गमले में भर-भर कर आएंगे टमाटर! फूल आते ही डालें ये फ्री घोल, जानें इस्तेमाल का सही तरीका और सावधानी

Wood Ash Fertilizer: छत या बालकनी में सब्जियां उगाने का शौक अब सिर्फ शौक नहीं, एक छोटी-सी खुशी बन चुका है. सुबह उठकर अपने ही लगाए पौधों में फूल देखना अच्छा लगता है, लेकिन दिल तब टूट जाता है जब वही फूल कुछ दिनों में झड़ जाते हैं और फल बन ही नहीं पाते, अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो समझ लीजिए कि पौधों को सही पोषण नहीं मिल पा रहा. खासकर टमाटर जैसे पौधों को उस वक्त ज्यादा ताकत चाहिए होती है जब उनमें फूल आने लगते हैं. ऐसे में एक साधारण-सा, लगभग फ्री में मिलने वाला घोल आपकी इस समस्या को खत्म कर सकता है. माली का ये देसी नुस्खा न सिर्फ आसान है, बल्कि सही तरीके से इस्तेमाल करने पर गमले को सब्जियों से भर सकता है.

क्यों झड़ जाते हैं फूल?
अक्सर लोग सोचते हैं कि पानी और धूप ही काफी है, लेकिन सच्चाई थोड़ी अलग है. जब पौधों में फूल आते हैं, तब उन्हें ज्यादा पोटैशियम की जरूरत होती है, अगर ये पोषण नहीं मिलता, तो फूल फल बनने से पहले ही गिर जाते हैं. यही वजह है कि अच्छे-खासे पौधे भी खाली रह जाते हैं.

लकड़ी की राख का कमाल
क्यों काम करती है राख?
लकड़ी की राख को लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन असल में ये पौधों के लिए किसी टॉनिक से कम नहीं है. इसमें पोटैशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे जरूरी तत्व होते हैं. पोटैशियम खास तौर पर फूलों को फल में बदलने में मदद करता है और जड़ों को मजबूत बनाता है. एक छोटे शहर में रहने वाले माली रामलाल बताते हैं कि उन्होंने इसी राख के घोल से अपने गमलों में इतनी मिर्च उगाई कि पड़ोसियों को भी बांटनी पड़ी.

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घोल बनाने का आसान तरीका
-घर पर ऐसे तैयार करें इस घोल को बनाना बेहद आसान है और इसमें कोई खर्च भी नहीं आता.
-सबसे पहले 5 लीटर पानी लें और उसमें 5 मुट्ठी लकड़ी की राख मिला दें.
-इसे अच्छे से हिलाएं और रातभर के लिए छोड़ दें.
-रातभर में राख के पोषक तत्व पानी में घुल जाते हैं.
-ध्यान रखें कि कोयले की राख का इस्तेमाल न करें, क्योंकि वो पौधों के लिए नुकसानदेह हो सकती है.

5 गुना पानी मिलाना क्यों जरूरी?
-सुबह तक जो घोल तैयार होगा, वो काफी तेज होता है.
-इसे सीधे पौधों में डालना सही नहीं है.
-इसे इस्तेमाल करने से पहले इसमें 5 गुना सादा पानी मिलाएं.

अगर आपने ऐसा नहीं किया, तो राख की गर्म तासीर पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है. सही मात्रा में पतला किया गया घोल ही असर दिखाता है.

फ्लावरिंग स्टेज पर ही डालें
सही समय का फर्क
-माली की सबसे अहम सलाह यही है कि इस घोल को तभी डालें जब पौधों में फूल आने लगें.
-इस समय पौधों को अतिरिक्त ताकत चाहिए होती है.

जब आप इस स्टेज पर राख का पानी डालते हैं, तो फूल गिरने की बजाय फल में बदलने लगते हैं. मिर्च, टमाटर, भिंडी ही नहीं, लौकी और तोरई जैसी बेल वाली सब्जियों में भी इसका असर साफ दिखता है.

मिट्टी का सूखा होना जरूरी
-घोल डालने से पहले एक छोटी-सी बात का ध्यान रखें. गमले की मिट्टी हल्की सूखी होनी चाहिए.
-गीली मिट्टी में डालने पर घोल नीचे निकल जाता है और जड़ों तक सही से नहीं पहुंचता.

सूखी मिट्टी स्पंज की तरह काम करती है और पोषक तत्वों को अच्छी तरह सोख लेती है.

इस्तेमाल का सही तरीका और सावधानी
-इस घोल को हफ्ते में एक बार डालना काफी है.
-एक महीने में 2-3 बार से ज्यादा इस्तेमाल न करें, वरना मिट्टी का संतुलन बिगड़ सकता है.

अगर आप इसे सही मात्रा और सही समय पर इस्तेमाल करते हैं, तो कुछ ही हफ्तों में फर्क दिखने लगेगा. पौधों की पत्तियां ज्यादा हरी दिखेंगी और गमले सब्जियों से भरने लगेंगे.

छोटे-छोटे गमलों में भी भरपूर सब्जियां उगाना मुश्किल नहीं है, बस सही समय पर सही पोषण देना जरूरी है. लकड़ी की राख का ये आसान घोल आपकी गार्डनिंग को नई दिशा दे सकता है.

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