मिडिल क्लास फैमिली के लिए गाड़ी खरीदना या रेंट पर लेना एक बड़ा फैसला है. ट्रैफिक, पार्किंग की समस्या, बढ़ती महंगाई और गाड़ी की कीमतों के कारण ये सवाल हर किसी के मन में घूमता है. हुंडई क्रेटा जैसी पॉपुलर मिड-साइज एसयूवी की ऑन-रोड कीमत दिल्ली-एनसीआर में 12 लाख से 23 लाख रुपये तक है.
खरीदने में डाउन पेमेंट, लंबी EMI, इंश्योरेंस, मेंटेनेंस और डेप्रिशिएशन का बोझ पड़ता है. वहीं रेंट या लीज पर लेने में मासिक किराया फिक्स्ड रहता है, जिसमें मेंटेनेंस और इंश्योरेंस अक्सर शामिल होता है, लेकिन लंबे समय में ये महंगा भी साबित हो सकती है. आइए जानने की कोशिश करते हैं कि नई गाड़ी खरीदना सही है या इसे रेंट पर लिया जा सकता है.
5 साल का कैलकुलेशन
विस्तृत कैलकुलेशन से देखें तो फैसला आपकी सालाना ड्राइविंग, बजट, टैक्स स्लैब और भविष्य की प्लानिंग पर निर्भर करता है. युवा प्रोफेशनल्स या कम दूरी चलाने वाले लोगों के लिए लीज ज्यादा सुविधाजनक है, जबकि परिवार जिन्हें गाड़ी लंबे समय तक रखनी है, उनके लिए खरीदना सस्ता पड़ता है. Ola, Uber या मंथली सब्सक्रिप्शन शॉर्ट टर्म के लिए ठीक हैं, लेकिन लंबे पीरियड में दोनों विकल्पों की तुलना जरूरी है. स्मार्ट चॉइस से हर महीने हजारों रुपये बचाए जा सकते हैं.
खरीदने का खर्च
मान लीजिए आप हुंडई क्रेटा पेट्रोल वेरिएंट चुन रहे हैं, जिसकी आपके शहर में ऑन-रोड कीमत लगभग 15 लाख रुपये है. सालाना 15,000 किलोमीटर ड्राइविंग, पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर और माइलेज 15 किमी प्रति लीटर मानकर कैलकुलेशन किया गया है.
मान लेते हैं कि खरीदते समय डाउन पेमेंट 3 लाख रुपये (20 प्रतिशत) देना पड़ता है. बाकी 12 लाख रुपये का लोन 8.5 से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर पर 5 साल के लिए लिया जाता है. मासिक ईएमआई लगभग 24,500 से 25,000 रुपये के आसपास आती है. इस तरह 5 साल में कुल ईएमआई भुगतान करीब 14.7 से 15 लाख रुपये हो जाएगा, जिसमें ब्याज का हिस्सा 2.7 से 3 लाख रुपये तक है. कुल खरीद लागत डाउन पेमेंट समेत 17.7 से 18 लाख रुपये पहुंच जाती है.
रनिंग खर्च में 5 साल का फ्यूल खर्च 5 लाख रुपये, मेंटेनेंस 75,000 रुपये (सालाना 15,000 रुपये) और इंश्योरेंस 1.25 लाख रुपये (सालाना औसत 25,000 रुपये) शामिल कर लेते हैं. इस तरह कुल आउटफ्लो 24 से 25 लाख रुपये के करीब हो जाता है. 5 साल बाद गाड़ी की रीसेल वैल्यू करीब 7 से 8 लाख रुपये रह सकेगी, क्योंकि क्रेटा अपनी रीसेल वैल्यू अच्छी रखती है. नेट खर्च घटकर 16.5 से 17.5 लाख रुपये रह जाता है. खरीदने में गाड़ी आपकी अपनी हो जाती है, कस्टमाइजेशन की आजादी मिलती है और किलोमीटर की कोई लिमिट नहीं होती.
लीज या रेंट का कैलकुलेशन
लीज या रेंट पर लेने के विकल्प में मासिक किराया (Ayvens या अन्य कंपनियों में) लगभग 25,000 से 28,000 रुपये प्रति माह है, जिसमें मेंटेनेंस और इंश्योरेंस शामिल रहता है. 60 महीनों का कुल किराया करीब 15 से 16.5 लाख रुपये होता है. फ्यूल का खर्च वही 5 लाख रुपये जोड़ दें तो कुल खर्च 20 से 21.5 लाख रुपये पहुंच जाता है. यहां कोई रीसेल वैल्यू नहीं मिलती और कार पीरियड खत्म होने पर कंपनी को वापस करनी पड़ती है. किलोमीटर लिमिट भी तय होती है, जो ज्यादा चलाने पर अतिरिक्त चार्ज लगाती है.
5 साल के हिसाब से खरीदना आमतौर पर 2 से 4 लाख रुपये सस्ता पड़ता है. अगर आप 30 प्रतिशत टैक्स ब्रैकेट में हैं और कॉर्पोरेट लीज लेते हैं तो लीज पर टैक्स बचत (किराए पर 30 प्रतिशत तक) से ये विकल्प और आकर्षक हो जाता है, नेट खर्च 14 से 15 लाख तक कम हो सकता है.हालांकि, पर्सनल यूज में खरीदना ज्यादातर मामलों में बेहतर साबित होता है.
अगर आप साल में 10,000 किलोमीटर से कम चलाते हैं, हर 3-4 साल में गाड़ी बदलना पसंद करते हैं या लिक्विडिटी बनाए रखना चाहते हैं तो लीज या रेंट आसान विकल्प है. दिल्ली-एनसीआर में ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या को देखते हुए शॉर्ट टर्म रेंटल भी अच्छा है, लेकिन लंबे समय में महंगा पड़ता है.
| पैरामीटर | गाड़ी खरीदना (Buy) | रेंट पर लेना (Rent) |
| मालिकाना हक | आपका अपना एसेट है. | कंपनी का एसेट है. |
| मेंटेनेंस | आपकी जिम्मेदारी. | कंपनी की जिम्मेदारी. |
| फ्लेक्सिबिलिटी | मॉडल बदलना मुश्किल. | जब चाहें कार बदल सकते हैं. |
| फायदा | लंबी अवधि (7-10 साल) के लिए सस्ता विकल्प. | कम अवधि (2-3 साल) के लिए बेहतर. |
हमारी सलाह: फैसला आपकी आय, ड्राइविंग पैटर्न और फ्यूचर प्लान पर निर्भर करता है. ज्यादा ड्राइविंग, 7-10 साल रखने की योजना और कैपिटल अफोर्ड करने की क्षमता हो तो खरीदना सही रहेगा. फ्लेक्सिबिलिटी और कम कैपिटल के लिए लीज बेहतर है. EMI कैलकुलेटर, लीज कोटेशन और ब्याज दरें चेक करके अपना हिसाब लगाएं. सही निर्णय से न सिर्फ पैसे बचेंगे, बल्कि तनाव भी कम होगा.
