ ग्रेड प्राप्त प्रतिष्ठित शिवाजी कॉलेज के भौतिक विज्ञान विभाग द्वारा अपने प्राचार्य प्रोफेसर वीरेंद्र भारद्वाज के नेतृत्व में ‘इमर्जिंग फ्रंटियर्स इन सस्टेनेबल, फंक्शनल और एडवांस्ड मैटेरियल्स (IC-SFAM 2026)’ विषयक दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन किया. यह सम्मेलन 9-10 अप्रैल, 2026 को हाइब्रिड मोड में आयोजित किया गया, जिसमें दुनिया भर के जाने-माने वैज्ञानिक, अकादमिक जगत की प्रसिद्ध हस्तियां, शोधार्थी तथा छात्र एक मंच पर साथ आए.
उद्घाटन सत्र का शुभारंभ एवं आमंत्रित अतिथियों का स्वागत करते हुए प्राचार्य प्रोफेसर वीरेंद्र भारद्वाज ने अपने स्वागत उद्बोधन में इस तरह के अतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की उपयोगिता एवं महत्त्व पर बल देते हुए कहा कि आज की तमाम समस्याएँ विज्ञान और तकनीक के द्वारा हल हो सकती हैं. इन तकनीकों में भी हरित एवं सस्टेनेबल उत्पादों की महत्ता को पहचानते हुए अगर हम सतत विकास की ओर बढ़ते हैं, तब हम ऐसे सम्मेलनों को सार्थकता प्रदान कर पाएंगे. हमें समझना होगा कि विज्ञान और तकनीक पर्यावरण और मनुष्यता के पक्ष में काम करे.
इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रोफेसर अशोक नागावत , कुलपति, डीएसईयू और विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर इंदर मोहन कपाही , पूर्व सदस्य, यूजीसी की गरिमामयी उपस्थिति रही. मुख्य अतिथि प्रोफेसर अशोक नागावत , कुलपति, डीएसईयू ने अपने संबोधन में आधुनिक वैज्ञानिक और पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान करने में अंतःविषय अनुसंधान के महत्व पर प्रकाश डाला. विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर इंदर मोहन कपाही, पूर्व सदस्य, यूजीसी ने भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के महत्व और चुनौतियों का उल्लेख करते हुए भौतिक विज्ञान के शोधार्थियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों की भूमिका पर बल दिया. मुख्य वक्ता प्रोफेसर आर.के कोटनाला, संस्थापक, एनएससीआई दिल्ली और प्रोफेसर बिनय कुमार, भौतिकी और खगोल भौतिकी विभाग, डीयू ने नैनोमटेरियल, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणाली, क्वांटम सामग्री और स्मार्ट कार्यात्मक उपकरणों जैसे अत्याधुनिक विषयों पर बात की . उनकी अंतर्दृष्टि ने तकनीकी नवाचार और सतत विकास को आगे बढ़ाने में भौतिकी की भूमिका पर जोर दिया.
सम्मेलन में कई तकनीकी सत्रों में शोधार्थियों और शिक्षकों ने मौखिक एवं पोस्टर प्रस्तुतियों के द्वारा सतत विकास के नए पहलुओं और नवाचार द्वारा नए निष्कर्षों को उजागर किया. इन सत्रों में विज्ञान के विविध विषयी एवं अंतरविद्यावर्ती वैज्ञानिक अध्ययन एवं सहयोग पर जोर दिया गया. इस सम्मेलन में सतत विकास, सतत उत्पाद, एवं हरित तकनीक को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया. विशेषज्ञों द्वारा वैश्विक पर्यावरणीय समस्याओं से समाधान तक की यात्रा के दौरान हरित उत्पादों एवं तकनीक के योगदान का मूल्यांकन किया.
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का लक्ष्य एडवांस्ड मैटेरियल्स के क्षेत्र में हाल की तरक्की और भविष्य की दिशाओं पर चर्चा करने के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करना था, जिसमें सस्टेनेबिलिटी और फंक्शनल एप्लीकेशन पर खास फोकस रहा. इस सम्मेलन को ANRF ने वित्तीय सहयोग प्रदान किया. सम्मेलन के संयोजक डॉ. सुरेंद्र कुमार ने प्राचार्य प्रोफेसर वीरेंद्र भारद्वाज एवं ANRF के वित्तीय सहयोग के लिए आभार जताया. इस अवसर शिवाजी कॉलेज एवं देश के विभिन्न संस्थानों से आए सैकड़ों शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने प्रतिभागिता दी.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें
