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Harish Rana Update News : AIIMS में भर्ती हरीश राणा को इच्छामृत्यु मिलने की ये कहानी सिर्फ एक मरीज की नहीं, बल्कि उस मुश्किल सवाल की भी है जब जिंदगी सिर्फ दर्द बन जाए, तो क्या उसे उसी तरह जारी रखना चाहिए या उसे शांतिपूर्वक खत्म करने का हक मिलना चाहिए? एम्स में हरीश राणा का ये एक हफ्ता इलाज से ज्यादा इंतजार और भावनात्मक संघर्ष का रहा है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि आगे की प्रक्रिया कैसे पूरी होती है.
इच्छामृत्यु पाए AIIMS में भर्ती हरीश राणा को लेकर नया अपडेट सामने आया है.
नई दिल्ली/गाजियाबाद : राजनगर एक्सटेंशन के रहने वाले हरीश राणा की कहानी सिर्फ एक मरीज की हालत नहीं, बल्कि 13 साल लंबे दर्द, संघर्ष और एक मां के सबसे कठिन फैसले की कहानी है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति मिलने के बाद हरीश को एम्स लाया गया, जहां उन्हें भर्ती हुए करीब एक हफ्ता हो चुका है. हरीश को 14 मार्च को एम्स में एडमिट कराया गया. अस्पताल में 10 डॉक्टरों की टीम उनके इलाज और निगरानी में लगी है, लेकिन इस पूरे मामले की सबसे बड़ी बात सिर्फ उनका इलाज नहीं, बल्कि वो फैसला है जो उनके परिवार ने भारी दिल से लिया.
करीब 11 साल तक लगातार इलाज कराने के बाद, जब कोई उम्मीद नजर नहीं आई, तब परिवार ने एक बेहद कठिन फैसला लिया. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और हरीश के लिए पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति मांगी. इस फैसले में सबसे ज्यादा हिम्मत दिखाई हरीश की मां ने. एक मां के लिए अपने बेटे के लिए ऐसा फैसला लेना आसान नहीं होता, लेकिन उन्होंने कागजातों पर हस्ताक्षर किए, ताकि उनके बेटे को लंबे समय से चल रहे दर्द से मुक्ति मिल सके.
सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद हरीश को एम्स लाया गया, जहां अब डॉक्टरों की टीम तय प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई कर रही है. ताजा जानकारी के मुताबिक, हरीश को न्यूट्रिशन देना बंद कर दिया गया है. साथ ही, उनके वाइटल पैरामीटर्स की नियमित जांच भी नहीं की जा रही है, जो आम तौर पर अस्पताल के प्रोटोकॉल का हिस्सा होती है. ब्लड सैंपल भी नहीं लिया जा रहा, जिससे उनके शरीर के अंदरूनी हालात का अंदाजा लगाया जा सके.
हालांकि, सूत्रों के मुताबिक उन्हें ब्रेन से जुड़ी दवाइयां दी जा रही हैं और अलग-अलग विभागों के डॉक्टर इस केस पर नजर बनाए हुए हैं. डॉक्टरों की टीम लगातार परिवार के संपर्क में है. परिवार के सदस्य माता-पिता, छोटा भाई और बहन हर अपडेट पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन इस पूरे समय में सबसे ज्यादा हरीश की मां उनके साथ रहती हैं. उनके चेहरे पर बेटे को खोने का दर्द भी है और उसे दर्द से मुक्ति दिलाने का संतोष भी.
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Senior Assistant Editor in News18 Hindi with the responsibility of Regional Head (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Bihar, Jharkhand, Rajasthan, Madhya Pradesh, Chhattisgarh, Himachal Pradesh, Haryana). Active in jou…और पढ़ें
