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देश का किसान सरकार के ऐसे प्राधिकरण की मदद ले रहा है जहां से वह कानूनी रूप से अपनी फसल का मालिक बन रहा है. यही नहीं अगर कोई मेहनत से उगाई गई खास किस्म को किसान की अनुमति से लेता है, तो किसान उससे इसका मुनाफा भी ले सकता है. यानी जिस कीमत पर किसान अपनी फसल देना चाहे तो किसान को पूरा भुगतान करना होगा.
नई दिल्ली. देश का किसान अब जागरूक हो चुका है. वह चाहता है कि उसकी फसल हमेशा उसके नाम की ही रहे. कोई और उसकी फसल का मालिक ना बन सके. इसलिए अब देश का किसान सरकार के ऐसे प्राधिकरण की मदद ले रहा है जहां से वह कानूनी रूप से अपनी फसल का मालिक बन रहा है. उसकी फसल को कोई भी अपने खेत पर उगाकर उसका मालिक नहीं बन सकता. यही वजह है कि 2009 से लेकर 2025 के बीच प्राधिकरण के पास लगातार पंजीकरण एप्लीकेशन बढ़ती जा रही है.
खास तौर पर किसानों में जागरूकता 2022 से लेकर 2025 के बीच ज्यादा बढ़ी है. यही नहीं अगर कोई किसान की मेहनत से उगाई गई खास किस्म को किसान की अनुमति से लेता है, तो किसान उससे इसका मुनाफा भी ले सकता है. यानी जिस कीमत पर किसान अपनी फसल देना चाहे उसी कीमत पर सामने वाले को किसान से उसकी खास किस्म को लेना होगा और पूरा भुगतान भी किसान को करना होगा. इस खास कानून को बनाया है प्रोटेक्शन ऑफ प्लांट वैरायटी एंड फार्मर्स राइट अथॉरिटी यानी पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण ने, जिसका हेड ऑफिस दिल्ली में है.
लगातार हो रहे पंजीकरण
यहां के प्लांट वैरायटी एग्जामिनर डॉ. अजय कुमार सिंह से जब हमने बात की तो उन्होंने बताया कि जब किसान कई सालों तक कोई खास खेती करता है या किसी किस्म को उगाता है, तो वो वैरायटी कहीं न कहीं किसी रूप से अलग गुण वाली, अलग स्वाद वाली और अलग मुनाफे वाली होती है. उस वैरायटी को हमारे पास लाकर जब किसान जांच कराता है, तो हम अपने डेटाबेस में पहले से ही पंजीकृत सभी वैरायटी की जांच करते हैं और जब वो वैरायटी किसी से मैच नहीं करती है, तो हम उसे एक अलग वैरायटी घोषित कर देते हैं और किसान को इसका प्रमाण पत्र दे देते हैं.
उन्होंने बताया कि 2023 से लेकर 2025 के बीच में किसानों में ज्यादा जागरूकता आई है. यही वजह है कि पंजीकरण एप्लीकेशन की संख्या भी बढ़ गई है. प्राधिकरण के नए अध्यक्ष त्रिलोचन महापात्र के निर्देशन में 2023 से लेकर 2025 तक प्राधिकरण ने 2000 से भी ज्यादा पंजीकरण रजिस्ट्रेशन एप्लीकेशन प्राप्त की है. एप्लीकेशन किसान खुद लेकर के आ रहे हैं और हमने सर्टिफिकेट किसानों को दिए हैं. यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि 2009 से लेकर 2022 के बीच में बहुत ज्यादा जागरूकता नहीं देखी गई लेकिन 2023 से अचानक से किसान अपनी फसल का मालिक बनने के लिए अब पंजीकरण तेजी से करवा रहा है.
निशुल्क होता है पंजीकरण
अजय कुमार सिंह ने बताया कि दिल्ली स्थित उनके हेड ऑफिस पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण में अपनी खास वैरायटी को लाकर किसान पंजीकरण इसका करा सकते हैं. पंजीकरण कराना एकदम निशुल्क होगा. प्रमाण पत्र जारी करने तक कोई भी शुल्क किसानों से नहीं लिया जाएगा. 15 सालों तक किसान मूल रूप से अपनी उस खास वैरायटी का कानूनी रूप से मालिक रहेगा. उस प्रमाण पत्र की अवधि 15 सालों की होती है. इसके बाद उसे दोबारा पंजीकरण करना होगा. पंजीकरण कराने की प्रक्रिया बहुत आसान है. इसके लिए किसानों को अपना नाम, पूरा पता के साथ ही अपने लोकल एरिया के किसी ग्राम पंचायत अधिकारी का एक कंफर्मेशन लेटर लाना होगा. इसके बाद उसकी उस खास वैरायटी को आसानी से यहां पर पंजीकृत कर लिया जाएगा.
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