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Noida Protest; नोएडा में श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन के मामले में STF ने बड़ा खुलासा किया है. STF ने जिन 66 लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें से 45 लोग श्रमिक थे ही नहीं. STF के मुताबिक राजनीतिक एजेंडे के तहत हिंसा भड़काई गई थी. इसमें महिलाएं भी शामिल थीं जो पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश से आई थीं.
नोएडा हिंसा केस में पुलिस ने कई एफआईआर दर्ज की हैं.
नोएडा. उत्तर प्रदेश पुलिस और स्पेशल टास्क फाॅर्स ने नोएडा में हाल ही में हुए श्रमिक आंदोलन की आड़ में रची गई एक बड़ी साजिश का खुलासा किया है. जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. गिरफ्तार किए गए कुल 66 लोगों में से 45 वास्तविक श्रमिक नहीं थे. पुलिस के अनुसार, यह आंदोलन मजदूरों की असली मांगों से प्रेरित नहीं था, बल्कि नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में अराजकता फैलाने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को बिगाड़ने का सुनियोजित षड्यंत्र था. कुछ बाहरी तत्वों और संदिग्ध राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले लोगों ने इसकी योजना बनाई थी.
जांच के दौरान पता चला कि आगजनी की घटनाओं में 17 लोगों की पहचान हुई, जिनमें से 11 को गिरफ्तार किया गया. इनमें 8 गैर-श्रमिक शामिल थे. इसी तरह, माहौल भड़काने वाले 32 लोगों में से 19 गिरफ्तार हुए. इसके अलावा, आंदोलन में शामिल होने वाले 34 गैर-श्रमिकों को भी पकड़ा गया, जो वास्तव में कामगार नहीं थे. साजिश रचने के आरोप में 4 अन्य लोगों की गिरफ्तारी हुई.
आंदोलन को भड़काने की कोशिश
STF और स्थानीय पुलिस की टीम ने पूरे मामले की गहन जांच की. इसमें पाया गया कि प्रदर्शनकारियों में यादव और मुस्लिम समुदाय के कई लोग थे. कुछ महिलाएं बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश के अन्य इलाकों से आई थीं, जिनकी भूमिका हिंसा और अराजकता फैलाने की थी. सोशल मीडिया पर भी कुछ संदिग्ध अकाउंट्स ने आंदोलन को भड़काने की कोशिश की. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की. सरकार ने श्रमिकों की मांगों को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की घोषणा की, जिसके बाद मजदूर और फैक्ट्री मालिक दोनों पक्ष शांतिपूर्ण तरीके से सहमत हो गए. इसके बाद नोएडा में औद्योगिक कामकाज सामान्य हो गया है.
अर्थव्यवस्था को करना था प्रभावित
उच्च पुलिस सूत्रों ने बताया कि कुछ तत्व नोएडा जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र को निशाना बनाकर पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करना चाहते थे. उन्होंने इसे एक घिनौनी और बड़े पैमाने की साजिश करार दिया. सरकार ने साफ संदेश दिया है कि कानून-व्यवस्था से कोई भी खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. वर्तमान में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में कामकाज सुचारू रूप से चल रहा है. STF की जांच अभी भी जारी है और आगे और खुलासे हो सकते हैं. यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि उत्तर प्रदेश पुलिस किसी भी तरह की साजिश को बर्दाश्त नहीं करती और त्वरित कार्रवाई के जरिए शांति बनाए रखने में सक्षम है.
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अमित तिवारी, News18 Hindi के डिजिटल विंग में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. वर्तमान में अमित उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, ब्यूरोक्रेसी, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और रिसर्च बेस्ड कवरेज कर रहे हैं. अख़बार…और पढ़ें
