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Fake Call Centre News: टेक्नोलॉजी के विकास के साथ ही ठगी और धोखाधड़ी के नए-नए तरीके भी सामने आने लगे हैं. देखने और सुनने में सबकुछ सामान्य लगता है, लेकिन इसकी जाल में फंसने के बाद आमलोग अपना सबकुछ गंवा बैठते हैं. देश की राजधानी दिल्ली में ऐसा ही एक मामला सामने आया है.
दिल्ली पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर का भांडाफोड़ किया है.
नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘सीवाई-हॉक 4.0’ के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए दक्षिणी जिले के गोविंदपुरी इलाके में संचालित एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है. इस मामले में पुलिस ने मास्टरमाइंड समेत कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संदीप चौधरी, अश्विनी कुमार उर्फ तुषार, नीरज गुप्ता, अभय कुमार, अमन भगत, आर्यन नाथ, सिद्धार्थ चौहान, अंकित गुप्ता, ध्रुव, आकाश गुप्ता और पवन कुमार के रूप में हुई है. इसके अलावा एक महिला पार्टनर रितु कुमारी और करीब 20 महिला कर्मचारियों की पहचान कर उन्हें जांच में शामिल होने के लिए नोटिस जारी किया गया है.
पुलिस के अनुसार, इस गिरोह का पर्दाफाश राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज एक शिकायत की जांच के दौरान हुआ. गुरुग्राम निवासी एक व्यक्ति ने 13,200 रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी. जांच में सामने आया कि ठगी की रकम एक ‘म्यूल’ बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी, जिसका इस्तेमाल देशभर में कई साइबर धोखाधड़ी मामलों में किया जा रहा था. इस खाते के धारक पवन कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें उसने खुलासा किया कि उसने कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते और एटीएम की जानकारी अपने नियोक्ता को दे दी थी. इस जानकारी के आधार पर पुलिस ‘हर्बिटेक्चर हेल्थकेयर’ नामक फर्जी फर्म तक पहुंची.
स्पेशल टीम का बड़ा कारनामा
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना साकेत की एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसका नेतृत्व इंस्पेक्टर नगेंद्र नगर ने किया. टीम ने गोविंदपुरी स्थित दफ्तर पर छापा मारा, जहां एक पूर्ण रूप से सक्रिय अवैध कॉल सेंटर संचालित होता मिला. छापेमारी के दौरान वहां 31 कर्मचारी, जिनमें 21 महिलाएं और 10 पुरुष शामिल थे — कॉलिंग गतिविधियों में संलिप्त पाए गए. कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 35 मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप, एक डेस्कटॉप कंप्यूटर, 15 नए सिम कार्ड, दवाइयों से भरे 35 लौटाए गए पार्सल, बैंक से जुड़े दस्तावेज, चेक बुक और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की.
सोशल मीडिया के जरिये स्कैम
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम और फेसबुक के जरिए वजन घटाने वाले उत्पादों का विज्ञापन करते थे. ग्राहकों की रुचि दिखाने पर कॉल सेंटर के एजेंट उन्हें संपर्क कर उत्पाद खरीदने के लिए प्रेरित करते थे. शुरुआत में कुछ ऑर्डर सही तरीके से डिलीवर किए जाते थे ताकि ग्राहकों का भरोसा जीता जा सके, लेकिन बाद में उनसे अतिरिक्त भुगतान करवाकर या तो सामान नहीं भेजा जाता था या फिर घटिया/गलत उत्पाद भेजे जाते थे.
ऐसे बनाते थे मूर्ख
जब पीड़ित शिकायत करने की कोशिश करते, तो आरोपी बहाने बनाकर टालते रहते और आखिरकार संपर्क पूरी तरह बंद कर देते थे. इस तरह देशभर के कई लोगों से बड़ी रकम ठगी गई. मुख्य आरोपी संदीप चौधरी (27), अश्विनी कुमार (23) और नीरज गुप्ता (23) के बारे में पता चला है कि वे पहले भी इसी तरह की धोखाधड़ी गतिविधियों में शामिल रह चुके हैं और उन्होंने मई 2023 में इस गिरोह की शुरुआत की थी. फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि देशभर में अन्य पीड़ितों की पहचान, वित्तीय लेनदेन की ट्रैकिंग और इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें
