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Ankur Nayak Success Story: पूर्व आईएएफ फाइटर पायलट स्क्वाड्रन लीडर अंकुर नायक ने रिटायरमेंट के बाद पंजाब रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम्स शुरू कर किसानों से पराली खरीदकर ऊर्जा व प्रदूषण समाधान पर काम कर रहे हैं. आइये जानते हैं उनकी सफलता के बारे में.
नई दिल्ली: देश के दो महान पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल के साथ उनका साया बनकर रहे स्क्वाड्रन लीडर अंकुर नायक की सफलता की कहानी बहुत ही दिलचस्प है. वह भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के पूर्व अधिकारी हैं, जिन्होंने भारत के राष्ट्रपति के सहायक (एडीसी) के रूप में काम किया. 2001 में कमीशन प्राप्त करने के बाद (168वें कोर्स में) उन्होंने 2006 से 2011 तक राष्ट्रपति सचिवालय में एडीसी के रूप में काम किया और फिर सेवानिवृत्त हो गए.
स्क्वाड्रन लीडर अंकुर नाइक भारतीय वायु सेना के एक पूर्व फाइटर पायलट भी हैं. इस दौरान उन्होंने बीकानेर, भुज, बरेली और लखनऊ में फाइटर एयरक्राफ्ट उड़ाए. वह 168वें कोर्स का हिस्सा रहे हैं. अभी भी उनके अंदर देश की सेवा करने का जोश और जुनून कायम है. यही वजह है कि 2011 में जैसे ही रिटायरमेंट हुआ उन्होंने कुछ और ना करके देश की सेवा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया और ज्वाइन कर लिया पंजाब रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम्स प्रा. लिमिटेड कंपनी, जिसके सीएमडी खुद एक पूर्व आर्मी अफसर हैं.
देश से ऊर्जा संकट मिटाने का लक्ष्य
अंकुर नायक ने बताया कि उनके पिता भी एयरफोर्स में थे और मां स्कूल में प्रिंसिपल रही हैं. वह मुख्य रूप से नासिक के रहने वाले हैं. उनका सफर राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से शुरू हुआ. एयरफोर्स में उनका अनुभव बेहद शानदार रहा है. क्योंकि उन्हें कई फाइटर प्लेन उड़ाने का मौका मिला. देश के दो महान पूर्व राष्ट्रपति के साथ रहे, लेकिन रिटायरमेंट के बाद भी वह अपने देश की सेवा करना चाहते थे. इसीलिए उन्होंने अपने 12वीं कक्षा में बने हुए एक प्रोजेक्ट को याद किया.
उन्होंने बताया था कि एनर्जी को कैसे स्टोर कर सकते हैं. यानी कैसे जो ऊर्जा है, उसका दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता .है यानी सर्कुलर ऊर्जा का कैसे इस्तेमाल करें. इसके ऊपर आधारित उनका प्रोजेक्ट था. जब वह एयर फोर्स से बाहर आए तो उन्हें ऊर्जा के क्षेत्र में काम कर रही पंजाब रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम्स प्रा. लिमिटेड कंपनी जिसके सीएमडी खुद एक पूर्व आर्मी अफसर हैं, उनका साथ मिल गया. उन्होंने बताया कि पूर्व आर्मी अफसर भी हमारे देश से ऊर्जा के संकट को दूर करने पर मेहनत कर रहे थे. दोनों ने मिलकर 2011 में इस कंपनी की स्थापना की.
किसानों से खरीद रहे पराली
अंकुर नायक ने बताया कि दिल्ली में ठंड के मौसम में प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन जाता है. उसे दूर करने के लिए किसानों से पराली खरीद कर उससे तमाम तरह के प्रोडक्ट उनकी कंपनी में बनाए जाते हैं. ऐसा नहीं है कि पराली के बदले किसानों को फायदा नहीं दिया जाता है. बल्कि किसानों को क्यूआर कोड के जरिए उनके अकाउंट में डायरेक्ट पैसा भेजा जाता है, जिससे किसानों को भी अन्नदाता से ऊर्जा दाता बनाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि किसानों को इससे काफी फायदा हो रहा है. इसके अलावा इस कंपनी के जरिए गांव-गांव तक टेक्नोलॉजी और ऊर्जा को कैसे पहुंचा जाए और लोगों को इसके प्रति जागरूक कैसे किया जाए इस पर भी काम किया जा रहा है.
इसके अलावा जब कोविड-19 में लावारिस लाशें पड़ी हुई थी, जिसकी कोई भी पहचान नहीं हो पा रही थी या उनके अपने लोगों ने ऐसी लाशों का क्लेम करने से मना कर दिया था. उस समय उनकी कंपनी की ओर से एक शव के दाह संस्कार के लिए लगभग 250-300 किलोग्राम पराली की ईंटें (ब्रिकेट्स) बना कर श्मशान घाट को फ्री में दिए गए थे, जिस वजह से ऐसी लाशों का अंतिम संस्कार हो सका था. उस वक्त लोगों ने यह नहीं देखा था की अंतिम संस्कार के लिए चंदन या आम की लकड़ी ही जरूरी है.
देश की ऊर्जा का होगा निर्यात
अंकुर नायक ने बताया कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में कैसे दूसरे देशों से और बेहतर बनाया जाए और भारत में ऊर्जा संकट को कैसे दूर किया जाए. इस पर उनकी कंपनी लगातार काम कर रही है. इसके अलावा भारत में ऐसी ऊर्जा जिसका इस्तेमाल नहीं होता है. उसके निर्यात करने पर भी कदम उठाए जा रहे हैं. आने वाले समय में ऊर्जा के क्षेत्र में भारत को सभी देशों से ज्यादा शक्तिशाली बनाने पर काम किया जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि देश के हर व्यक्ति को देश की रक्षा के लिए सेना ज्वाइन करने की जरूरत नहीं है, आप ऐसे छोटे कदम उठाकर भी देश की सेवा कर सकते हैं.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें
